चुनाव में कोई खुद को दक्षिणपंथी कहता है, कोई खुद को लेफ्ट का बताता है, कोई सेंटर की विचारधारा दिखाता है, लेकिन क्या धीरे-धीरे किसी तरफ की विचारधारा नहीं बल्कि केवल मुफ्तवादी सोच पर ही चुनाव हुआ करेंगे? देखिए दस्तक