मध्यप्रदेश के श्योपुर में एक मेले के समापन कार्यक्रम के दौरान दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री ने मेले की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर महिला थाना प्रभारी (TI) को खरी-खोटी सुनाई तो पलटवार में उन्हें करारा जवाब मिला. मंत्री और लेडी टीआई के बीच हुई तकरार का मामला राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है.
दरअसल श्योपुर जिले के कराहल क्षेत्र के पनवाड़ा गांव में स्थित प्राचीन अन्नपूर्णा माता मंदिर पर प्रतिवर्ष लगने वाले मेले का समापन कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री और भाजपा के पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी ने मंच पर मौजूद कराहल थाने की महिला टीआई यास्मीन खान को खरी-खोटी सुनाई. फिर टीआई ने भी माइक अपने हाथ में लेते हुए नेता जी को हाथों-हाथ जवाब दे दिया.
राज्य मंत्री सीताराम आदिवासी पनवाड़ा माता मेले में अव्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जता रहे थे. मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि मेले में सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कमी रही. कई श्रद्धालुओं को असुविधा हुई.
'फालतू नाटक नहीं करें'
उन्होंने टीआई की ओर इशारा करते हुए कहा, ''फालतू नाटक नहीं करें. ऐसे टीआई कई चले गए. जातिवाद कर रहे हैं आप. जब से ये टीआई साहब आए हैं, तब से घटनाएं हो रही हैं. कई घटनाएं हो गई हैं.''
टीआई का 'ऑन-स्पॉट' पलटवार
इस पर टीआई यास्मीन खान ने भी मंच से ही कहा, ''मुझे लगता है कि यहां बैठे एक या दो लोगों को छोड़ दें तो हमसे किसी को कोई शिकायत नहीं रही होगी. अगर किसी को शिकायत है तो अपना हाथ ऊपर कर दें.''
यास्मीन खान ने आगे कहा, ''हमारे स्टाफ ने सुबह से शाम तक, धूप में, भूखे रहकर ड्यूटी की है. लेकिन अपने पर्सनल हित के लिए, पर्सनल दुश्मनी के लिए पूरे स्टाफ और पूरे पुलिस प्रशासन को दोषी कहना कहीं से भी उचित नहीं है.''
'मंत्री के कान न भरें'
महिला पुलिस अधिकारी ने कहा, ''अगर आप पर्सनल हित के लिए सीताराम आदिवासी के कान भरते हैं, तो ये चीज ठीक नहीं है.''
टीआई ने जो कहा, उसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया. अब लोग कह रहे हैं कि महिला पुलिस अधिकारी ने भरे मंच से नेता जी की फजीहत कर दी.
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खास बात यह है कि अपनी ही पार्टी में सम्मान को तरस रहे राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त सीताराम आदिवासी को भी ऐसी उम्मीद नहीं रही होगी. वे कई बार अपनी ही पार्टी में उपेक्षा और अधिकारियों की अनदेखी की शिकायत कर चुके हैं.
खेमराज दुबे