क्‍या वाकई मैथिल ब्राह्मणों का अपमान किया BJP ने? क्लिप-कटवा राजनीति के सहारे दिल्ली चुनाव

किसी नेता के बयान के किसी हिस्से का क्लिप काटकर अपने विरोधी पार्टी की छवि धूमिल करने का प्रयास करना राजनीतिक दलों का नया खेल है. सभी पार्टियां इस गलत तरीके का इस्तेमाल कर रही हैं. मैथिल ब्राह्मणों के अपमान का मुद्दा भी कुछ ऐसा ही है.

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बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला

संयम श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:37 PM IST

एक दौर था कि राजनीति में अपने विरोधियों को धराशायी करने के लिए बयानों को तोड़ने के बाद मरोड़ना पड़ता था, पर आज कल इसकी जरूरत नहीं रह गई है. आधुनिक तकनीक ने अपने विरोधियों की छवि धूमिल करने का काम वीडियो क्लिप काटकर वायरल करने से हो रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि सभी पार्टियां इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं. इसका सबसे पहले इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी ने धड़ल्ले से किया. पर कहा जाता है कि चेले हमेशा गुरु से एक कदम आगे ही होते हैं. उसी तरह बीजेपी ने क्लिप काटना शुरू किया पर उसका खतरनाक इस्तेमाल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी कर रही है. पहले अमित शाह के संसद में दिए आंबेडकर वाले बयान को क्लिप काटकर इस तरह फैलाया गया कि बीजेपी के मुंह से आह भी नहीं निकल रही है. हाल फिलहाल में इस खेल का मास्टर बनकर निकली है आम आदमी पार्टी. बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के बयान के क्लिप को काटकर इस तरह चलाया गया कि उन्हें मैथिल ब्राह्मण समुदाय का दुश्मन बना दिया गया. आश्चर्यजनक यह है कि सभी जानते हैं कि यह देश की राजनीति के लिए घातक है पर इसे बंद करने के लिए कोई भी आगे आने को तैयार नहीं है. सभी इस ताक में बैठे हैं कि किस तरह अपने विरोधी के किसी बयान की क्लिप को तैयार कर वायरल कर दें. जाहिर है कि जो पार्टी इस नए खेल का मास्टर होगी आगामी सभी चुनावों में उसे ही सफलता मिलने वाली है.

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1-शहजाद पूना वाला और रितुराज झा के बीच बहस में क्या हुआ?

एक टीवी चैनल पर दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर एक चर्चा हो रही थी. इस चर्चा में शहजाद पूनावाला के अलावा किराड़ी से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक ऋतुराज झा भी शामिल थे. ऋतुराज को पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया है. उनकी जगह चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से आए अनिल झा को उम्मीदवार बनाया गया है.चर्चा के दौरान ऋतुराज पूनावाला को ‘चूनावाला’ कहकर कई बार संबोधित करते हैं. जवाब में शहजाद पहले जिस मुद्दे पर बहस हो रही थी उसका जवाब देते हैं कि 'किसी का नाम नहीं बिगाड़ना चाहिए, ऐसी बातें मैं भी कर सकता हूँ. मैं भी कह सकता हूँ कि संजय झा ‘झा1’ और ऋतुराज झा ‘झा2’. मैं भी बोल सकता हूँ कि Jha2 हो आप. पर मैं ऐसी बातें नहीं करता.'

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स्पष्ट है कि शहजाद पूनावाला ने मैथिल ब्राह्मणों या झा सरनेम वाले समाज को लक्षित कर कोई टिप्पणी नहीं की. उन्होंने ऋतुराज झा के ‘चूनावाला’ के जवाब में ‘झा2’ से उत्तर दिया. आज की राजनीति के हिसाब से ये बीजेपी की कमजोरी है कि पूनावाला को चूनावाला कहने को मुद्दा नहीं बना सकी. पर आम आदमी पार्टी ने झा2 को मुद्दा बना दिया.

2-देखिए किस तरह स्ट्रैटेजिकली मामले को तूल दिया गया 

आम आदमी पार्टी लगातार पूर्वाचल के वोटों को बीजेपी की ओर जाने से परेशान थी. इसके पहले नई दिल्ली सीट पर वोट बनाने के मुद्दे पर भी अरविंद केजरीवाल पूरबिया समाज के निशाने पर थे. संजय सिंह ने बहुत जोर शोर से मुद्दा उठाया था कि जानबूझकर पूरबिया समाज का वोट कैंसिल किया जा रहा है.पर यह मामला मुद्दा नहीं बन पाया. पर रितुराज को झा2 बोलने के मुद्दे को आम आदमी पार्टी ने बेहद कुशलता से मुद्दा बना दिया. पार्टी ने अपने ट्वीटर हैंडल से इस मुद्दे पर बीजेपी को लगातार घेरती रही और पूरबिया समाज के लोगों की भावनाओं को उभारती रही . इसके लिए अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह आदि नेताओं ने भी बार-बार ट्वीट किए. विपक्ष के अन्य साथियों जैसे अखिलेश यादव जैसे लोगों से भी मैथिल ब्राह्मण समाज के अपमान के लिए शहजाद पूनावाला से माफी की मांग की गई.

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 पार्टी इस घटना को मुद्दा बनाने में कैसे सफल हुई इससे समझ सकते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नेता मनोज तिवारी अपनी ही पार्टी के प्रवक्ता से माफ मांगने की डिमांड करने लगे. यही नहीं बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडी यू ने भी शहजाद पूनावाला के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की है.

3-सभी पार्टियां क्लिप-कटवा राजनीति का सहारा ले रही

चिंता की बात ये है कि सभी राजनीतिक दल इस क्लिप-कटवा राजनीति का शिकार हो रहे हैं और दूसरे को शिकार बना भी रहे हैं. पर जनता के लिए मुश्किल यह है कि सभी पार्टियां उनकी भावनाओं से खेल रही हैं. संभवतया इसकी शुरूआत बीजेपी ने ही की थी. 2017 में गुजरात में चुनावी रैलियां कर रहे राहुल गांधी का एक वीडियो सामने आया था. इस वीडियो में राहुल गांधी कहते दिखते हैं कि ऐसी मशीन लगाउंगा, इस साइड से आलू घुसेगा उस साइड से सोना निकलेगा. इतना पैसा बनेगा कि आपको पता नहीं होगा कि क्या करना है पैसे का.

दरअसल राहुल गांधी ने आलू के किसानों से कहा कि ऐसी मशीन लगाउंगा कि इस साइड से आलू घुसेगा उस साइड से सोना निकलेगा. इस साइड से आलू डालो, उस साइड से सोना निकालो. इतना पैसा बनेगा कि आपको पता नहीं होगा कि क्या करना है पैसे का. ये मेरे शब्द नहीं है, नरेंद्र मोदी जी के शब्द हैं.

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कांग्रेस ने इसका बदला लिया संसद में अमित शाह के संसद में दिए बयान के कुछ हिस्से का क्लिप बनाकर आंबेडकर विरोधी साबित करने में. इसी तरह बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान इंडियन स्टेट से लड़ाई वाली बात की क्लिप बनाकर फायदा लेने की कोशिश की गई. बीजेपी ने इसी तरह अरविंद केजरीवाल के उस बयान का फायदा उठाया जिसमें वो नई दिल्ली सीट पर यूपी बिहार के लोगों का नाम ले लिया था. कांग्रेस ने मोहन भागवत के आजादी वाले बयान का इसी तरह दुरुपयोग किया गया. अब आम आदमी पार्टी ने यही क्लिप कटवा राजनीति के जरिए बीजेपी को घेर लिया है.

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