बच्चे के जन्म के बाद पहले एक साल तक मां का दूध ही सबसे सही और संपूर्ण आहार होता है. लेकिन जब बच्चा एक साल का हो जाता है और ठोस आहार के साथ बोतल का दूध पीना शुरू करता है तो अक्सर माता-पिता के मन में यह सवाल उठता है कि गाय या भैंस में से कौन सा दूध बच्चे की सेहत के लिए ज्यादा अच्छा और सुरक्षित है.
हाल ही में राजस्थान के एक मंत्री के वायरल दावे ने इस बहस को और हवा दे दी जिसमें उन्होंने गाय के दूध को हाई आईक्यू (तेज बुद्धि) से जोड़ दिया. राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने दावा किया कि देसी गायों का दूध बच्चों की इंटेलिजेंस और एनर्जी बढ़ाता है जबकि भैंस का दूध उन्हें सुस्त और कम बुद्धिमान बनाता है.
शिक्षा मंत्री ने दिया ये बयान
कोटा जिले में गो-संवर्धन और गोचारण (गाय का बचाव और चराई) के कार्यक्रम में बोलते हुए दिलावर ने एक उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि एक गाय के बछड़े और एक भैंस के बछड़े को दूर से अपनी मां को ढूंढने के लिए कहें. गाय का बछड़ा सीधे अपनी मां के पास भाग जाएगा जबकि भैंस का बछड़ा बड़ी मुश्किल से अपनी मां को ढूंढ़ पाएगा. उन्होंने तर्क दिया कि यह अंतर उनके द्वारा पिए जाने वाले दूध के असर को दिखाता है.
राजस्थान के मंत्री का यह बयान वायरल तो हो गया लेकिन क्या इसके पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक आधार भी है जो इस दावे को सही ठहराता है.
गाय के दूध का IQ बढ़ने से कोई कनेक्शन नहीं
न्यूट्रिशन रिसर्चर्स और बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) के अनुसार, इस बात का कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि गाय का दूध भैंस के दूध की तुलना में बच्चे की सोचने-समझने की क्षमता या मानसिक विकास (Cognitive Development) में कोई फायदा देता है
दोनों की तुलनात्मक एनालिसिस से पता चलता है कि भैंस के दूध में आमतौर पर फैट ज्यादा होता है जो 6 से 15 परसेंट तक होता है, जिससे यह ज्यादा कैलोरी वाला बन जाता है.
जब हम गाय और भैंस के दूध की तुलना करते हैं तो सबसे बड़ा अंतर उनके फैट स्ट्रक्चर में नजर आता है. न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, भैंस के दूध में फैट की मात्रा गाय के दूध के मुकाबले अधिक होती है. भैंस के दूध में फैट का स्तर आमतौर पर 6 से 15 पर्सेंट तक होता है जबकि इसके उलट गाय के दूध में यह केवल 3 से 5 पर्सेंट के आसपास रहता है.
गाय या भैंस का दूध?
न्यूट्रिशन रिसर्चर डॉ. सीमा गुलाटी ने इस दौरान कहा कि हालांकि भैंस के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन B12 भी थोड़ा ज्यादा होता है जो नर्व हेल्थ, ब्रेन फंक्शन, रेड ब्लड सेल बनने और DNA सिंथेसिस के लिए जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लेकिन इन अंतरों से बच्चों की इंटेलिजेंस पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है जिसे मापा जा सके.
दिल्ली की नॉन-प्रॉफिट संस्था नेशनल डायबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन के न्यूट्रिशन रिसर्च ग्रुप के हेड डॉ. गुलाटी का कहना है कि गाय का दूध उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है जो अपनी कैलोरी की मात्रा कम रखना चाहते हैं.
