कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर आने की इजाजत, भगवा शॉल पर रोक

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 2022 की विवादित हिजाब पॉलिसी को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है. नई अधिसूचना के तहत छात्र-छात्राओं को निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हिजाब, जनेऊ, रुद्राक्ष और अन्य पारंपरिक प्रतीक पहनने की अनुमति दी गई है. हालांकि भगवा शॉल पर रोक जारी रहेगी.

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कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने वाले 2022 के आदेश को वापस लिया. (File Photo: PTI) कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने वाले 2022 के आदेश को वापस लिया. (File Photo: PTI)

नागार्जुन

  • बेंगलुरु,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:53 PM IST

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने बुधवार को शिक्षण संस्थानों में लागू 'हिजाब पॉलिसी' को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने 5 फरवरी, 2022 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब को लेकर देशभर में राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया था.

पिछली भाजपा सरकार ने हिजाब विवाद के बाद 5 फरवरी, 2022 को शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड लागू किया था. नई अधिसूचना के मुताबिक अब छात्र-छात्राओं को निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म के साथ सीमित सामुदायिक, पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई है. नई अधिसूचना के मुताबिक, कर्नाटक के सभी सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, निजी शिक्षण संस्थानों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में यूनिफॉर्म व्यवस्था पहले की तरह लागू रहेगी.

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हालांकि अब छात्र निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ सीमित सामुदायिक, पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर सकेंगे. कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया कि ये प्रतीक यूनिफॉर्म के मूल उद्देश्य को प्रभावित नहीं करेंगे. सरकार ने जिन प्रतीकों की अनुमति दी है उनमें- हिजाब (हेडस्कार्फ), जनेऊ, शिवधारा, रुद्राक्ष और शरवस्त्र शामिल हैं. इसके अलावा अन्य पारंपरिक और सामुदायिक प्रतीकों को भी अनुमति दी गई है, बशर्ते वे अनुशासन, सुरक्षा या छात्रों की पहचान में बाधा न बनें.

भगवा शॉल की अनुमति नहीं होगी

सिद्धारमैया सरकार ने अधिसूचना में साफ किया है कि शिक्षण संस्थानों में भगवा शॉल की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि उसे धार्मिक प्रतीक की श्रेणी में नहीं माना गया है, जबकि जनेऊ को अनुमति दी गई है. आदेश में कहा गया है कि केवल पारंपरिक या धार्मिक प्रतीक पहनने के आधार पर किसी छात्र को स्कूल, कक्षा, परीक्षा हॉल या शैक्षणिक गतिविधियों में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा. सरकार ने यह भी कहा कि किसी छात्र को ऐसे प्रतीक पहनने या न पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. हालांकि परीक्षाओं के दौरान राष्ट्रीय और राज्य स्तर के ड्रेस कोड नियम लागू किए जा सकते हैं.

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नई नीति के क्रियान्वयन में धर्म या समुदाय के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव न हो, इसके लिए सरकार ने सभी स्कूलों और कॉलेजों को धर्मनिरपेक्ष, समान और निष्पक्ष तरीके से नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं. स्कूल डेवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग कमेटी (SDMC), कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी (CDC) और शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पहनावे को लेकर किसी छात्र के साथ भेदभाव या अपमानजनक व्यवहार न हो. साथ ही कहा गया है कि संस्थानों में अनुशासन बनाए रखा जाए, लेकिन किसी भी छात्र को शिक्षा से वंचित न किया जाए.

पुराने सर्कुलर, निर्देश, प्रस्ताव अमान्य

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नए आदेश के बाद पुराने सभी सर्कुलर, निर्देशों, प्रस्तावों या संस्थागत नियमों को अमान्य माना जाएगा. राज्य के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के आयुक्त और प्री-यूनिवर्सिटी शिक्षा विभाग के निदेशक को सभी संस्थानों में इसे लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं. बता दें कि 2022 में हिजाब विवाद के बाद स्कूल और कॉलेज प्रशासन को यूनिफॉर्म लागू करने का अधिकार दिया गया था. इसके बाद कई सरकारी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर आने वाली मुस्लिम छात्राओं को कक्षाओं में प्रवेश से रोका गया था. इसके विरोध में कई हिंदू छात्रों ने भगवा शॉल ओढ़कर आना शुरू कर दिया था, जिससे राज्यभर में विवाद बढ़ गया था.

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