तमिलनाडु गवर्नर और विजय दोनों के लिए बेहतर है दोबारा चुनाव, दिलचस्प सुझाव आया है

तमिलनाडु का ये मुश्किल वक्त है. विजय को मिले जनमत में बहुमत के लिए कसर बाकी रह गई है. दस विधायकों की जुगाड़ में जुटे विजय लाचार दिख रहे हैं. ऐसे में सुझाव दिया जा रहा है कि कमजोर गवर्नमेंट से बेहतर है नया इलेक्शन.

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जनता सुन ली है विजय की सीटी की आवाज. जनता सुन ली है विजय की सीटी की आवाज.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:35 PM IST

तमिलनाडु में चुनाव हो गए. रिजल्ट आ गया. विजय की TVK पार्टी सबसे बड़ी बनकर आई है. करीब 108 सीटें जीती हैं. लेकिन गवर्नमेंट बनाने के लिए 118 चाहिए. यानी अभी दस सीटों की कमी है. और इसी को लेकर सियासी खेल शुरू हो गया है. छोटे-छोटे दल, सपोर्ट के सौदे, हॉर्स ट्रेडिंग जैसी खबरें. यहां तक कि पुराने दुश्मन डीएमके और AIADMK के साथ मिलकर गवर्नमेंट बनाने की बातें भी चल रही हैं. तमिलनाडु गवर्नर आरवी आरलेकर विजय को सरकार बनाने का न्योता देने को लेकर असमंजस में हैं. ऐसे में एक दिलचस्प सुझाव आया है.

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तमिलनाडु के राजनीतिक संकट पर Zoho फाउंडर श्रीधर वेंबू ट्विटर पर लिखते हैं कि ‘नंबर्स ठीक नहीं लग रहे. जो भी गवर्नमेंट बनेगी, वो अस्थिर रहेगी. तमिलनाडु इससे बेहतर डिसर्व करता है.’ उन्होंने प्रेसिडेंट्स रूल और फ्रेश इलेक्शन का सुझाव दिया. साथ में सख्ती से “नो कैश फॉर वोट्स” लागू करने की बात कही. उनका कहना है कि नया इलेक्शन हुआ तो TVK सुपर मेजोरिटी ला सकता है. वेंबु साहब सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, तमिलनाडु से गहरा लगाव रखने वाले शख्स हैं. उनकी बात सुनने लायक है.

जनता ने क्या कहा?

जनता का संदेश साफ है. पुरानी द्रविड़ पार्टियों DMK और AIADMK का लंबा राज अब कमजोर पड़ रहा है. TVK ने अकेले इतनी सीटें जीतीं, ये बड़ी बात है. लोग चेंज चाहते थे. भ्रष्टाचार, पुरानी थकी हुई राजनीति, युवाओं की नए विकल्प की तलाश ने मिलकर विजय खोजा और आगे लाया.

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हमारा सिस्टम पॉपुलरिटी और मेजोरिटी में फर्क करता है. जिसमें आखिरी कसौटी मैजोरिटी ही है. लेकिन, सिस्टम विजय और बाकी खिलाड़ियों को सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने की जुगाड़ का मौका देता है. दस विधायकों की कमी है तो अब उनको मनाने, दबाने या खरीदने की कोशिशें चल रही हैं. ये जनता की इच्छा का अपमान नहीं तो क्या है?

कमजोर गवर्नमेंट से क्या होगा?

कल्पना कीजिये कि विजय मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन उनका हर फैसला दूसरे दलों की कृपा पर निर्भर होगा. आज सपोर्ट करेंगे, कल हट जाएंगे. बजट पास करने में दिक्कत, नई नीतियां लाने में समझौता. इससे क्या होगा- इंडस्ट्री आएगी? नौकरियां बढ़ेंगी? शिक्षा और हेल्थ सुधरेगी?

ऐसी अस्थिर गवर्नमेंट में ये सब मुश्किल है. पुरानी पार्टियां जो दशकों से सत्ता में रही हैं, नई टीम को हर कदम पर अड़चन डाल सकती हैं. विकास रुक जाएगा. फ्रीबीज के नाम पर पैसा बंटेगा, लेकिन असली काम पीछे छूट जाएगा.

नया इलेक्शन क्यों बेहतर विकल्प है?