मेंटल हेल्थ से कोई कनेक्शन नहीं
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक मेटाबॉलिक (शरीर के वजन और ऊर्जा से जुड़ी) बात है. इसका बच्चे की कॉग्निटिव (सोचने-समझने या दिमागी क्षमता) विकास से कोई संबंध नहीं है. सीधे शब्दों में कहें तो दूध का चुनाव शरीर की फिटनेस के लिए तो मायने रखता है लेकिन बुद्धिमानी बढ़ाने में इसका कोई सीधा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.
दिमाग के विकास के लिए आयोडीन एक जरूरी पोषक तत्व है जिसकी दूध में मौजूदगी मुख्य रूप से जानवर के खानपान पर निर्भर करती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, दूध चाहे गाय का हो या भैंस का, उसमें आयोडीन की मात्रा जानवर की नस्ल से तय नहीं होती बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि उसे चारे में क्या दिया जा रहा है.
क्या गाय का दूध बच्चों के लिए पचाना आसान है?
पहले कुछ बाल रोग विशेषज्ञों का मानना था कि बच्चों के लिए गाय का दूध बेहतर है क्योंकि उन्हें लगता था कि यह हल्का और पचाने में आसान होता है. हालांकि, आधुनिक वैज्ञानिक शोध और बदलते साक्ष्य अब यह साफ करते हैं कि भैंस के दूध के मुकाबले गाय का दूध चुनने से बच्चे के दिमागी विकास को कोई एक्स्ट्रा फायदा नहीं मिलता है. यानी कि गाय के दूध से दिमाग के विकास का कोई लिंक नहीं है.
नई दिल्ली के सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च से जुड़े बच्चों के डॉक्टर और क्लिनिकल रिसर्चर डॉ. एचपीएस सचदेव ने कहा कि अगर कोई दूध लगातार बेहतर इंटेलिजेंस नतीजों से जुड़ा है तो वह मां का दूध है.
ब्रेस्ट मिल्क पर क्या है WHO की गाइडलाइंस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF की सलाह है कि जन्म के 1 घंटे के अंदर से लेकर
पहले 6 महीनों तक बच्चे को सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग कराना चाहिए. इसके बाद 6 महीने की उम्र से ही न्यूट्रिशन से भरपूर और सुरक्षित कॉम्प्लिमेंट्री (ठोस) खाना देना शुरू कर देना चाहिए. साथ ही 2 साल की उम्र या उससे ज्यादा उम्र तक ब्रेस्टफीडिंग जारी रखना चाहिए.
इस बात का सबूत कई रिसर्च में भी देखने को मिलता है. उदाहरण के लिए अमेरिका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट tufts now ने 2023 में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि जीन मेयर USDA ह्यूमन न्यूट्रिशन रिसर्च सेंटर ऑन एजिंग (HNRCA) के साइंटिस्ट्स की एक नई स्टडी से पता चलता है कि ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद एक माइक्रोन्यूट्रिएंट नवजात बच्चों के बढ़ते दिमाग को काफी फायदा पहुंचाता है.
कई और रिसर्च में मिले हैं सबूत
यह खोज न्यूट्रिशन और दिमाग की हेल्थ के बीच के लिंक को और साफ करती है और उन हालात में इस्तेमाल होने वाले इन्फेंट फॉर्मूला को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है जब ब्रेस्टफीडिंग मुमकिन न हो.
उन्होंने कहा कि कई ग्लोबल स्टडीज से पता चलता है कि जिन बच्चों को छह महीने तक सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग कराई जाती है और जो बचपन तक ब्रेस्टफीडिंग जारी रखते हैं, उनमें लंबे समय तक सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है.
डॉ. सचदेव का यह भी कहना है कि इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि गाय का दूध बच्चों को अधिक स्मार्ट बनाता है या भैंस का दूध उनके दिमाग को कमजोर करता है. हालांकि दोनों की न्यूट्रिशनल वैल्यू में थोड़ा अंतर जरूर होता है लेकिन बच्चे की बुद्धिमानी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसके गिलास में किस जानवर का दूध है.
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