Weight Loss Injection Dangerous Trend: आजकल सोशल मीडिया और सेलिब्रिटीज को देखकर हर कोई एकदम दुबला-पतला दिखना चाहता है लेकिन सिर्फ पतला होना हेल्दी होने की निशानी नहीं है. चेहरा पिचक जाना, गर्दन की हड्डियां उभरने लगना, कपड़े लगातार ढीले होते जाना अक्सर लोगों को इस बात के लिए मोटिवेट करता है कि उनका वेट लॉस हो रहा है. वेट लॉस इंजेक्शन का क्रेज लोगों पर इस तरह हावी हो रहा है कि वो अब हेल्दी कम और खतरनाक ज्यादा बनता जा रहा है. सिर्फ 1–2 साल में इंडिया में GLP-1 वेट लॉस ड्रग्स (जैसे ओजेम्पिक, वेगोवी, मौनजारो आदि) जो पहले डायबिटीज के लिए आए थे लेकिन अब मोटापा और कॉस्मेटिक वेट लॉस के लिए इनकी डिमांड का मार्केट कई गुना बढ़ गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत का GLP-1 एगोनिस्ट मार्केट करीब 1000 करोड़ रुपये के आसपास आंका गया और 2030 तक इसके 4–5 गुना से ज्यादा बढ़ने का अनुमान है. 2025 में वेट लॉस मार्केट की सेल 571 करोड़ से बढ़कर करीब 1230 करोड़ रुपये पहुंच गई है.
ये इंजेक्शन सिर्फ डायबिटीज मरीज नहीं, बल्कि स्लिम फिगर और इंस्टा बॉडी की चाहत रखने वाले लोग भी ले रहे हैं. लेकिन तेजी से घटता वजन, मसल लॉस, पिचका हुआ चेहरा और ऑर्गन डैमेज जैसे साइड इफेक्ट्स की वजह से विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि ये ट्रेंड अगर कंट्रोल न हुआ, तो अगले कुछ साल में वेट लॉस क्राइसिस नई हेल्थ इमरजेंसी बन सकता है.
ये ट्रेंड इतना अधिक क्यों बढ़ रहा है, क्यों लोग इस कदर वजन घटा रहे हैं और इसके शरीर पर क्या गंभीर परिणाम हो सकते हैं? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए, Aajtak.in ने डॉक्टर, डायटीशियन और सेलेब्रिटी कोच से बात की. आइए जानते हैं उनका क्या कहना है.
इंदौर के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की डायटीशियन सुचिता श्रीवास्तव ने Aajtak.in को बताया, 'गाल पिचकना या फेस का चिपकना आमतौर पर 2 कारणों से होता है. पहला, बहुत तेजी से वेट लॉस और दूसरा पोषक तत्वों की कमी. जब शरीर तेजी से वजन कम करता है तो सिर्फ फैट नहीं उसके साथ मसल्स और चेहरे का सबक्यूटेनियस फैट (स्किन के नीचे का फैट) भी कम हो जाता है. इससे चेहरा ढीला और अंदर धंसा हुआ दिखने लगता है. वहीं अगर डाइट में प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी है तो स्किन की क्वालिटी गिरती है और चेहरा जल्दी बूढ़ा दिखने लगता है.'
जो लोग इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं यदि वे लोग सही डाइट नहीं लेते हैं तो साइड इफेक्ट्स बढ़ जाते हैं. लोग सोचते हैं कि दवा के साथ कम खाएंगे तो जल्दी वजन घटेगा लेकिन ऐसा करने से बॉडी स्टार्वेशन मोड (भुखमरी की स्थिति) में चली जाती है जो खतरनाक होता है. वेट लॉस के दौरान प्रोटीन कम लेने से मसल लॉस होता है, जिससे शरीर ढीला और कमजोर दिखता है.
हेल्दी फैट्स (नट्स, सीड्स) स्किन और हार्मोन के लिए जरूरी होते हैं इसलिए इनका सेवन भी जरूरी होता है. पानी कम पीना और इलेक्ट्रोलाइट्स की अनदेखी करने से स्किन ड्राई और डल हो जाती है. विटामिन और मिनरल्स का ध्यान न रखने से पोषक तत्वों की कमी हो सकती है.
सुचिता श्रीवास्तव ने चेतावनी दी कि जब वजन बहुत जल्दी घटता है, तो शरीर में कई जरूरी न्यूट्रिएंट्स की कमी हो सकती है. प्रोटीन की कमी से मसल्स लॉस होता है, कमजोरी आती है और फेस का पिचक जाता है. आयरन की कमी से थकान, बाल झड़ना, पेल (पीली) स्किन हो जाती है. विटामिन B12 की कमी से कमजोरी, चक्कर जैसी समस्याएं दिखने लगती हैं.
वहीं विटामिन D और कैल्शियम की कमी से हड्डियों में दर्द और कमजोरी, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की कमी से स्किन ड्राई हो जाती है. इन सभी की कमी से शरीर कमजोर होने के साथ-साथ चेहरा भी बेजान और ढीला दिखने लगता है.
