Pahadi Gahat Dal: पहाड़ी फेमस 'गहत की दाल' है सेहत के लिए वरदान, सुबह खाली पेट इसका पानी पीना भी फायदेमंद

उत्तराखंड की मशहूर गहत की दाल खाने में टेस्टी होने के साथ हेल्थ के लिए भी बहुत गुणकारी मानी जाती है. पहाड़ों की इस दाल को लोग औषधि की तरह इस्तेमाल करते हैं. इस दाल को किडनी स्टोन और डायबिटीज के मरीजों के लिए खासतौर पर वरदान माना जाता है. आइए इस दाल की खासियत और इसके इस्तेमाल के तरीकों के बारे में जानते हैं.

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लाल चावल के खीर और गहत दाल पहाड़ों की शान है.  (PHOTO:ITG) लाल चावल के खीर और गहत दाल पहाड़ों की शान है. (PHOTO:ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

Pahadi Gahat Dal:  भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ती खानपान की आदतें और बढ़ता स्ट्रेस आज कई बीमारियों को जन्म दे रहा है. किडनी और डायबिटीज जैसी समस्याएं अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. किडनी स्टोन और डायबिटीज के मरीज खासतौर पर दवाइयों के साथ-साथ देशी और प्राकृतिक चीजों को भी अपनाकर देख रहे हैं. वैसे तो भारतीय रसोई में मौजूद कई देसी चीजें ऐसी हैं, जिनका जिक्र आयुर्वेद और सदियों से होता आया है. इन्हीं में से एक है उत्तराखंड की मशहूर गहत दाल, जिसे कुल्थी दाल के नाम से भी जाना जाता है.

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पहाड़ी लोग इस दाल को सिर्फ खाने की तरह नहीं बल्कि औषधि की तरह इस्तेमाल करते हैं. खासतौर पर खाली पेट गहत दाल का पानी पीना किडनी स्टोन और ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले उसके फायदे, सही तरीका और नुकसान के बारे में जानना सही होता है.

गहत दाल का पानी क्यों है खास?

पोषक तत्वों से भरपूर गहत दाल में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. आयुर्वेद में इसे मूत्रवर्धक माना गया है, यानी यह शरीर से अतिरिक्त पानी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद कर सकती है.

जब आप गहत दाल का पानी पीते हैं तो यह पेशाब की मात्रा बढ़ाता है, जिससे किडनी में जमे छोटे स्टोन धीरे-धीरे बाहर निकलने लगते है. पहाड़ी इलाकों में पथरी की शुरुआती समस्या में इसे पारंपरिक तौर पर दिया जाता है. हालांकि बड़े स्टोन या तेज दर्द की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूरी है.  

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गहत दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम माना जाता है, इसमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद करता है. इसलिए नियमित और सीमित मात्रा में इसका पानी पीने से शुगर लेवल को बैलैंस रखने में मदद मिलती है. लेकिन इस पीने के साथ दवाइयों को भी समय पर लेना जरूरी है.

गहत दाल से डाइजेशन और वेट लॉस में फायदे

गहत दाल का पानी कब्ज, गैस समेत पेट से जुड़ी समस्याओं से भी छुटकारा दिलाने में काम आ सकता है, इसके पानी से मेटाबॉल्जिम भी एक्टिव होता है. इस पानी को पीने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिस वजह आप ओवरइंटिग से बच जाते हैं. इस तरह गहत दाल की मदद से आपको वेट लॉस ेमें भी मदद मिल सकती है.

गहत दाल का पानी कैसे बनाएं?

  • 2 से 3 चम्मच गहत दाल को अच्छी तरह धोने के बाद रातभर एक गिलास पानी में भिगो दें.
  • सुबह उसी पानी सहित दाल को 10 से 15 मिनट तक उबालें, जब पानी हल्का गाढ़ा और भूरा हो जाए, तो उसे छान लें.
  • गुनगुना रहने पर खाली पेट गहत दाल के पानी को धीरे-धीरे पिएं.

कब और कितनी मात्रा में पिएं?

  1. सुबह खाली पेट 150 से 200 मिलीलीटर काफी है. 15 से 20 दिन तक सेवन करें, फिर एक हफ्ते का ब्रेक लें.
  2. डायबिटीज या किडनी स्टोन के मरीज डॉक्टर की सलाह के साथ ही नियमित पिएं.

गहत दाल का पानी पीते समय बरतें ये सावधानियां

  1. गहत दाल की तासीर गर्म मानी जाती है, इसलिए इसे ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर में गर्मी, एसिडिटी और मुंह में छाले हो सकते हैं.
  2. प्रेग्नेंट महिलाओं और ज्यादा यूरिक एसिड वाले मरीजों को गहत दाल का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.
  3. किसी भी तरह की एलर्जी या अजीब-सा महसूस हो तो गहत दाल का सेवन तुरंत बंद करें.

Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.

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