इंडो-यूएस ट्रेड डील पर 4 मिनट गाइड, चार सबसे ‘विवादित‘ मुद्दों की हकीकत समझिये

अमेरिका और भारत के बीच करीब छह महीने टैरिफ को लेकर तनातनी चली. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने के नाम पर भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ थोपा. लेकिन, 2 और 3 फरवरी की मध्यरात्रि ट्रंप ने ही अपने टैरिफ वापस लेते हुए भारत से ट्रेड डील होने की घोषणा की. लेकिन, उनकी घोषणा से कई तरह दावे और आरोप उपजे.

Advertisement
पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई भारत यूएस ट्रेड डील को लेकर कई दावे और आरोप हैं. पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई भारत यूएस ट्रेड डील को लेकर कई दावे और आरोप हैं.

धीरेंद्र राय

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:19 PM IST

इंडिया और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की खबरें तरह-तरह के दावे, जश्न, आरोप और कन्फ्यूजन का सबब बनी हुई हैं. 2 फरवरी 2026 को अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अनाउंस किया कि दोनों देशों के बीच एक ट्रेड डील हो गई है. उसके थोड़ी देर बाद हमारे पीएम नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर कन्फर्म किया कि ये डील रिश्तों को मजबूत करेगी. लेकिन जैसे ही डिटेल्स बाहर आने लगीं, कन्फ्यूजन शुरू हो गया. लोग पूछ रहे हैं कि क्या इंडिया अमेरिकी सामान पर टैरिफ जीरो कर देगा? क्या हम 500 बिलियन डॉलर का सामान अमेरिका से खरीदेंगे? रशियन तेल की खरीद पूरी तरह बंद हो जाएगी? और एग्रीकल्चर सेक्टर को डील में शामिल करके किसानों का नुकसान तो नहीं होगा? इन सब पॉइंट्स पर सबसे ज्यादा विवाद है. चलिए, एक एक करके देखते हैं कि अमेरिकी और इंडियन अधिकारियों ने क्या कहा है. तथ्यों के जरिये समझते हैं इस ट्रेड डील से जुड़े दावों और आरोपों की हकीकत.

Advertisement

सबसे पहले बात अमेरिकी निर्यात पर जीरो टैरिफ की.

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में साफ कहा कि इंडिया अमेरिका के सामान पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को जीरो कर देगा. उन्होंने लिखा, 'इंडिया अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को अमेरिका के खिलाफ जीरो कर देगी.' अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जमिसन ग्रीर ने भी सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में ये दोहराया. उन्होंने कहा कि इंडिया का एवरेज इंडस्ट्रियल टैरिफ 13.5% से जीरो हो जाएगा, और कई एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स जैसे ट्रीनट्स, वाइन, स्पिरिट्स, फ्रूट्स और वेजिटेबल्स पर भी टैरिफ जीरो होगा. ग्रीर ने ये भी जोड़ा कि भारत कुछ अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को मान्यता देगा, जिससे ट्रेड बैरियर्स कम होंगे.

लेकिन इंडियन साइड से क्या? कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने 3 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि डील में इंडिया के सेंसिटिव सेक्टर्स प्रोटेक्टेड हैं, लेकिन उन्होंने जीरो टैरिफ का जिक्र नहीं किया. लोकसभा और राज्यसभा में भी उन्होंने यही कहा कि डील किसानों और MSME के लिए फायदेमंद है, लेकिन कोई स्पेसिफिक डिटेल नहीं दी कि किन अमेरिकी गुड्स पर टैरिफ कम होगा. यहां कन्फ्यूजन ये है कि अगर इंडिया जीरो टैरिफ करता है, तो घरेलू इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा, खासकर अगर अमेरिकी गुड्स सस्ते होकर बाजार में आ जाएं. लेकिन गोयल ने बार-बार जोर दिया कि ये डील 'हर इंडियन को गर्व करने लायक' है और 'नेशनल इंटरेस्ट' को सेंटर में रखा गया है. अभी तक कोई ऑफिशल जॉइंट स्टेटमेंट नहीं आया, तो ये क्लियर नहीं कि जीरो टैरिफ कितने गुड्स पर होगा.

