कर्नाटक में कांग्रेस की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है. सीएम सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच चल सियासी कलह रुकने का नाम नहीं ले रही है. इस बीच सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक सचिव नजीर अहमद को हटा दिया है. मुख्यमंत्री ने यह फैसला उपचुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधि करने के चलते लिया है.
कांग्रेस में चल रही खींचतान के बीच पार्टी के नया सिरदर्द नजीर अहम बन गए थे. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बाद अपने राजनीतिक सचिव नज़ीर अहमद को हटाने का आदेश दिया है.
मुख्यमंत्री ने यह फ़ैसला इंटेलिजेंस इनपुट और कांग्रेस समिति को सौंपी गई रिपोर्टों के बाद लिया गया है, जिनमें उपचुनाव के दौरान पार्टी के हितों के ख़िलाफ़ जाने वाली गतिविधियों में नज़ीर अहमद की कथित संलिप्तता का संकेत मिला था. इस तरह से सीएम ने सख्त फैसला लेने के संदेश दिया है.
कर्नाटक सीएम के करीबी पर गिरी गाज
बता दें कि कर्नाटक कांग्रेस में अल्पसंख्यक नेतृत्व के एकीकरण को लेकर पार्टी में तनाव बढ़ गया है. पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी नेताओं की पार्टी विरोधी गतिविधियों से नाराज है. हाल ही में अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया था. अब मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव नजीर अहमद को पद छोड़ने के लिए कहा गया है. शनिवार को सिद्धामैया और हाईकमान के बीच देर रात तक कई दौर की बातचीत हुई.
कांग्रेस हाईकमान नजीर से सख्त नाराज था
कांग्रेस हाईकमान ने निर्देश दिया था कि दावणगेरे दक्षिण में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी और पूर्व जद(एस) नेता जमीर अहमद खान भी इस जांच के घेरे में आ गए थे, जिसके बाद अब मुख्यमंत्री ने सख्त फैसला लिया है.
कांग्रेस हाईकमान ने दावणगेरे दक्षिण में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे. दो दिन पहले नजीर अहमद को पद छोड़ने को कहा गया था और जमीर अहमद खान को कैबिनेट से हटाने पर विचार किया जा रहा है.
इंटेलिजेंस विंग और AICC सचिव अभिषेक दत्त की दो अलग-अलग रिपोर्टों में जब्बार, नजीर अहमद और जमीर को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया गया. उनपर आरोप हैं कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों का समर्थन किया. इसके साथ ही उनके कंपेन के लिए फंडिंग की और चुनाव में भी मदद की.
कर्नाटक कांग्रेस के लिए बना सिरदर्द
कर्नाटक कांग्रेस के लिए एक नया सिरदर्द पैदा हो गया है. कांग्रेस के कई विधायकों राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की मांग को लेकर दिल्ली दरबार में दस्तक दे रहे हैं तो दूसरी तरह सिद्धारमैया अपने करीबी नेताओं के चलते घिरते जा रहे हैं. कांग्रेस हाईकमान नाराज है, खासकर उपचुनाव में सीएम के राजनीतिक सचिव नजीर अहमद के द्वारा पार्टी विरोधी गतिविधियां करने के चलते.
कर्नाटक कांग्रेस के करीब दर्जन भर विधायक पार्टी आलाकमान से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं. कर्नाटक में लंबे समय से अटके मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंचे हैं. इन विधायकों में कई मंत्री पद के दावेदार हैं. कर्नाटक के कांग्रेस विधायक सोमवार शाम को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से उनके आवास पर मुलाकात की.
सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार
कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल करना चाहते हैं लेकिन डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के वीटो के कारण कांग्रेस आलाकमान ने इसकी हरी झंडी नहीं दे रही. डीके शिवकुमार खुद सीएम बनना चाहते हैं जिसके लिए सिद्धारामैया तैयार नहीं हैं. इस तरह दोनों गुट की तरफ से इसको लेकर बीते एक साल से एक दूसरे के ऊपर प्रेशर पॉलिटिक्स बनाने का कवायद हो रही.
माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस आलाकमान कर्नाटक को लेकर कोई फैसला ले सकता है. ऐसे में कांग्रेस विधायक सक्रिय हैं. इनका कहना है कि वो सीएम बदलने या नहीं बदलने की मांग नहीं कर रहे बल्कि यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें कैबिनेट विस्तार हो और उन्हें मौका मिले. पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए ये विधायक अभी कुछ दिन दिल्ली में रुकेंगे. कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं.
सगाय राज