श्रीधर वेंबु कहते हैं कि नया इलेक्शन हो तो TVK और मजबूत होकर आएगा. क्यों? क्योंकि लोग देख चुके हैं कि पुरानी पार्टियां सत्ता के लिए फिर से साथ आ रही हैं. एंटी इनकंबेंसी अभी ताजा है. चेंज का जोश बढ़ सकता है.

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अगर ‘नो कैश फॉर वोट्स’ सख्ती से लागू हो तो और साफ जनमत आएगा. हां, दोबारा चुनाव कराने पर खर्चा होगा. लेकिन अस्थिर गवर्नमेंट से होने वाला नुकसान उससे कहीं ज्यादा बड़ा होगा. सालों तक घोटाले, लड़ाई और पॉलिसी पैरालिसिस चलेगा. एक अच्छा और क्लियर मैंडेट मिल जाए तो अगले पांच साल राज्य स्थिरता से आगे बढ़ेगा. 

जनता और पार्टियों को दोबारा सोचने का मौका मिलेगा

चुनाव नतीजों से पता चल गया है कि डीएमके की स्टालिन सरकार से जनता का मोह भंग हो रहा था. लोगों के सामने एक परंपरागत विकल्प AIADMK के रूप में मौजूद था. लेकिन, मन ही मन उन्हें विजय भा रहे थे. नतीजों के बाद जनता और विजय दोनों को साफ हो गया है कि AIADMK ही नहीं, TVK भी सत्ता की उत्तराधिकारी है. यानी, अगले चुनाव में विजय को पूर्ण बहुमत ही नहीं, प्रचंड बहुमत मिल सकता है. याद कीजिये, दिल्ली में पहली बार चुनाव लड़ रहे केजरीवाल को अल्पमत मिला था. लेकिन, कांग्रेस के साथ गठबंधन टूटने के बाद जब वो दोबारा चुनाव में गए तो जनता ने उन्हें 70 में से 67 सीटें दीं. कौन जाने, दोबारा चुनाव में विजय की सीटों का आंकड़ा सौ सीटों को छोड़िए, 200 के भी पार हो जाए.

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यदि दोबारा चुनाव की नौबत आती है तो हो सकता है कि DMK और AIADMK भी अपनी प्रतिद्वंद्विता को छोड़ एक गठबंधन बनाकर चुनाव में उतर जाएं. जैसा सरकार बनाने के लिए अभी साथ आना चाहती हैं. इतना ही नहीं, बीजेपी भी बजाय AIADMK की पिछलग्गू पार्टी रहने के, अपने बलबूते वह चैलेंज पेश करना चाहे. कांग्रेस भी DMK को छोड़ TVK का साथ पकड़ ले. यानी, सभी पार्टियों के लिए नए अवतार में उतरने का मौका रहेगा.

तमिलनाडु के लोग क्या चाहते हैं?

साफ-सुथरी गवर्नमेंट, जहां परिवार या जाति का खेल न चले. अच्छे जॉब्स और विकास. फ्रीबीज की राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षा, हेल्थ और इंडस्ट्री पर फोकस. नए और युवा लीडर्स को मौका. अगर हॉर्स ट्रेडिंग से गवर्नमेंट बनी तो ये उम्मीदें टूट जाएंगी. लोग फिर निराश होंगे. “फिर वही पुरानी कहानी” वाला फीलिंग आएगा.

तमिलनाडु का इतिहास बहुत शानदार रहा है. इंडस्ट्री, कल्चर, एजुकेशन में आगे रहा. लेकिन राजनीति में कई सालों से अटका हुआ है. ये मौका है नई शुरुआत का. विजय की TVK ने दिखाया कि लोग चेंज चाहते हैं, तो नया विकल्प भी ढूंढ लेते हैं. अब सिस्टम को भी जनता की इच्छा का सम्मान करना चाहिए. मेजोरिटी न होने पर प्रेसिडेंट्स रूल लगाकर फ्रेश इलेक्शन करवाना सबसे साफ और सही रास्ता है.

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कमजोर और लाचार गवर्नमेंट से बेहतर है कि तमिलनाडु फिर इलेक्शन में जाए. एक मजबूत और क्लियर जनमत के साथ नई गवर्नमेंट आए. जो विकास करे, भ्रष्टाचार कम करे और लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरे. श्रीधर वेंबू ने कहा कि मैं तमिलनाडु और भारत से प्यार करता हूं, इसलिए ये कह रहा हूं. उनकी बात में कोई सियासी स्वार्थ नहीं, सिर्फ राज्य की भलाई है. नया इलेक्शन. नई उम्मीद. नया तमिलनाडु.

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