'कोई माई का लाल नहीं छीन सकता आरक्षण...', उमा भारती का बड़ा बयान

Uma Bharti on Reservation: भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित राजा हिरदेशाह लोधी के शौर्य सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है.

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भोपाल शौर्य सम्मेलन में गरजीं उमा भारती.(Photo:Screengrab) भोपाल शौर्य सम्मेलन में गरजीं उमा भारती.(Photo:Screengrab)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

MP News: राजधानी भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित राजा हिरदेशाह लोधी के शौर्य सम्मेलन में प्रदेश की राजनीति के दो बड़े रंग देखने को मिले. जहां एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण को लेकर अब तक का सबसे सख्त बयान दिया, वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19वीं सदी के महान योद्धा राजा हिरदेशाह लोधी की वीरता को इतिहास के पन्नों से निकालकर स्कूली किताबों तक पहुंचाने का निर्णय लिया.

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उमा भारती ने सामाजिक समानता पर जोर देते हुए आरक्षण विरोधियों को दो टूक जवाब दिया. उन्होंने कहा, "जब तक प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के परिवार के लोग गरीब के बच्चों के साथ एक ही स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई 'माई का लाल' नहीं छीन सकता."

उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय समाज लंबे समय से जातिगत और आर्थिक असमानता में बंटा रहा है, जिसे कम करने के लिए आरक्षण एक अनिवार्य प्रयास है. 

'नर्मदा टाइगर' की वीरता अब पढ़ेंगे बच्चे
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि पर उनके संघर्ष को याद करते हुए कई बड़ी घोषणाएं कीं. कहा कि 19वीं सदी के शासक राजा हिरदेशाह लोधी के जीवन और वीरता को मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.  लोधी एक योद्धा-राजा थे, जिन्होंने 1842 के बुंदेलखंड विद्रोह में ब्रिटिश शासन के खिलाफ बुंदेला, लोधी और गोंड नेताओं को एकजुट किया था.

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CM ने कहा, "मध्य प्रदेश अब न केवल राजा हिरदेशाह लोधी के बारे में जानेगा, बल्कि उनके जीवन सफर को भी देखेगा. उनके जीवन और वीरता को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा और सरकार उनके नाम पर एक तीर्थ स्थल भी बनाएगी."

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "'नर्मदा टाइगर' के नाम से मशहूर राजा हिरदेशाह लोधी ने 1842 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया था. उन्होंने 1858 तक अपने भाइयों के साथ अपना संघर्ष जारी रखा."

लोधी का जीवन हर किसी के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने बुंदेलखंड के बुंदेला और आदिवासी समुदायों को एकजुट किया और अंग्रेजों के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके संघर्ष पर एक शोध कार्य करवाएगी.

उन्होंने कहा कि उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को दस्तावेज़ित किया जाएगा और पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.; उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज के महापुरुषों के संघर्षों को याद रखना जरूरी है.

राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सभी त्योहारों को बड़े उत्साह के साथ मना रही है. राजा हिरदेशाह की याद में नर्मदा नदी के तट पर हीरापुर में एक तीर्थ स्थल बनाया जाएगा. इतिहास के गौरवशाली पन्नों को फिर से खोला जाना चाहिए.

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि राजा हिरदेशाह की युद्ध शैली छत्रपति शिवाजी महाराज की शैली जैसी ही थी और उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र में स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया.

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पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी.

संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा ने स्वतंत्रता का बिगुल फूंका और इस उद्देश्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. 

लोधी-लोधा समाज के प्रदेश अध्यक्ष, विधायक जलम सिंह पटेल ने कहा, "राजा हिरदेशाह ने ब्रिटिश शासन के कानूनों का विरोध करते हुए 1842 की क्रांति का नेतृत्व किया. इस संघर्ष में उनके लगभग 12 भाइयों ने अपने प्राणों की आहुति दी."

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