हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छा इंसान बने और जीवन में सफल हो. इसी वजह से वे उसके भविष्य को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं. लेकिन कई बार ज्यादा सोच और चिंता के बीच अनजाने में कुछ ऐसी बातें हो जाती हैं, जो बच्चों पर गलत असर डाल सकते हैं. बच्चों की सही परवरिश करना आसान नहीं होता, क्योंकि हर समय यह समझ पाना मुश्किल होता है कि कौन-सी आदत उनके लिए अच्छी है और कौन-सी नुकसानदायक. इसी उलझन में कई बार पैरेंट्स छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं, जो धीरे-धीरे बच्चों के स्वभाव और व्यवहार पर असर डालने लगती हैं.
इसी पैरेंटिंग स्टाइल के टॉपिक को लेकर कुछ दिन पहले बॉलीवुड की गंगूबाई आलिया भट्ट और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु के बीच बातचीत हुई. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यह बातचीत Jain International Trade Organisation के एक प्रोग्राम में हुई थी, जिसका नाम था In Conversation With The Mystic. इस दौरान दोनों ने पैरेंटिंग से जुड़े, फेल होने के डर और सही नींद जैसी कई बातों पर खुलकर चर्चा की.
आलिया भट्ट ने किया अच्छी पैरेंटिंग को लेकर सवाल
आलिया भट्ट ने पैरेंटिंग को लेकर सद्गुरु से कहा कि, 'मैं एक साढ़े तीन साल की बच्ची की मां हूं और वो वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी है. लेकिन सच कहूं तो मैं हर समय थोड़ा परेशान रहती हूं. एक बार मेरे पापा ने मुझसे पूछा कि मां बनकर कैसा लग रहा है, तो मैंने कहा कि ये खुशी और चिंता का मिला-जुला एहसास है. इसी वजह से मैं हर वक्त यही सोचती रहती हूं कि क्या मैं अच्छी मां हूं? क्या मैं अपनी बच्ची से सही बातें कह रही हूं?'
बच्चे पेरेंट्स से ही जीवन जीना सीखते हैं
तब आलिया भट्ट ने पैरेटिंग को लेकर सद्गुरु से सवाल किया कि, 'आप मुझे या किसी भी पैरेंट को क्या सलाह देंगे? क्योंकि बच्चे बहुत मासूम और जिज्ञासु होते हैं और शुरुआती सालों में वो हमसे ही सब कुछ सीखते हैं.' इस पर सद्गुरु ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, 'और अगर पैरेंट ही अच्छा न हो तो?' उनकी ये बात सुनकर आलिया हंस पड़ीं.
जीवन में किसे मार्गदर्शक मानना चाहिए?
आलिया भट्ट की बात सुनकर सद्गुरु ने कहा कि, 'जब आपका बच्चा है तो सबसे पहले यह सोच छोड़ दें कि आपको उसे कुछ सिखाना है.
बात जब राहा पर आई, तो उन्होंने आलिया से पूछा कि, 'आप और आपकी साढ़े तीन साल की बेटी में से ज्यादा खुश कौन रहता है? उसका नाम क्या है?' आलिया ने जवाब दिया, 'राहा.'
फिर उन्होंने पूछा, 'आप दोनों में से ज्यादा खुश कौन रहता है?' इस पर आलिया ने कहा, 'राहा.'
सद्गुरु ने समझाया कि माता-पिता को बच्चों को कुछ सिखाने की बजाय जीवन में एक गाइड या सलाहकार की तरह रहना चाहिए. मजाक में सद्गुरु ने कहा कि, 'आपको आखिर क्या सिखाना है?' बच्चों को उनके तरीके से बढ़ने दें, बस उन्हें ध्यान से देखें और समझें. क्योंकि बच्चा आपसे कहीं ज्यादा जिंदगी के करीब होता है.'
बच्चों ने खुश होना सीखें
सद्गुरु ने आलिया भट्ट से यह भी कहा कि जैसे-जैसे उनकी बेटी बड़ी हो रही है, उसे बस देखें. क्योंकि लोग अक्सर अपनी सोच के हिसाब से ही जिंदगी को देखते हैं और हर छोटी-छोटी बात पर जरूरत से ज्यादा चिंता करने लगते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 3 से 6 साल के बच्चे आमतौर पर बहुत खुश रहते हैं और हर समय हंसते-खिलखिलाते हैं, जबकि बड़े लोग ऐसा कम कर पाते हैं. आगे सद्गुरु कहते हैं कि, 'बचपन में किसी ने मेहनत करके आपको दुखी बनाया था, लेकिन आज आपको खुश करने के लिए किसी को मेहनत करनी पड़ती है.'
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क