कर्नाटक में राहुल गांधी के स्वागत पर सियासी घमासान, जर्मन चांसलर की अनदेखी का आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी मैसूर के रास्ते ऊटी जा रहे थे. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने व्यक्तिगत रूप से एयरपोर्ट पहुंचकर उनकी अगवानी की. इसको लेकर कर्नाटक में विपक्ष के नेता (LoP) ने तीखा हमला बोला है.

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राहुल गांधी के कर्नाटक में स्वागत को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं (Photo- Social Media) राहुल गांधी के कर्नाटक में स्वागत को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं (Photo- Social Media)

नागार्जुन

  • बेंगलुरु,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:44 PM IST

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर 'प्राथमिकताओं' को लेकर संग्राम छिड़ गया है. राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा मैसूर एयरपोर्ट पर लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का स्वागत करने को लेकर भाजपा ने तीखा हमला बोला है. विवाद की मुख्य वजह उसी समय बेंगलुरु में मौजूद जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की आधिकारिक यात्रा है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी मैसूर के रास्ते ऊटी जा रहे थे. उनके आगमन पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार ने व्यक्तिगत रूप से मैसूर एयरपोर्ट पहुंचकर उनकी अगवानी की. दूसरी ओर, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक कार्यक्रम के सिलसिले में बेंगलुरु पहुंचे हुए थे.

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इस घटनाक्रम पर कर्नाटक में विपक्ष के नेता (LoP) ने तीखा हमला बोला है. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस दिन जर्मनी के संघीय चांसलर कर्नाटक पहुंचे, उसी दिन मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का मैसूर में राहुल गांधी के स्वागत के लिए मौजूद रहना गलत प्राथमिकताओं को दर्शाता है.

भाजपा नेता आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जर्मन चांसलर का कर्नाटक दौरा राज्य के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम था. उनके अनुसार, ऐसे अवसर पर मुख्यमंत्री को खुद बेंगलुरु में मौजूद रहकर इस यात्रा को निवेश, उद्योग, रोजगार और दीर्घकालिक विकास के लिहाज से भुनाना चाहिए था.

उन्होंने इसे न केवल खराब राजनीतिक संदेश, बल्कि कर्नाटक की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया. उन्होंने कहा कि राज्य को ऐसी नेतृत्व शैली की जरूरत है, जो पार्टी से पहले कर्नाटक के हितों, सत्ता राजनीति से पहले विकास और राजनीतिक खुशामद से पहले वैश्विक अवसरों को प्राथमिकता दे.

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वहीं, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. 

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