'नाम बताओ एक्शन हम लेंगे', 32 किताब, दो किरदार और केंद्र की सॉरी पर CJI की दो टूक

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का चैप्टर शामिल किए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि किसने किया, नाम बताओ. हम कार्रवाई करेंगे.

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सीजेआई ने एनसीईआरटी की किताब में चैप्टर को बताया न्यायपालिका पर गोलीबारी सीजेआई ने एनसीईआरटी की किताब में चैप्टर को बताया न्यायपालिका पर गोलीबारी

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की किताब में 'न्यायपालिका में करप्शन' के बारे में अध्याय रखे जाने पर सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने एनसीईआरटी की ओर से माफी मांगे जाने की बात कही. इस पर सीजेआई ने दो टूक कहा कि नाम बताओ, एक्शन हम लेंगे.

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कहा है कि हम इस मामले को बंद नहीं करेंगे. सीजेआई ने कहा कि इस मामले में न्यायिक दखल की सख्त जरूरत है. यह आलोचना को दबाने की इच्छा से नहीं, बल्कि शिक्षा की ईमानदारी बनाए रखने के लिए है. जब छात्र सार्वजनिक जीवन और संस्थागत ढांचे की बारीकियों को समझना शुरू करते हैं, तो इस उम्र में उन्हें एकतरफा बातों के सामने लाना गलत है.

सीजेआई ने कहा कि इससे बुनियादी गलतफहमियां पैदा होती हैं और इस तरह वे उस जिम्मेदारी को समझने से बचते हैं, जिसके लिए न्यायपालिका काम करती है. चीफ जस्टिस ने कहा कि कारण बताओ नोटिस की बजाय क्यों न कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए? सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल माफी स्वीकार करने से इनकार करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि माफी स्वीकार की जाए या नहीं , ये हम आगे चलकर तय करेंगे. अभी नहीं कह सकते हैं कि माफी की गुहार सही है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी को यह निर्देश दिया है कि केन्द्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करें कि किताब की सभी कॉपी, हार्ड कॉपी या सॉफ्ट कॉपी, चाहे वे रिटेल दुकानों या स्कूलों में रखी हों, पब्लिक एक्सेस से हटा दी जाएं.

कोर्ट ने सभी फिजिकल और डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत इसकी कॉपी हटाने के निर्देश दिए और कहा कि आदेश का अनुपालन कर दो हफ्ते में रिपोर्ट फाइल करें. कोर्ट ने कहा कि एनसीईआरटी के डायरेक्टर की यह जिम्मेदारी होगी कि वे ऐसे स्कूलों के कैंपस में भेजी गई सभी किताबों को तुरंत ज़ब्त करें. सीजेआई ने कहा कि किताब के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर भी पूरी तरह बैन रहेगा. इस मामले में अगली सुनवाई अब 11 मार्च को होगी.

इससे पहले, सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि एनसीईआरटी के इस कदम ने न्यायपालिका पर गोलीबारी की है. न्यायपालिका रक्त रंजित ही गई है. पब्लिक डोमेन में डालने के बाद बाजार से किताबें वापस उठाने का क्या मतलब है? केंद्र सरकार और एनसीईआरटी का बचाव करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह बच्चों को न्याय समय पर न मिलने से न्याय से वंचित रहने वाली बात समझाने की कोशिश थी.

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सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जिन दो व्यक्तियों ने इस अध्याय को तैयार किया है, वे फिर कभी इस मंत्रालय से जुड़े नहीं होंगे. यहां तक कि कोई अन्य मंत्री भी होगा, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि नाम बताओ, कार्रवाई हम करेंगे. उन्होंने साफ कहा कि पहले तो बकवास चीजें छापी और अब वापस लेने की बात कर रहे हैं. जब सब कुछ ऑनलाइन-ऑफलाइन जनता के सामने आ चुका है.

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चीफ जस्टिस ने कहा कि शिक्षा सचिव की ओर से भेजा गया पत्र पढ़ा है. जब हम पर हमले बढ़ रहे हैं, तो हम जानते हैं कि जिम्मेदारी कैसे लेनी है. आप कहते हैं कि प्रकाशन वापस ले लिया गया है, लेकिन यह बाजार में है. सोशल मीडिया में है. मुझे किताब की एक प्रति भी मिल गई है. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि आठवीं की ये कुल 32 पुस्तकें हैं. कुछ को वापस ले लिया गया है.

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तुषार मेहता ने कहा कि एनसीईआरटी ने बिना शर्त माफी मांग ली है. जो अध्याय था, उसे किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है. स्वतः संज्ञान केस में, हम बिना शर्त माफी मांगते हैं. सीजेआई ने कहा कि मीडिया में हमारे दोस्तों ने यह नोटिस भेजा है. इसमें माफी का एक शब्द भी नहीं है. सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि यह सब जानबूझकर किया गया है.

सीजेआई ने जताई नाराजगी

सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पता लगाना हमारी इंस्टीट्यूशनल ड्यूटी है कि यह किताब में पब्लिश हुआ था या नहीं, रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए कम्युनिकेशन में अथॉरिटी बचाव कर रही थी. यह एक गहरी साजिश थी. तुषार मेहता ने बताया कि एक बार फिर गंभीरता से पूरी किताब को देखा जाएगा. कपिल सिब्बल ने कहा कि पॉलिटिशियन और लीडर्स का क्या? यह किताब पीडीएफ फॉर्मेट में है.

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वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन सर्कुलेशन हार्ड कॉपी से कहीं ज़्यादा है. सीजेआई ने कहा कि हम और गहरी जांच चाहते हैं. हमें पता लगाना है कि कौन जिम्मेदार है और हम देखेंगे कि कौन-कौन हैं. उसकी सजा मिलनी चाहिए. हम केस बंद नहीं करेंगे. तुषार मेहता ने कहा कि हम इंस्टीट्यूशन के साथ खड़े हैं. कोई भी बचकर नहीं निकलेगा.
 

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