सुप्रीम कोर्ट ने मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में बंगाल सरकार को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने NIA (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) जांच पर रोक लगाने की मांग वाली पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका खारिज कर दी है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने बैलेंस्ड नजरिया अपनाया है.
सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें हाईकोर्ट के 26 फरवरी के आदेश को चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा की जांच NIA से करवाने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी के अपने पहले के आदेश का भी जिक्र किया. उस आदेश में अदालत ने NIA को निर्देश दिया था कि वह हाईकोर्ट के सामने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करे.
इस रिपोर्ट में एजेंसी को यह बताना था कि मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा की जांच में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी UAPA की धारा क्यों लगाई गई. केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस मामले की जांच NIA को सौंपी थी.
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NIA ने जांच के दौरान UAPA की धारा 15(1)(a) लागू की है. यह धारा आतंकवादी मामलों से संबंधित है और तब लागू होती है जब किसी कार्रवाई से देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा पैदा करने का इरादा हो.
सुनवाई के दौरान NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने एजेंसी के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि हिंसा में घातक हथियारों का इस्तेमाल हुआ था और बेलडांगा क्षेत्र बांग्लादेश सीमा के पास स्थित है, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए UAPA लगाया गया.
इससे पहले 20 जनवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने मुर्शिदाबाद जिले में बार-बार हो रही हिंसा और अशांति पर चिंता जताई थी और प्रशासन को शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए थे.जनवरी में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में हुई घटनाओं के बाद कई जगह विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम भी हुए थे.
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