Childhood Obesity: आपका भी बच्चा है गोलू-मोलू? डॉ. सरीन नेे इंडियन पेरेंट्स को दी ये नसीहत

खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड की आदत और खराब डाइट की वजह से दुनियाभर में मोटापे की समस्या अपने पैर फैला रही है. ओवरवेट की वजह से बच्चों में डिप्रेशन और बंजइटिंग जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, माता-पिता को बच्चों को 10 साल तक स्वस्थ और फिट रखने पर खास ध्यान देना चाहिए.

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मोटापा कम करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करें.  (PHOTO:ITG) मोटापा कम करने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करें. (PHOTO:ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST

Childhood Obesity Alert: भारत में मोटापा अब एक कुपोषण बन चुका है, जिससे हर उम्र का इंसान पीड़ित है. बच्चों से लेकर बड़े, हर उम्र के लोग मोटापे से जंग लड़ रहे हैं. भारतीयों में मोटापे की वजह खराब लाइफस्टाइल और जंक फूड खाने की आदत की वजह से समय के साथ बढ़ती जा रही है. वजन तेजी से बढ़ता है, मगर उसे कम करने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं, क्योंकि शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट निकालने में काफी मेहनत और लगन की जरूरत होती है. लेकिन सबसे चिंता की बात तो ये है कि अब छोटे-छोटे बच्चे भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं.

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साल 2025 में आई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर 20 में से 1 बच्चा यानी 5 प्रतिशत जिसकी उम्र 5 साल से कम है और 5 में से 1 बच्चा या बड़ा 20 प्रतिशत जिसकी उम्र 5 से 19 साल के बीच है, वो मोटापे का शिकार है. यह रिपोर्ट 190 से ज्यादा देशों के आंकड़ों पर बेस्ड थी. ऐसा पहली बार ही देखने को मिला, जब ओवरवेट ने कम वजन वाले लोगों को पीछा छोड़ा हो.

मोटापे का बचपन पर असर

बढ़ती उम्र के साथ ही छोटे बच्चों में भी मोटापे के मामले काफी ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं और 10 साल से कम उम्र के बच्चे ओवरवेट से जूझ रहे हैं. इसका सीधा असर उनकी लाइफस्टाइल पर पड़ता है, ना तो वो खेल-कूद में हिस्सा ले पाते हैं और न ही वो कोई फिजिकल एक्टिविटी ठीक से कर पाते हैं. 

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लिवर स्पेशलिस्ट और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शिव कुमार सरीन ने एक पॉडकास्ट में बचपन में बच्चों में मोटापे को लेकर खुलकर बात की थी. उस दौरान उन्होंने पैरेंट्स को सलाह दी थी कि बचपन से ही बच्चा मोटा नहीं होना चाहिए. माता-पिता को गोलू-मोलू बच्चा अच्छा लगता है, लेकिन बच्चे को मोटा नहीं होना चाहिए. माता को ध्यान रखना चाहिए कि वो अपने बच्चे को मोटा न होने दें. 10 साल की उम्र तक बच्चे को हेल्दी और फिट रखना बहुत जरूरी होता है. 

मोटापा से होती हैं हड्डियां कमजोर 

डॉ. सरीन ने आगे बताया कि जो लोग ओवरवेट है तो उनकी धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं.  अगर आपका बच्चा ओवरवेट है तो बच्चों में मोटापे से 2-3 गुना ज्यादा हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फैक्चर होने लगता है. हड्डियां हमारे शरीर का बैंक बैलेंस है, आप जितना दौड़ते रहेंगे, उतनी आपकी हड्डियां मजबूत रहेंगी. बोन्स एज सबसे जरूरी है, इस उम्र में हड्डियों को कमजोर न होने दें. इस उम्र में जितना हो सके, हड्डियों को मजबूत बनाएं. 29 साल की उम्र के बाद हड्डियां वैसे भी कमजोर होने लगती हैं, इसलिए उससे पहले बोन्स को स्ट्रॉन्ग बनाने पर खास ध्यान देना चाहिए.

डॉ. सरीन ने बताया कि अगर आपकी हाइट 172 सेटीमीटर है तो आपका वजन 70 किलो से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इसलिए आपकी हाइट के हिसाब से आपका वजन होना सही होता है, अगर उससे ज्यादा होता है तो वो आपकी सेहत पर बुरा असर डालता है. मोटे बच्चों में दो दिक्कतें होंगी, एक डिप्रेशन और दूसरा बंजइटिंग... 

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छोटे बच्चों में बढ़ रहा फैटी लिवर 

भारत सरकार की रिपोर्ट चिल्ड्रन इन इंडिया 2025 के अनुसार, भारत के 5 से 9 साल के बच्चों में से करीबन 33 प्रतिशत यानी एक तिहाई को हाई ट्राइग्लिसराइ़ड्स की समस्या हो सकती है. ट्राइग्लिसराइ़ड्स एक तरह का हमारी बॉडी में फैट होता है, ये खाने में मौजूद फैट से आता है, अगर यह शरीर में ज्यादा जमा हो जाता है तो ब्लड वेसल्स में चिपक जाते हैं जो दिल की धमनियों को ब्लॉक कर सकते हैं, और फैटी लिवर की दिक्कत हो सकती है.

बच्चों को मोटा होने से कैसे बचाएं?

पैरेंट्स को अपने बच्चों का छोटी उम्र में खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में बच्चे का वजन बढ़ना बहुत उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए बच्चों को हेल्दी और फिट रहने के लिए माता-पिता को सही कदम उठाने चाहिए. 

  • प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने वजन और शुगर लेवल का ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चा ओवरवेट पैदा न हो.
  • बच्चों को घर का बना सादा खाना खिलाएं, उनको जंक फूड से बिल्कुल दूर रखें.
  • अगर बच्चा 3 साल की उम्र तक उसे चीनी न दें, तो उसका दिल और लिवर लंबे समय तक हेल्दी रहेगा.
  • अगर आपके बच्चे का वजन 5 साल की उम्र तक बैलेंस रहता है, तो भविष्य में उसे लिवर और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है. 
  • बच्चों के लिए कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी है, नींद की कमी से हंगर हार्मोन  असंतुलित हो जाते हैं, जिससे बच्चा ज्यादा खाने लगता है.
  • बच्चे को मोबाइल-गैजेट कम से कम दें, हो सके तो ना ही दें और उनकी फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दें.
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