बिना पंडित-बिना फेरों के दोबारा होगी विजय-रश्मिका की 'योद्धा शादी', जानें क्या है ये 'कोडवा वेडिंग'

रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने 26 फरवरी यानी आज उदयपुर में तेलुगु रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की है. आद शाम को दोनों कोडवा शादी (Kodava wedding) भी करेंगे. ये क्या होती है, इस बारे में जानेंगे.

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रश्मिका और विजय की आज शाम योद्धा शादी / कोडवा शादी होगी. (Photo: ITG) रश्मिका और विजय की आज शाम योद्धा शादी / कोडवा शादी होगी. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:41 PM IST

Rashmika Mandanna Vijay Deverakonda Wedding: रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने गुरुवार को उदयपुर स्थित आईटीसी मोमेंटोस में पारंपरिक तेलुगु रीति-रिवाजों के अनुसार शादी कर ली है. गीता गोविंदम और डियर कॉमरेड फिल्मों में साथ काम कर चुके इस कपल ने 7 साल तक एक-दूसरे को डेट किया और अब शादी की है. जानकारी के मुताबिक, 26 फरवरी की सुबह विजय के तेलुगु रीति-रिवाज के साथ एक दूसरे के हुए थे और अब आज शाम को कूर्ग से ताल्लुक रखने वाली कोडवा विरासत की रश्मिका के पारंपरिक रीति-रिवाज से शादी होगी.

यानी कह सकते हैं कि 1 दिन में दोनों की 2 अलग-अलग रीति-रिवाजों से शादी होगी. इस 'कोडवा शादी' की खासियत ये है कि इस शादी में ना ही कोई पंडित होता है और ना ही अग्नि के फेरे लिए जाते हैं. तो आइए जानते हैं, इस शादी में क्या खास होता है?

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कोडवा शादी क्या होती है?

कर्नाटक के कूर्ग (कोडगु) इलाके में एक समुदाय है जिनकी शादियां कोडवा रीति-रिवाज से होती हैं. इस इलाके से आने वाले सभी लोग अपनी सदियों पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करते हैं जो देखने लायक होती हैं. कोडवा शादी हिंदू शादियों की परंपराओं के विपरीत वंश परंपराओं, पूर्वजों के प्रति सम्मान और योद्धा परंपरा दिखाई देती हैं. 
 
जानकारी के मुताबिक, कोडवा मूल रूप से एक योद्धा समुदाय रहा है, इसलिए उनकी शादी की रस्मों में भी वीरता की झलक मिलती है. शादी की शुरुआत 'मुहूर्त' से होती है, जिसमें पूर्वजों को याद किया जाता है.

कोडवा शादी और हिंदू शादी में क्या अंतर है?

कोडवा विवाह और हिंदू शादी के बीच सबसे बड़ा अंतर ये है कि इस शादी में अग्नि का उतना महत्व नहीं होता इसलिए कोडवा शादी में अग्नि के फेरे नहीं लिए जाते. फेरे लेने की बजाय पूर्वजों को याद किया जाता है. 

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एक तरफ जहां हिंदू शादियों में पंडित पूरी विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ शादी कराते हैं, वहीं कोडवा शादी एकमात्र ऐसी हिंदू शादी है जिसमें पंडितों की जरूरत नहीं पड़ती. घर के बूढ़े-बुजुर्ग ही दोनों की शादी और रस्में करवाते हैं.

इस शादी में गानों की जगह पारंपरिक गीतों के साथ ढोल बजाए जाते हैं और शादी में शामिल लोग उस पर योद्धा नृत्य करते हैं. 

कोडवा शादी में दूल्हा एक पारंपरिक काले कोट जैसी पोशाक पहनता है जिसे 'कुप्या' कहते हैं. उसकी कमर पर एक छोटी तलवार (पीचे कत्थी) बांधता है. इस शादी में तलवार से नारियल फोड़ना शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है.

कोडवा शादी में दुल्हन साड़ी के पल्लू को पीछे से लाकर कंधे पर पिन करती है. इसे 'कोडगु स्टाइल' कहा जाता है.

शादी के बाद दुल्हन को पास के कुएं या नदी से पानी भरकर लाना होता है. रास्ते में दूल्हे का परिवार नाचते-गाते हुए उसे हंसी मजाक के साथ रोकते हैं.

दुल्हन का पहनावा

जानकारी के मुताबिक, कोडवा शादी में दुल्हन लाल या सफेद रंग की रेशमी साड़ी पहनती है जिस पर गोल्डन बॉर्डर होता है. साड़ी को आगे की बजाय पीछे की ओर प्लीट्स के साथ लपेटा जाता है जो उनके समुदाय की खासियत होती है. इस शादी में शराब और मांसाहारी भोजन खाना पारंपरा हिस्सा है जो अन्य हिंदू शादियों से इसे अलग बनाता है.

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