नोएडा के सेक्टर 150 से ‘सिस्टम की लाश‘ बरामद, गुनहगार कौन?

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

Advertisement
साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के तीन दिन बाद उनकी कार को निकाला जा सका. साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के तीन दिन बाद उनकी कार को निकाला जा सका.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:46 PM IST

नोए़़डा के सेक्टर 150 के हादसे में केवल एक बाप ने अपना बेटा नहीं खोया है. देश ने सरकार के उस हर महकमे पर से भरोसा खोया है, जिस के जिम्मे लोगों की जिंदगी बचाने और संवारने का जिम्मा है. उसी सिस्टम ने एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर को तड़प तड़प कर मर जाने दिया. दिलदहला देने वाले इस वाकये का हर एक पल अब जनता के सामने है.

Advertisement

16-17 जनवरी की रात नोएडा के सेक्टर 150 में जो हुआ, वह अब सिर्फ एक परिवार या एक शहर की चिंता नहीं है. युवा सॉफ्ट इंजीनियर युवराज मेहता की कार घने कोहरे के चलते निर्माणाधीन मॉल (जिसका काम कई साल से रुका हुआ था) के बेसमेंट बनाने के लिए किए गए गड्डे में में गिर गई. युवराज की कार अभी पूरी डूबी हुई नहीं थी कि उसने सनरूफ से बाहर निकलकर अपने पिता को फोन किया और लोकेशन भेजा. पिता मौके पर पहुंचे पर मजबूर थे. उनका बेटा मदद की भीख मांग रहा था पर मौके पर पहुंची पुलिस और एसडीआरएफ की टीम उस तक पहुंचने में अपनी असमर्थता जता रहे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फेफड़ों में पानी भरना, कार्डियक अरेस्ट और हाइपोथर्मिया बताया गया. युवराज 80-90 मिनट तक छत पर चढ़कर मदद मांगते रहे, लेकिन रेस्क्यू करने वाले पानी में घुसने को तैयार नहीं थे. अगर फायर ब्रिगेड या एसडीआरएफ के पास लंबी सीढ़ियां और आधुनिक तकनीक वाले उपकरण या प्रशिक्षित कर्मचारी होते तो कम से कम मौत नहीं होती. यानी कि किसी भी इमरजेंसी से निपटने की लिए देश का सबसे अमीर शहर कतई तैयान नहीं है.

Advertisement

बताइये, जिन लोगों पर एक जिंदगी बचाने का जिम्मा था, वे मूकदर्शक बने देखते रहे. एक युवा को मर जाने दिया. हो सकता है कि इस हादसे के बाद जब किसी पर इस तरह का संकट आए तो वह पुलिस और प्रशासन को खबर देने के बजाए अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को बुलाना बेहतर समझे. युवराज की मौत के चश्मदीद बता रहे हैं कि पुलिस को 112 नंबर पर कॉल करके मदद मांगी गई थी. पुलिस आ भी गई थी, लेकिन किया कुछ नहीं. नोएडा के सबसे पॉश सेक्टरों में से विकसित हो रहे सेक्टर 150 का यह हादसा कई संदेश देता है. यह हमें बताता है कि देश में सबसे आधुनिक और मालदार शहर बनाना, करोड़ों के फ्लैट और लाखों की गाड़ियों की बिक्री को ही तरक्की नहीं माना जाना चाहिए. कोई शहर मेट्रो, हाइवे और सॉफ्टवेयर पार्क बनाकर केवल खोखली चमक दमक ही बढ़ा सकता है.

युवा सॉफ्ट इंजीनियर युवराज मेहता की मौत भारत के उन तमाम होनहार युवाओं के लिए एक गलत नजीर भी बन सकती है कि जो समझते हैं कि डिग्री लेने के बाद सीधे विदेश में सैटल हो जाना चाहिए. यह सही है कि हमारी इकॉनमी दिन दूना बढ़ रही है. हम चौतरफा तरक्की कर रहे हैं. पर कहीं न कहीं यह भी सही है कि हमारा जीवन बद से बदतर होता जा रहा है. क्योंंकि जिस व्यवस्था या सिस्टम के लिए टैक्सपेयर अपना योगदान देता जा रहा है, वह सिस्टम सिवाय अपनी दबंगई के कुछ नहीं कर रहा है. गलती होने पर जवाबदेही तो बिल्कुल नहीं.

Advertisement

युवराज की मौत पर हंगामा होने के बाद प्रशासन ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को हटा दिया है. क्या ये सजा है? कहा जा रहा है कि वे तो पहले ही तीन साल से जमे हुए थे. हटाए नहीं जाते, तो शायद वैसे ही उनका ट्रांसफर होता. प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया में हादसे की सजा के बतौर रस्मअदायगी भी हो गई. आरोप नोएडा की डीएम मेधा रूपम पर भी लगाया जा रहा है कि तीन तक उनकी हादसे को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. जबकि जनपद स्तर पर डीएम ही SDRF का प्रमुख होता है. लेकिन शासन ने उन पर कोई अंगुली नहीं उठाई, बस सोशल मीडिया पर ही आरोप लगते रहे. कहा तो यहां तक गया कि वे देश के चुनाव आयुक्त की बेटी हैं, इसलिए उन्हें बचाया जा रहा है. यह हो सकता है कि इतने बड़े अफसर की बेटी होने के चलते उनके खिलाफ एक्शन लेना सामान्य बात न हो. पर नोएडा में प्रशासन, पुलिस हो या अथॉरिटी सभी इस लेवल के ही लोग हैं. नोएडा की पुलिस कमिश्नर की फैमिली भी उसी लेवल की है. बल्कि यूं कहिए कि जिलाधिकारी से भी मजबूत परिवार है उनका. इन अफसरों को जिम्मेदार बताना मुश्किल ही नामुमकिन है. उल्टे न्याय मांगने वाले को लेने के देने पड़ सकते हैं.

Advertisement

गौतमबुद्धनगर से सांसद महेश शर्मा मौके पर पहुंचे और यह मलाल जरूर जताया कि इस जगह पर जर्जर रेलिंग के बारे में नोएडा अथारिटी को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया. अब बताइये, एक सांसद की चिट्ठी को भी स्थानीय प्रशासन संजीदगी से नहीं ले रहा है तो एक आम आदमी और उसकी जिंदगी की बिसात ही क्या? अथॉरिटी और प्रशासन की कान पर अगर जूं रेंगती तो युवराज की मौत के 90 घंटे बाद तक उस खतरनाक स्पॉट की बैरकेडिंग नहीं हुई होती? हादसे के चार दिन बाद फरेंसिक टीम घटना स्थल का जायजा लेने पहुंचती है. जाहिर है कि हमारे यहां कोई सिस्टम है ही नहीं इसलिए सिस्टम को दोष देना ही गलत है.

युवराज की मौत पर हंगामा होने के बाद SIT से जांच करवाई जा रही है. ऐसी SIT ने कितने अफसरों को सजा दिलाई है, यह किसी से छुपा नहीं है. जांच किस ओर बढ़ रही है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार शाम को यह जानकारी दी गई कि युवराज ने गुरुग्राम में शराब पी थी. और शराब पीकर गाड़ी चला रहा था. पुलिस की इस जानकारी से इतना तो सबक मिलता ही है कि शराब पीकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिए. वरना, यदि युवराज की तरह एक्सीडेंड होकर कार पानी में गिर गई तो प्रशासन किनारे खड़ा देखता रहेगा, बचाने नहीं आएगा. यदि जांच हुई भी तो अफसरों को बचा लिया जाएगा, और मृतक की बस इज्जत उछाली जाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement