एक ओर बंगाल का फैसला नई शुरुआत की उम्मीदें लेकर आया है, तो दूसरी ओर चुनाव नतीजों के बाद से हो रही हिंसा ने पूरे देश को परेशान कर दिया है. बीती रात शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मार कर हत्या कर दी गई. राजनीतिक हिंसा की इस दिल दहलाने वाली वारदात को खुद शुभेंदु अधिकारी ने साजिश कहा है. सवाल है कि क्या बंगाल के जनादेश के खिलाफ भय का माहौल खड़ा करने की जानबूझकर कोशिश हो रही है? अब तक बंगाल में मुस्लिम वोटों का समीकरण विनिंग फैक्टर रहा है, लेकिन क्या अबकी बार हिंदुत्व के दम पर नतीजों में दिखे परिवर्तन को नाकाम करने की कोशिश हो रही है? सवाल ये भी उठेगा कि इस चुनाव नतीजों से विपक्ष क्या सबक सीखेगा? क्या मुस्लिम तुष्टीकरण के बीजेपी के आरोपों में विपक्ष फंस गया?