Digestion Time Of Roti Puri & Paratha: अक्सर दोपहर या रात के खाने के बाद हमें भारीपन महसूस होता है, जिसकी सबसे बड़ी वजह हमारे द्वारा चुना गया अनाज और उसे पकाने का तरीका है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक सामान्य स्वस्थ इंसान के पेट को अलग-अलग तरह के भोजन को प्रोसेस करने में अलग-अलग समय लगता है. जहां कार्बोहाइड्रेट जल्दी टूटते हैं, वहीं फैट यानी वसा को पचाना शरीर के लिए एक लंबी प्रक्रिया बन जाती है. यही कारण है कि रोटी और पूड़ी के पचने के समय में जमीन-आसमान का फर्क होता है.
सादी रोटी या फुलका फाइबर से भरपूर होता है और इसमें फैट न के बराबर होता है.
हेल्थलाइन के मुताबिक, साबुत गेहूं से बनी बिना तेल की रोटी को पचाने में पेट को लगभग 2 से 3 घंटे का समय लगता है. इसमें फैट नहीं होता इसलिए शरीर के पाचक एंजाइम्स इसे तेजी से ग्लूकोज में बदल देते हैं जिससे आपको तुरंत एनर्जी मिलती है.
जब रोटी में तेल या घी लगकर वह पराठा बन जाती है, या उसे डीप फ्राई कर पूड़ी बना दिया जाता है तो डाइजेशन की स्पीड धीमी हो जाती है और वे पचने में रोटी की अपेक्षा अधिक समय लेती हैं.
मेडिकल न्यूज टुडे के मुताबिक, फैट वाली चीजों को गैस्ट्रिक एम्पटिंग (पेट खाली होने की प्रक्रिया) में काफी समय लगता है. एक तेल वाले पराठे को पूड़ी तरह पचने में 3 से 4 घंटे लग सकते हैं जबकि डीप फ्राई की गई पूड़ी को पचाने में पेट को 5 से 6 घंटे तक का समय लग सकता है.
WebMD का कहना है कि पूड़ी और पराठे में फैट काफी अधिक होता है और हाई फैट वाली चीजें डाइजेशन के दौरान ब्लड फ्लो की ओर बढ़ जाती हैं जिससे मस्तिष्क को मिलने वाली एनर्जी का लेवल थोड़ी देर के लिए कम होने लगता है और सुस्ती या नींद महसूस होने लगती है.
वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि जब हम पूड़ी या पराठा जैसा भारी भोजन करते हैं तो शरीर की अधिकांश ऊर्जा उसे पचाने में लग जाती है. यही वजह है कि भारी नाश्ते के बाद काम पर ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क