Advertisement

फिर अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के आयात के दावे की हकीकत.

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि इंडिया '500 बिलियन डॉलर से ज्यादा का अमेरिकी एनर्जी, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, कोल और दूसरे प्रोडक्ट्स खरीदेगा.' स्पोकेसपर्सन कैरोलाइन लेविट ने भी ये दोहराया कि मोदी ने 500 बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट्स का कमिटमेंट किया है, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन, एनर्जी और एग्रीकल्चर शामिल हैं. अमेरिकी पक्ष इसे 'Buy American' कमिटमेंट कह रहा है. लेकिन ये नंबर कितना रियलिस्टिक है? 2024 में भारत ने अमेरिका से सिर्फ 41.5 बिलियन डॉलर के गुड्स और 41.8 बिलियन डॉलर की सर्विसेस इंपोर्ट की थीं, कुल मिलाकर 83 बिलियन के आसपास. 500 बिलियन पहुंचने के लिए 500% बढ़ोतरी चाहिए, जिसके लिए सालों लगेंगे. कार्नेगी एंडावमेंट के इवान फाइगेनबॉम ने कहा कि ये 'स्ट्रेच' है, क्योंकि करंट ट्रेड बहुत कम है.

कॉमर्स मिनिस्टर गोयल ने इस नंबर का जिक्र नहीं किया है. उन्होंने सिर्फ कहा कि डील एक्सपोर्ट्स बढ़ाएगी और लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल्स, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी को फायदा होगा. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि 500 बिलियन पहुंचने में 20 साल लग सकते हैं, और ये शायद लॉन्ग-टर्म एस्पिरेशन है, न कि इमीडिएट कमिटमेंट. यहां विवाद ये है कि इंडिया का कुल इंपोर्ट 2025 में 720 बिलियन डॉलर था, तो एक देश से 500 बिलियन का इंपोर्ट मतलब अमेरिका का दबदबा, जो दूसरे सप्लायर्स को हटा देगा. गोयल ने लोकसभा में कहा कि डील 'फ्यूचर-डिफाइनिंग' है और ट्रेड को 500 बिलियन तक ले जाएगी, लेकिन ये द्विपक्षीय कारोबार का लक्ष्य लगता है, न कि सिर्फ इंपोर्ट्स का.

Advertisement

तीसरा बड़ा पॉइंट रशियन तेल की खरीद पर रोक का.

ट्रंप ने कहा कि मोदी ने 'रशियन ऑयल खरीदना बंद करने' का वादा किया है, और अब अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगा. जो कि यूक्रेन वॉर को खत्म करने में मदद करेगा. रॉयटर्स ने व्हाइट हाउस ऑफिशल के हवाले से कहा कि रशियन ऑयल पर 25% पनिशमेंट टैरिफ हट गया है. लेकिन भारतीय पक्ष चुप है. गोयल ने रशियन ऑयल का जिक्र नहीं किया. रूस ने भी कहा कि दिल्ली से कोई ऐसी जानकारी नहीं मिली.

इंडियन रिफाइनर्स ने बताया कि मार्च 2026 तक शिपमेंट्स बुक हैं, और कोई डायरेक्टिव नहीं आया बंद करने का. इंडिया रशियन ऑयल पर डिपेंडेंट है - 2025 में एक तिहाई इंपोर्ट्स रशिया से थे, डिस्काउंटेड प्राइस पर. इसे बंद करने से सालाना 3-4 बिलियन डॉलर का एक्स्ट्रा कॉस्ट आएगा. फिच क्रेडिटसाइट्स ने कहा कि ये कमिटमेंट इकोनॉमिक और पॉलिटिकल रिस्क लाएगा. यहां कन्फ्यूजन सबसे ज्यादा है, क्योंकि अगर इंडिया रूसी तेल खदीदना बंद करता है, तो रूस से संबंधों पर असर पड़ेगा, जो डिफेंस का बड़ा पार्टनर है. गोयल ने सिर्फ कहा कि डील 'स्ट्रैटेजिक डी-एस्केलेशन' है, लेकिन ऑयल पर कुछ नहीं. कई विशेषज्ञ कह रहे हैं कि भारत का रूसी तेल खरीदना उस पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों और डिस्काउंट पर निर्भर करेगा. 

