2024 में प्री-मेडिकल टेस्ट (NEET) के पेपर लीक के बाद सरकार ने पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. मकसद था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रणाली और कार्यप्रणाली को दुरुस्त करना. लेकिन हाल में सामने आए इंटर-स्टेट पेपर लीक कांड के बाद अब शिक्षा मंत्री को कहना पड़ रहा है कि सरकार राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें लागू कर रही है. कह सकते हैं कि देर आयद, दुरुस्त आयद. लेकिन, इस देरी के कारण दो साल के दौरान हुए घपलों का क्या? दोनों साल में करीब 22-22 लाख बच्चों ने यह परीक्षा दी.
जून 2024 में गठित राधाकृष्णन कमेटी ने उसी साल नवंबर में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. चार महीने तक परीक्षा प्रणाली के हर पहलू की जांच-पड़ताल के बाद कमेटी ने कई अहम सुझाव दिए. लेकिन रिपोर्ट फाइलों में दबकर रह गई. सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान दावा कर रहे हैं कि उस कमेटी की कई सिफारिशों को लागू किया गया, लेकिन जिस सिफारिश को लागू करने की जानकारी शुक्रवार को उन्होंने दी, वही कैसे छूट गई थी.
शुक्रवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ऐलान किया कि भविष्य में NEET परीक्षा OMR आधारित सिस्टम पर ली जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे IIT-JEE की परीक्षा होती है. यह वही बदलाव है जिसकी सिफारिश राधाकृष्णन कमेटी ने दो साल पहले की थी. प्रधान ने यह भी कहा कि सरकार अब कमेटी की सिफारिशें लागू करने जा रही है. लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि दो साल तक देरी क्यों हुई? जो बदलाव 2025 से लागू हो सकते थे, वे अब शायद 2027 में दिखेंगे.
2024 में पेश की गई राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट का जिक्र मार्च 2025 में भी एक बार आया था. मौका था दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की बैठक का. समिति ने सरकार और NTA दोनों को कमेटी की सिफारिशें याद दिलाईं और उन्हें तुरंत लागू करने की सलाह दी. लेकिन न सरकार ने गंभीरता दिखाई, न NTA ने कोई खास कदम उठाया.
2025 की NEET परीक्षा बिना किसी बड़े विवाद के निपट गई, तो मान लिया गया कि सब ठीक चल रहा है. जैसे राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट की अब कोई जरूरत ही नहीं बची. लेकिन 2026 के पेपर लीक कांड ने सरकार को उसी रिपोर्ट से धूल झाड़ने पर मजबूर कर दिया.
परीक्षा घोटाले की जांच का क्या हुआ, सीबीआई कितनी कारगर रही?
5 मई 2024, NEET परीक्षा वाले दिन सुबह हजारीबाग के ओएसिस स्कूल से एक गैंग ने सील तोड़कर पेपर हासिल कर लिया था. मामला खुलने के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई. शुरुआत में 13 आरोपी पकड़े गए. धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 21 तक पहुंची. पेपर खरीदने वालों की संख्या 144 बताई गई, जिनका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था.
लेकिन अगस्त 2024 में इस पूरे खेल के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई. वजह थी कि सीबीआई तय 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल ही नहीं कर पाई.
यानी 2024 के पेपर लीक कांड को दो साल गुजर गए, लेकिन न किसी को सजा मिली, न कोई बड़ा नतीजा निकला. मामला धीरे-धीरे सामान्य खबर बनकर रह गया.
2025 का मामला, जो लीक नहीं हुआ... लेकिन सवाल छोड़ गया
ऐसा भी नहीं था कि 2025 की NEET परीक्षा पूरी तरह बेदाग रही. राजस्थान का बिवाल परिवार पहले से ही पेपर लीक रैकेट से जुड़ा बताया जाता रहा है. इसी परिवार के चार सदस्यों ने पिछले साल NEET परीक्षा पास की थी.
गनीमत यह रही कि 2025 में बड़े पैमाने पर पेपर लीक की कोई पुष्टि नहीं हुई और मामला दबा रह गया. नतीजा यह हुआ कि सरकार और NTA ने मान लिया कि परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की कोई जरूरत नहीं है. राधाकृष्णन कमेटी की रिपोर्ट पर धूल की परत और मोटी होती गई.
उधर, 2024 के पेपर लीक केस की जांच सीबीआई करती रही, लेकिन जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची. आखिर में यही कहा गया कि इस नेटवर्क में कुछ बड़े खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं, जो अब तक कानून की पकड़ से बाहर हैं.
2026 का कांड, अब सुधार मजबूरी बन गया
शुक्रवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET परीक्षा प्रणाली में कई बदलावों की घोषणा की. हालांकि उन्होंने दावा किया कि राधाकृष्णन कमेटी की कई सिफारिशें पहले ही लागू की जा चुकी हैं. लेकिन हकीकत यह है कि कमेटी की सबसे अहम सिफारिश - कंप्यूटर आधारित हाइब्रिड परीक्षा प्रणाली - अब तक लागू ही नहीं हुई थी.
अब सरकार कह रही है कि 2027 से NEET परीक्षा CBT यानी Computer-Based Test मोड में आयोजित की जाएगी. मौजूदा Pen and Paper Test सिस्टम की जगह छात्र OMR शीट पर जवाब देंगे, ठीक IIT-JEE की तर्ज पर.
छात्रों के गुस्से और दबाव को देखते हुए सरकार ने 21 मई को होने वाली दोबारा परीक्षा में 15 मिनट अतिरिक्त समय देने का भी ऐलान किया है. इसके अलावा करेक्शन के लिए एक हफ्ते की अतिरिक्त विंडो भी मिलेगी.
NTA ने यह भी कहा है कि दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों से कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी, बल्कि पहले ली गई फीस भी वापस की जाएगी.
लेकिन असली अपराधी अब भी अछूते क्यों?
2024 हो, 2026 हो या उससे पहले के पेपर लीक और नकल कांड - जांच एजेंसियों ने कई गैंग पकड़े, कई बिचौलियों तक पहुंचीं, पेपर खरीदने वालों को गिरफ्तार किया. लेकिन हर बार इस पूरे रैकेट की सबसे अहम कड़ी सवालों से बचती रही - और वह है खुद NTA.
हर बार यही सवाल उठा कि NEET जैसी देश की सबसे अहम परीक्षा इतने बड़े पैमाने पर बिना अंदरूनी मिलीभगत के कैसे लीक हो सकती है? क्या सिर्फ बाहरी गैंग इतने संगठित तरीके से सिस्टम को भेद सकते हैं?
सीबीआई ने छापेमारी की, गिरफ्तारियां कीं, चार्जशीट दाखिल कीं. लेकिन जांच एजेंसियां खुद इशारों में यह मानती दिखीं कि इस खेल में कुछ ‘बड़ी मछलियां’ अब भी पकड़ से बाहर हैं.
यानी शक सिर्फ बाहर बैठे पेपर लीक माफिया पर नहीं, बल्कि NTA के भीतर बैठे उन लोगों पर भी है, जिनकी मदद के बिना ऐसा नेटवर्क खड़ा होना मुश्किल है.
सवाल अब भी वही है - क्या कोई उन तक पहुंचने की हिम्मत करेगा?
धीरेंद्र राय