रश्मिका-विजय के माथे का ‘बसिकम’ बना वेडिंग लुक की जान, जानें दक्षिण भारतीय शादियों में इसे पहनने के पीछे क्या है कारण?

रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी रचाई. उनके वेडिंग लुक में सबसे ज्यादा चर्चा माथे पर बंधे 'बासिकम' की हो रही है. यह पवित्र बैंड न केवल दूल्हा-दुल्हन की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि उन्हें बुरी नजर से बचाकर सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का आशीर्वाद भी देता है.

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बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगाया जाता है. (PHOTO:ITG) बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगाया जाता है. (PHOTO:ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST

साउथ के मशहूर कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं. कपल ने 26 फरवरी को पारंपरिक तेलुगु रीति-रिवाजों और कोडवा परंपरा के अनुसार शादी रचाई. रश्मिका और विजय ने अपने वेडिंग लुक्स से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया, जैसे ही कपल ने शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की, वैसे ही हर तरह उनके लुक्स के चर्चे होने लगे.

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साउथ इंडियन वेडिंग्स अपनी सादगी, परंपराओं और खास रीति-रिवाजों के लिए जानी जाती हैं. रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा दुल्हा-दुल्हन के रूप में जैसे ही नजर आएं,हर तरफ लोग उनकी तारीफ करने लगे. रश्मिका-विजय के वेडिंग लुक में सबसे ज्यादा चर्चा उनके माथे पर सजे 'बासिकम' (या बासिंगा) की हो रही है, जो दूल्हा और दुल्हन दोनों के लुक में चार चांद लगा रहा है.

क्या होता है बासिकम?

दक्षिण भारतीय शादियों में दुल्हा-दुल्हन के माथे पर अक्सर ही आपने पीले धागे में एक सोने का पेंडल जैसा बंधा देखा होगा, उसे ही बासिकम कहा जाता है. बासिकम एक खास तरह का माथे पर बांधा जाने वाला बैंड जैसा होता है, जिसे हल्दी, कुमकुम, फूलों या मोतियों से सजाया जाता है. यह आमतौर पर कपड़े या धागे से बना होता है और शादी की रस्मों के दौरान दूल्हा-दुल्हन के माथे पर बांधा जाता है. दक्षिण में खासतौर पर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की शादियों में यह परंपरा अधिक देखने को मिलती है.

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रश्मिका-विजय की शादी

क्यों पहनते हैं बासिकम?

सिर्फ दुल्हा-दूल्हन के लुक की खूबसूरती बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि बासिकम उनके लिए सुरक्षाकवच की तरह काम करता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बासिकम बुरी नजर से बचाने का प्रतीक है. शादी जैसे शुभ मौके पर माना जाता है कि दूल्हा-दुल्हन को बुरी नजर से दूर रखना जरूरी होता है, इसलिए उनके माथे पर बंधा यह पवित्र धागा उन्हें सुरक्षा और आशीर्वाद देता है. 

क्या है इसका धार्मिक महत्व?

हिंदू परंपरा में माथे को ‘आज्ञा चक्र’ का स्थान माना जाता है, जो बुद्धि और चेतना से जुड़ा होता है. इस चक्र को पॉजिटिव एनर्जी से जोड़ने के लिए बासिकम बांधा जाता है. यह दूल्हा-दुल्हन की नई जिंदगी की अच्छी शुरुआत और समृद्धि की कामना का संकेत भी देता है.

बासिकम को मिला मॉर्डन टच

बदलते समय के साथ पारंपरिक बासिकम को भी मॉडर्न टच दिया जा रहा है. डिजाइनर इसे गोल्डन मोतियों, कुंदन और ताजे फूलों से सजाकर और भी अट्रैक्टिव बना रहे हैं. 

दक्षिण भारतीय शादियों में बासिकम का खास महत्व होता है और इसलिए साउथ इंडियन स्टार्स तक अपनी शादी में इसे जरूर पहनते हैं. क्योंकि बासिकम  सिर्फ एक गहना नहीं बल्कि संस्कृति, आस्था और खुशहाली का प्रतीक है. साउथ इंडियन शादी में इसकी मौजूदगी दूल्हा-दुल्हन के रिश्ते को पवित्रता और पॉजिटिव एनर्जी का संकेत देती है.

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