एक दंगल ट्रम्प और ईरान के बीच चल रहा है. दूसरे दंगल का जोखिम पूरी दुनिया उठा रही है. उनकी तो जैसे तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे कट जाएगी. लेकिन बाकी दुनिया का क्या होगा. इसकी फिक्र अब भारत में भी दिखने लगी है. क्योंकि पीएम मोदी ने दूर दक्षिण तेलंगाना में जाकर ही सही लेकिन ये मान लिया है कि ईरान की जंग के कारण कच्चे तेल के दाम में जो आग लगी है उसमें भारत का खजाना भी बहुत तेजी से फुंक रहा है. फरवरी में जिस खजाने में 728 अरब डॉलर से ज्यादा थे वहां 10 हफ्ते में 690 अरब डॉलर ही बचे हैं. रोज तेल कंपनियां 16-1700 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं. सरकार को एक्साइज ड्यूटी में 14 हजार करोड़ की चपत लग चुकी है. ऊपर से कच्चा तेल 126 डॉलर बैरल के भाव छू रहा है. ऐसे में भी भारत में अभी तक पेट्रोल डीजल के दाम नहीं बढे हैं. और इसे बढ़ाना न पड़े इसलिए पीएम मोदी ने तेलंगाना की सियासी रैली से देशवासियों के सामने आठ सूत्री अपील की है. इसमें पेट्रोल डीजल के कम इस्तेमाल से लेकर खाने के तेल के कम इस्तेमाल तक और विदेशों में सैर सपाटे से लेकर किसानों को खाद तक के कम इस्तेमाल की नसीहत दी गई है. क्योंकि इसमें भारत के खजाने से डॉलर के पते तेजी से घिस रहे हैं.