झूमती बारिश में उधर टिटिहरी इधर हम...

झूमती बारिश में टिटिहरी ने प्लास्टिक के दो बड़े गोल पाइपों से सटी बगल की छोटी-सी खोहनुमा जगह में उसने अंडे दे रखे थे.

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बारिश में बैठी टिटिहरी बारिश में बैठी टिटिहरी

स्वाति गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2016,
  • अपडेटेड 6:21 PM IST

लहरा लेकर, टूटती झूमती बारिश में वह बुद्ध सी ध्यानमग्न बैठी थी. नोएडा के फिल्म सिटी में दफ्तर की दूसरी मंजिल की छत का मैदान. प्लास्टिक के दो बड़े गोल पाइपों से सटी बगल की छोटी-सी खोहनुमा जगह में उसने अंडे दे रखे थे.

1-2 या तीन...पता नहीं. उसकी लंबी स्थिर चोंच से टप-टप-टप पानी चू रहा था. बीच-बीच में वह सर को कुछ इस अदा में झटक देती जैसे राग मेघ की किसी बंदिश पर दाद दे रही हो या दूर छाए में बैठे कबूतर के घूरने पर ऐतराज कर रही हो. लेकिन यह क्या? वह उठकर चल पड़ी और एक्झॉस्ट के पंखों के पीछे छाए में आकर बैठ गई है.

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अंडों का क्या होगा?...अरे...वहां तो दूसरी बैठी है. दरअसल, इशारों में ही बात हो चुकी थी. अब तक छाए में बैठा नर छत पर दूसरी ओर से घूमकर अंडों के पास पहुंचा, ठहरा, पूरे शरीर में जैसे हवा-सी भरी, खासकर निचले हिस्से को फुलाया और अंडों पर जाकर बैठ गया. मादा थोड़ी देर छाए में बैठी रही और थोड़ी देर बाद बूंदें टूटने पर टिह-टिह करती नाले के किनारे के पीपलों, जंगली बबूलों और दूसरे पेड़ों की ओर उड़ गई.

दफ्तर की दूसरी मंजिल पर शीशे के इधर हम, हमारे कंप्यूटर, दर्जनों टीवी और उन पर दौड़ती खबरें, चर्चाएं. शीशे के उस ओर फैली छत, उस पर टिटिहरी का यह जोड़ा और 2-3 फुटकर कबूतर. टिटिहरी अमूमन जमीन पर ही अंडे देती है. अंडों के ही रंग की बालू या मिट्टी पर, खुले आसमान के तले. सांप, कुत्तों वगैरह से निबटना तो इनका शगल है: टी टि हुट्...टि टि टी हुट...टिह टिह टिह टी हुट्...पंचम सुर की गहरी आवाज में नर-मादा समंवित अंदाज में एक के बाद एक ऐसे झपटते हैं कि कोई भी प्राणी वहां से भाग लेने में ही भलाई समझता है. पर वाले आदमियों का वे कुछ नहीं कर सकतीं. घोंसला ये बनातीं नहीं. उसके नाम पर एक तिनका तक नहीं लातीं.

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फिर यह दूसरी मंजिल की छत पर अंडे देने का मतलब! जी मतलब गहरा है. और हिंदुस्तान के किसानों को इसका अर्थ पता है. नीले आसमान के तले, एकांत में रहने वाला यह परिंदा अच्छे-बुरे मानसून की खबर देता है. इसके नीचे अंडे देते ही किसान मायूस हो जाते हैं. दूसरी मंजिल की छत पर आकर अंडे देने का आशय यह है कि इस बार भारी बारिश होने वाली है और नीचे अंडे देना सुरक्षित नहीं.

मौसम विभाग की भविष्यवाणियां सुने-देखे बगैर टिटिहरी ने हमारे लिए यह खबर रिलीज कर दी थी. काश! इस परिंदों को भी कभी खबरों का स्रोत बनाया जाता. कभी इनके लिए भी लिखा जाता कि फलां परिंदे की हरकतों के हवाले से पता चलता है...’ और का सौंदर्यबोध! ये घंटों एक मुद्रा में बैठी रह सकती हैं. दौड़ती हैं तो जैसे पोलवाल्ट की धाविकाएं, टांगों की गहरी लय. और हां, टांगों पर झुकें तो कुछ यूं कि जैसे सेरेना विलियम्स प्रतिद्वंद्वी की सर्विस रिसीव करने के लिए दोनों टांगों पर सामने झुककर झूल रही हों. यह सब जान लेने के बाद जरा उनका मजाक उड़ाइए तो जानें.

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