महिला आरक्षण बिल पर संसद ने अपना काम कर दिया है. लंबे इंतजार के बाद विशेष सत्र में करीब करीब सर्व सम्मति से ये बिल पास भी हो चुका है - और फिलहाल 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर सिर्फ राष्ट्रपति भवन से मुहर लगना बाकी है. हालांकि, लागू कब से हो पाएगा ये कहना अभी मुश्किल हो रहा है क्योंकि अभी कई प्रक्रियाओं से गुजरना बाकी ही है.
चुनावों में महिला आरक्षण का मुद्दा क्या असर दिखाएगा ये तो अभी नहीं मालूम, लेकिन बीजेपी की तरफ से श्रेय लेने के साथ ही आने वाले 2024 के आम चुनाव के लिए वोट मांगने का काम भी शुरू हो चुका है - और ये बीड़ा भी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही उठाया है.
बीजेपी मुख्यालय से देश की महिलाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को तो घेरा ही, ये भी समझा दिये कि कैसे ये सब बीजेपी के तीन दशकों के प्रयासों का प्रतिफल है. बोले, 'ये लोग जो बिल फाड़ा करते थे, उन्हें आगे बढ़ कर महिला बिल का सपोर्ट करना पड़ा.'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'ये पूरा इंतजाम करके हम सदन में गये थे... बीजेपी तीन दशक से प्रयास कर रही थी... ये हमारा कमिटमेंट था… और हमने उसे पूरा कर दिया है.'
ये तो बताया ही कि कैसे ये सब देश में एक मजबूत सरकार होने की वजह से ही मुमकिन हुआ है, और लगे हाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगली पारी के लिए वोट भी मांग लिया, 'देश को आगे ले जाने के लिए पूर्ण बहुमत वाली मजबूत और निर्णायक सरकार बहुत ही जरूरी है.'
1. महिलाओं का इंतजार खत्म होने की तारीख तो नहीं लेकिन एक पीरियड मिल गया है
आगे के अनिश्चित इतंजार के बावजूद बिल पास होने के बाद महिलाओं के मन में जो उम्मीद बंधी है, खुश होने का मौका तो है ही. निश्चित तौर पर महिला नेताओं को आरक्षण के तहत प्रतिनिधित्व मिलने के लिए अभी काफी इंतजार करना होगा, लेकिन ये भी तो है कि अभी का इंतजार अनंतकाल के लिए नहीं है.
महिला आरक्षण लागू होने के लिए जनगणना और परिसीमन जैसी जरूरी चीजें होनी है. जो भी होगा उसके बाद ही हो सकेगा. संसद की बहस तो पूरी हो चुकी है, अभी सड़क पर बहस बाकी है. और ऐसी बहस तो चुनावों में ही होगी. विपक्ष के नेताओं के बयानों को मान कर चलें तो हो सकता है कि बहस 2024 के आम चुनाव के बाद भी चले. शायद 2029 वाले के बाद भी.
ये ठीक है कि देश की महिलाओं को राजनीति में हक के साथ हिस्सेदारी के लिए कोई तारीख तो नहीं मिली है, लेकिन एक निश्चित अवधि तो मुकर्रर हो ही गयी है. जैसे 27 साल पहले महिलाओं के लिए आरक्षण की पहल हुई थी, एक दिन वो भी आएगा जब महिला आरक्षण भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम की तरह वास्तविकता में होगा.
2. बीजेपी तो महिला आरक्षण के श्रेय के साथ वोट लेने की भी कोशिश में है
जब भी कुछ खास होता है तो बीजेपी नेता पार्टी मुख्यालय पहुंच कर जश्न मनाते हैं. महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद बीजेपी मुख्यालय में चुनावों में जीत जैसा ही माहौल देखने को मिला. मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में बीजेपी की महिला कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे - 'मोदी है तो मुमकिन है!'
लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद क्रेडिट न लेकर महिला आरक्षण बिल पास होने का श्रेय बीजेपी के महिला कार्यकर्ताओं के जरिये देश की महिलाओं को दे डाला, 'ये कैसे संभव हो पाया... ये आपने किया है... ये कैसे किया... देश की जनता ने... महिलाओं ने... वोट देकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी... आपने जो सरकार को मजबूती दी... उसी की ताकत है कि आज ये सरकार फैसले भी ले पा रही है... और तीन दशक से लटके काम को भी पूरा कर रही है.'
फिर मोदी ने महिलाओं को मजबूत सरकार का महत्व भी समझाया, 'पूर्ण बहुमत वाली सरकार होती है तो देश ऐसे ही फैसले ले पाता है... हमने महिला हित में फैसले लिये... किसी के राजनीतिक स्वार्थ को आड़े नहीं आने दिया...
और फिर विपक्ष के श्रेय लेने की कोशिशों को भी नकार दिया. मोदी ने कहा, 'पूरी निष्ठा से प्रयास नहीं हुआ... पहले बिल के नाम पर लीपापोती की गयी.'
विपक्ष को कठघरे में खड़ा करने की भी कोशिश की, नारी का अपमान करने का भी प्रयास किया गया... वंदना पर आपत्ति क्यों है... क्या नारी शक्ति की वंदना नहीं करनी चाहिये... नारी शक्ति को प्रणाम करना चाहिये कि नहीं? क्या राजनीतिक अहंकार इतना आ जाये कि नारी शक्ति के वंदन की बात करें तो लोगों के पेट में चूहे कूदने लगें.
बिल पास होने को लेकर बोले, नारी शक्ति वंदन अधिनियम कोई सामान्य कानून नहीं है... ये नए भारत की नई लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का उद्घोष है... ये अमृतकाल में सबका प्रयास से विकसित भारत के निर्माण की तरफ बढ़ा कदम है.
महिलाओं के लिए बीजेपी सरकार की तरफ से किये कामों को उपलब्धियों के रूप में गिनाते हुए बातों बातों में ही मोदी ने तीन तलाक कानून का भी जोर देकर जिक्र किया. ऐसा लगा जैसे वो विपक्ष के उस मांग को काउंटर करना चाहते हैं, जिसमें अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग हो रही है.
3. OBC आरक्षण के बहाने विपक्ष भी तो और करीब आया है
सदन में ये देखने को मिला कि कैसे महिला बिल के रास्ते की बाधा बनने के तोहमत से बचने के लिए समाजवादी पार्टी ने भी समर्थन दिया. लालू यादव की पार्टी आरजेडी का कोई सांसद न होने के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने ओबीसी की शर्त जोड़ कर उनकी बात को आगे बढ़ाया. असदुद्दीन ओवैसी ने सीमित भूमिका में ही सही विरोध भी जता दिया - और बीजेपी तो सत्ता में होने के नाते संचालक की भूमिका में तो रहना ही था.
देखा जाये तो महिला बिल पास कराने में सभी ने अपने हिस्से का काम कर दिया है. देश की महिलाओं ने बीजेपी की मजबूत सरकार बना कर, बीजेपी सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर और विपक्षी दलों ने बिल को समर्थन देकर - और सभी के हिस्से में कुछ न कुछ तो आया ही है. किसी के हिस्से में थोड़ा कम, और किसी को थोड़ा ज्यादा.
बीजेपी भले ही महफिल लूट लेने में सफल रहे, लेकिन विपक्ष को भी कोई ज्यादा घाटा हो रहा हो ऐसा नहीं लगता - और कुछ न सही, महिला आरक्षण में ओबीसी आरक्षण के बहाने विपक्षी INDIA गठबंधन मजबूत तो हो ही रहा है.
मृगांक शेखर