प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महिला आरक्षण को लागू करने के लिए विपक्ष को क्रेडिट लेने का ब्लैंक चेक दे दिया. संसद के विशेष सत्र में लाए गए तीन बिलों पर प्रधानमंत्री ने जहां अपने भाषण में गारंटी दी है कि दक्षिण भारत के साथ सीटों के अनुपात में कोई नाइंसाफी नहीं होगी. वहीं उन्होंने कहा है कि उन्हें महिला आरक्षण का क्रेडिट नहीं चाहिए लेकिन जो लोग इसका विरोध करेंगे उन्हें राजनीतिक घाटा होगा. हालांकि प्रधानमंत्री के इस भरोसे के बावजूद विपक्ष बिलों के विरोध पर उतारू है. परिसीमन को बुलडोज करने का आरोप लगाया जा रहा है. साथ ही बिलों के विरोध में जाति जनगणना कार्ड और उसमें भी महिला आरक्षण में मुस्लिम आरक्षण का दांव चलने की कोशिश की गई है. सवाल ये है कि क्या ये सब महिलाओं के 33% हक को रोकने का बहाना है? क्या धर्म-जाति के दांव से महिला आरक्षण पर अड़ंगा लग सकेगा? और क्या प्रधानमंत्री का ऑफर लोकसभा में सरकार का नंबर गेम साध सकेगा?