चौथा विवाद एग्रीकल्चर सेक्टर को डील का हिस्सा बताने पर.

Advertisement

अमेरिकी पक्ष से ग्रीर ने कहा कि इंडिया एग्री सेक्टर में कुछ प्रोटेक्शन रखेगी, लेकिन कई गुड्स जैसे नट्स, फ्रूट्स, वेजिटेबल्स पर टैरिफ जीरो होगा. उन्होंने इसे यूएस फार्मर्स के लिए 'बिग विन' कहा, क्योंकि इंडिया का मार्केट 1 बिलियन से ज्यादा लोगों का है. ट्रंप ने भी कहा कि डील में एग्रीकल्चर शामिल है.

लेकिन इंडियन साइड से गोयल ने बार-बार कहा कि एग्री और डेयरी 'फुली प्रोटेक्टेड' हैं. लोकसभा में भी उन्होंने यही दोहराया. और जोड़ा कि डील लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को बूस्ट देगी, लेकिन किसानों के इंटरेस्ट सेफ हैं. यहां विवाद ये है कि विपक्ष जैसे कांग्रेस ने कहा कि डिटेल्स शेयर करो, किसानों को क्यों सैक्रिफाइस किया? एसकेएम जैसे फार्मर ग्रुप्स ने कहा कि यूएस सब्सिडाइज्ड प्रोडक्ट्स इंडियन मार्केट फ्लड कर देंगे. लेकिन गोयल ने कहा कि डील में 'नेशनल इंटरेस्ट सुप्रीम' है, और यूएस ऐग्री सेक्टर्स को लिमिटेड एक्सेस दिया गया है. यूएस एग्री सेक्रेटरी ब्रूक रॉलिन्स ने भी कहा कि डील अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स को इंडियन मार्केट में एक्सपोर्ट बढ़ाएगी.

इन सभी बिंदुओं पर अमेरिका से ज्यादा डिटेल्स आ रही हैं, जबकि भारत सेंसिटिव सेक्टर्स के प्रोटेक्शन पर फोकस कर रहा है. गोयल कह रहे हैं कि जल्द ही जॉइंट स्टेटमेंट आएगा. विदेश मंत्री जयशंकर ने भी यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो से मिलकर डील पर बात की. दूसरी ओर विपक्ष ने लोकसभा में हंगामा किया, राहुल गांधी ने कहा कि पीएम ने 'देश को बेच दिया.' लेकिन गोयल ने कहा कि ये पॉलिटिकल अनार्की है. कुल मिलाकर, ये डील इंडियन एक्सपोर्टर्स के लिए रिलीफ है, क्योंकि 50% टैरिफ से टेक्सटाइल्स, लेदर जैसे सेक्टर्स हर्ट हो रहे थे. स्टॉक मार्केट्स में बूस्ट आया, रुपया मजबूत हुआ. लेकिन डिटेल्स की कमी से कन्फ्यूजन है. रॉयटर्स, अल जजीरा, न्यूयॉर्क टाइम्स, ब्लूमबर्ग जैसे न्यूज सोर्सेज कह रहे हैं कि डील 'अस्पष्ट' है, और इंडिया ने ट्रंप के दावे कन्फर्म नहीं किए. हां, जब तक डील का एक-एक शब्द आधिकारिक रूप से सामने न आ जाए, तब तक कही गई सारी बातें या तो पॉलिटिक्स है या फिर जल्दबाजी. क्योंकि अभी तक कोई फाइनल टेक्स्ट नहीं है, सिर्फ अनाउंसमेंट्स हैं. इंतजार करो, सच्चाई खुद बाहर आएगी. और, वैसे भी सारी सच्चाई से ऊपर है ट्रंप का मूड. क्योंकि, सबसे भरोसेमंद है, उनका भरोसमंद न होना.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement