कर्नाटक कांग्रेस में एक नई मुसीबत खड़ी होती दिख रही है. आरोप है कि 9 अप्रैल को दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव में पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं ने कथित तौर पर एक विरोधी उम्मीदवार का समर्थन किया.
राज्य मंत्री ज़मीर अहमद खान और MLC नसीर अहमद और जब्बार पर आरोप है कि उन्होंने SDPI उम्मीदवार अफ़सर कोडलीपेटा के चुनाव प्रचार के लिए कथित तौर पर पैसे देकर गुपचुप तरीके से उसका समर्थन किया.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक यूनिट के कई नेताओं ने इस मामले को कांग्रेस आलाकमान के सामने उठाया है. सूत्रों का कहना है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मंत्री और दोनों MLCs के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है.
क्या है विवाद?
कांग्रेस पार्टी ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. यह विवाद 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के लिए टिकट बंटवारे के दौरान शुरू हुआ था. यह उपचुनाव मौजूदा विधायक और कांग्रेस के सीनियर नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण ज़रूरी हो गया था. वोटों की गिनती 4 मई को होगी.
खबरों के मुताबिक, इन तीनों नेताओं ने एक मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देने की ज़ोरदार वकालत की थी, क्योंकि इस विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक आबादी काफी ज़्यादा है. लेकिन, पार्टी नेतृत्व ने राज्य मंत्री SS मल्लिकार्जुन के बेटे समर्थ मल्लिकार्जुन को अपना आधिकारिक उम्मीदवार चुना.
पार्टी सूत्रों का दावा है कि नाराज़ तीनों नेताओं ने पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ काम करना शुरू कर दिया. आरोप है कि उन्होंने SDPI उम्मीदवार के चुनाव प्रचार में मदद के लिए कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये दिए.
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अगर आलाकमान खान और दोनों विधायकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है, तो कर्नाटक में कांग्रेस को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है.
यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके डिप्टी DK शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ती दरार के बीच सामने आया है. विधानसभा चुनाव में अब दो साल से भी कम समय बचा है, ऐसे में यह नया संकट कांग्रेस के लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की कोशिशों को और मुश्किल बना सकता है.
नागार्जुन