मुंबई के फोर्टिस हीरानंदानी हॉस्पिटल के लैप्रोस्कोपिक और बैरिएट्रिक सर्जरी कंसल्टेंट डॉ. शरद शर्मा ने Aajtak.in को बताया, 'जब लोग GLP-1 दवाएं लेकर तेजी से वेट लॉस करते हैं तो फैट के साथ-साथ उनके मसल्स भी कम होते हैं जिससे शरीर ढीला हो सकता है और गाल धंस सकते हैं. इन दवाओं पर हुई स्टडीज बताती हैं कि कुल वजन का लगभग 20-40 प्रतिशत हिस्सा लीन मसल्स मास का होता है.'
'दवाएं खुद इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि, यह तेजी से कैलोरी कम करने और भूख में कमी के कारण होता है जो शरीर को एनर्जी देने के लिए मसल्स को तोड़ देती है. वेट लॉस दवाओं से मसल्स लॉस सामान्य है लेकिन पर्याप्त प्रोटीन सेवन और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ इसे रोका जा सकता है.
डॉ. शरद शर्मा ने टिर्जेपेटाइड का उदाहरण देते हुए बताया, 'आम तौर पर 72 हफ्तों यानी करीब 1 से डेढ़ साल में व्यक्ति अपने शुरुआती वजन का 15% से 22% तक घटा सकता है, जैसे अगर किसी का वजन 100 किलो है तो वह 15 से 22 किलो तक कम हो सकता है. इसका असर शुरू के 3 महीनों में दिखना शुरू हो जाता है. 9 से 12 महीने के बीच सबसे ज्यादा वजन घटता है और करीब 18 महीने बाद वजन घटने की रफ्तार धीमी होकर रुक जाती है.'
'अगर इस दौरान डाइट और एक्सरसाइज का सही रूटीन फॉलो न किया जाए और दवा रेगुलर और पूरी डोज में न ली जाए तो बेहतर रिजल्ट मिलते हैं लेकिन दवा बीच में छोड़ दी जाए या सही तरीके से न ली जाए तो वजन कम होने का असर भी कम हो जाता है.
डॉ. शरद ने बताया, 'तेजी से वजन घटाना शरीर में स्ट्रेस पैदा करता है. तेजी से वजन घटाने से पित्त की पथरी, मसल लॉस, पोषक तत्वों की कमी, डिहाइड्रेशन और मेटाबॉलिज्म स्लो होना जैसी कई संभावनाएं बढ़ जाती हैं. लेकिन यदि धीरे-धीरे डॉक्टर के सुपरविजन में वजन घटा रहे हैं तो ये डायबिटीज और वेट लॉस में अच्छी तरह से मदद कर सकता है.
सेलेब्रिटी फिटनेस कोच प्रसाद नंदकुमार शिर्के ने भी तेजी से वजन घटाने के इस ट्रेंड पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, 'डेफिनिटली ये जो ट्रेंड आ गया है ना वो खतरनाक है. क्योंकि आपका फैट लॉस हो ही रहा है उसके साथ में भूख कंट्रोल की वजह से आपका मसल लॉस भी हो रहा है और इम्यूनिटी वीक हो रही है.'
'उसी के साथ अगर लॉन्ग टर्म आप ये मेडिसिन्स यूज करते हो तो आपको सीरियस साइड इफेक्ट्स भी देखने मिलेंगे. जैसे की पैंक्रियाज में सूजन आना, गॉल ब्लैडर की समस्या, किडनी की समस्या, हाइपोग्लाइसीमिया और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं आदि. इसलिए आपको डॉक्टर की सलाह लेकर ही अपने वेट लॉस गोल को अचीव करना चाहिए. यदि आप हद से ज्यादा वजन कम कर लेंगे तो आपकी बॉडी को अंदर से कापी नुकसान होगा.
डॉ. शरद शर्मा और डायटीशियन सुचिता दोनों का मानना है कि वजन घटाने की एक सुरक्षित और हेल्दी स्पीड होनी चाहिए. डायटीशियन सुचिता श्रीवास्तव के अनुसार, 'हेल्दी वेट लॉस की स्पीड होती है 0.5 से 1 किलो प्रति सप्ताह. इससे ज्यादा तेजी से वजन घटाना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. धीरे-धीरे वजन घटाने से फैट लॉस होता है, मसल्स प्रिजर्व रहते हैं और चेहरा भी नेचुरल रहता है.'
डॉ. शर्मा ने बताया, 'अधिक वजन या टाइप 2 डायबिटीज वाले अधिकांश वयस्कों के लिए पहले 3-6 महीनों में कुल शरीर के वजन का 5-10 प्रतिशत कम करना होना चाहिए. ADA (अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन) के अनुसार, 3-7 प्रतिशत वजन कम करने से ब्लड शुगर में सुधार होगा और दवाओं की आवश्यकता कम होगी. 7-10 प्रतिशत वजन कम करने से A1C, ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर का जोखिम कम होता है.
मृदुल राजपूत