मौत के बाद भी संघर्ष... MP में देहांत, पड़ोसी राज्य राजस्थान में शव का अंतिम संस्कार करने की मजबूरी

ऊबड़ खाबड़ रास्ते को पार करते हुए ग्रामीण जैसे-तैसे राजस्थान के बरखेड़ा गुगल गांव पहुंचे, तब कहीं जाकर मृतक का अंतिम संस्कार हो पाया. सुनने में तो बात थोड़ी अटपटी-सी लगेगी लेकिन जमीनी हकीकत विकास के दावों से कोसों दूर है. 

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अंतिम संस्कार के लिए शव को पड़ोसी राज्य में ले जाते लोग. अंतिम संस्कार के लिए शव को पड़ोसी राज्य में ले जाते लोग.

aajtak.in

  • गुना ,
  • 08 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 10:56 AM IST

मध्य प्रदेश के गुना जिले की बमोरी विधानसभा क्षेत्र के भोंटूपुरा गांव के निवासी मूलचंद प्रजापति का 85 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया. लेकिन जब अंतिम संस्कार की बात आई तो मृतक के शव को सीमा पार पड़ोसी राज्य राजस्थान ले जाया गया. ऊबड़ खाबड़ रास्ते को पार करते हुए ग्रामीण जैसे-तैसे राजस्थान के बरखेड़ा गुगल गांव पहुंचे, तब कहीं जाकर मृतक का अंतिम संस्कार हो पाया. सुनने में तो बात थोड़ी अटपटी-सी लगेगी लेकिन जमीनी हकीकत विकास के दावों से कोसों दूर है. 

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बमोरी क्षेत्र के भोंटूपुरा गांव में अंतिम संस्कार के लिए कोई भी मुक्तिधाम नहीं है.  ग्रामीणों को अंतिम संस्कार करने के लिए गांव से लगभग डेढ़ किमी दूर दूसरे गांव में जाना पड़ता है. बारिश के मौसम में गांव के बीच से गुजरने वाले नाले में पानी भर जाता है जिसे पार करना मुश्किल होता है.

वहीं, दूसरा विकल्प है- राजस्थान का बरखेड़ा गुगल गांव. जो महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है. रास्ता भले ही ऊबड़ खाबड़-सा है लेकिन ग्रामीणों को अंतिम यात्रा के लिए सुलभ है. इसलिए ग्रामीण मध्यप्रदेश की सीमा पर करते हुए राजस्थान में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं. अंतिम यात्रा का वीडियो भी देखने को मिला है जिसमें ऊबड़ खाबड़ रास्ते से मृतक की शवयात्रा निकाली जा रही है. 

मुक्तिधाम के मामले में रोजगार सहायक दिनेश पटेलिया बताते हैं, भोंटूपुरा गांव में मुक्तिधाम निर्माण के लिए सरकारी जमीन नहीं है. कोई भी अपनी निजी जमीन देने को तैयार नहीं है, इसलिए भोंटूपुरा के लोगों को राजस्थान में जाकर अंतिम संस्कार करना ज्यादा आसान लगता है. बारिश के मौसम को छोड़ दें तो आवाजाही में कोई दिक्कत नहीं आती.

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इस मामले में जनपद पंचायत सीईओ पुष्पेंद्र व्यास बताते हैं कि गांव में कोई भी सरकारी भूमि नहीं है. वनभूमि तो है लेकिन उसके ऊपर निर्माण की परमीशन नहीं मिलती. गांव के दूसरी तरफ मुक्तिधाम बना हुआ है. हम प्रयास करेंगे की जनहित में गांव के अंदर मुक्तिधाम बन पाए.
 
बमोरी क्षेत्र में ज्यादातर मुक्तिधाम जीर्ण शीर्ण अवस्था में हैं, कई ऐसे हैं जो दबंगों के कब्जे में हैं. भोंटूपरा गांव के मामले में तो एक अंतिम संस्कार के लिए राज्य से दूसरे राज्य में दाखिल होना पड़ता है. 

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