पश्चिम बंगाल में मतदान संपन्न हो चुके हैं. बयानों का शोर थम चुका है. सूबे की चुनावी फाइट खतम होने के बाद बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के कैंप में जाने, टीएमसी कार्यकर्ताओं की ओर से दी गई कोल्डड्रिंक पीने का वीडियो भी सामने आया था. बंगाल में चुनावी फाइट के बाद माहौल में सौहार्द घुल चुका है, लेकिन एक लड़ाई दिल्ली में जारी है.
सनातनी संसद की ओर से चुनाव बाद हिंसा की आशंका और उससे निपटने के एहतियाती उपाय करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. चुनाव आयोग ने भी सुरक्षाबलों की करीब सात सौ कंपनियां चुनाव नतीजे आने के बाद भी अगले आदेश तक बंगाल में ही तैनात रखने को कहा है.
इस याचिका में 2021 के चुनाव नतीजे आने के बाद हिंसा का भी हवाला दिया गया है. हिंसा का आलम ये था कि मानवाधिकार आयोग तक को जांच कराकर रिपोर्ट तलब करनी पड़ी थी. चुनाव आयोग ने कहा है कि नागरिकों की सुरक्षा और कानून का राज बरकरार रखना राज्य का दायित्व है. ऐसे में इस तरह की अराजकता सभ्य समाज में किसी भी तरह से स्वीकार नहीं की जा सकती.
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पश्चिम बंगाल में 2021 के चुनाव नतीजे आने के पहले और बाद यानी 2 मई से 20 जून के बीच 29 हत्याएं, 12 रेप और यौन उत्पीड़न, गंभीर हमले और घायल करने की 391 घटनाएं दर्ज की गईं. तोड़फोड़ की हजार के करीब घटनाएं हुईं, जिनमें से 954 रिपोर्ट हुईं. सनातनी संसद की ओर से दायर याचिका में यह अपील की गई है कि राज्य में कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की अगुआई में बनाई जाए.
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यह मांग की गई है कि इस निगरानी समिति को यह अधिकार दिया जाए कि ये हर जिले में एसआईटी बना सकती है. राज्य सरकार को ऐसी किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पर्याप्त एहतियाती इंतजाम करने के लिए भी निर्देश दिए जाएं. राज्य सरकार चुनाव बाद हिंसा के मामलों की शीघ्र सुनवाई और निपटारे के लिए हरेक जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करे, जो समयबद्ध तौर पर निर्णय करें.
संजय शर्मा