कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा कैबिनेट में 'नई पीढ़ी' को आगे लाने की वकालत को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि यह बयान केवल पीढ़ीगत बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी मंत्रिमंडल फेरबदल और नेतृत्व संतुलन से भी जुड़ा है. हालांकि, शिवकुमार ने पार्टी में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए जरूरत पड़ने पर खुद के राजनीतिक करियर को भी विराम देने की बात कही है.
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राजनीति में नई पीढ़ी के उभार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि अब बदलाव का समय आ गया है. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि पुराने नेताओं का अनिश्चित काल तक बने रहना संभव नहीं है और पार्टी के भविष्य के लिए नई पीढ़ी का आगे आना आवश्यक है. बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने पहली बार के विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह देने की मांग का समर्थन किया.
बता दें कि कर्नाटक में पहली बार चुने गए कांग्रेस विधायकों ने प्रस्तावित मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान प्रतिनिधित्व की मांग करते हुए राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राज्य नेतृत्व को पत्र लिखा है. इस बारे में जब पत्रकारों ने उपमुख्यमंत्री शिवकुमार से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पत्र की जानकारी केवल अखबारों के माध्यम से मिली है, लेकिन हर किसी की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं होती हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
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सब मंत्री बनना चाहते हैं, इसमें गलत क्या
डीके शिवकुमार ने कहा, 'हर कोई मंत्री बनना चाहता है, इसमें गलत क्या है? पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब लोग बिना विधायक बने मंत्री बने. यहां तक कि नरेंद्र मोदी भी पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब वे विधायक नहीं थे. इसलिए आकांक्षा होना स्वाभाविक है.' उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब केवल पुराने चेहरों तक सीमित रहने का दौर खत्म होना चाहिए. शिवकुमार ने कहा, 'कब तक वही लोग रहेंगे? मुझे 36 साल हो चुके हैं, अब नई पीढ़ी आनी चाहिए, नए विचार आने चाहिए. हमें युवाओं को तैयार करना चाहिए, उन्हें मार्गदर्शन देना चाहिए.'
डीके शिवकुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुद को एक मार्गदर्शक (मेंटॉर) की भूमिका में देखना चाहते हैं, जो नई पीढ़ी को प्रेरित करे और आगे बढ़ने में मदद करे. उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी में नेतृत्व और जिम्मेदारियों का फैसला अंततः पार्टी हाईकमान ही करेगा. राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, 'पार्टी को नए लोगों और नई सोच की जरूरत है. मैं नए लोगों का समर्थन करता हूं. पुराने नेता हमेशा के लिए नहीं रह सकते.'
फर्स्ट टाइम MLAs को मंत्री बनाने की मांग
कांग्रेस हाई कमांड, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित राज्य नेतृत्व को संबोधित एक संयुक्त पत्र में, कांग्रेस विधायकों ने आग्रह किया कि कम से कम 5 नवनिर्वाचित विधायकों को मंत्री बनाया जाए. विधायकों ने अपने पत्र में कहा, 'जैसा कि आप जानते हैं, कर्नाटक की जनता ने पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से विधानसभा के लिए 38 सदस्यों को चुना है और इस तरह एक स्पष्ट संदेश दिया है कि वे विधायिका में नए युवा चेहरों को देखना चाहते हैं.'
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डीके शिवकुमार ने दलित मुख्यमंत्री के मुद्दे पर अपने मंत्रिमंडल सहयोगी एचसी महादेवप्पा की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राज्य में किसी भी नेतृत्व परिवर्तन के बारे में कोई जानकारी नहीं है. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने कहा, 'मैंने महादेवप्पा का बयान देखा. वह हमारे हाई कमान हैं और उनके पास कुछ जानकारी हो सकती है. मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.'
केएन राजन्ना का डीके शिवकुमार पर तंज
कर्नाटक के वरिष्ठ विधायक केएन राजन्ना ने दलित मुख्यमंत्री के सवाल पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि दलित समुदाय से कोई मुख्यमंत्री बनता है तो सभी सहमत होंगे. डीके शिवकुमार भी सहमत होंगे. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. राजन्ना ने स्पष्ट किया कि पहले जी. परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनना चाहिए, उसके बाद डीके शिवकुमार की बारी आएगी. महादेवप्पा के बयान पर डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया को लेकर पूछे गए सवाल पर राजन्ना ने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते.
विभाग के काम से दिल्ली जाऊंगा: DKS
जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी आलाकमान ने उन्हें और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया है? तो शिवकुमार ने स्पष्ट किया, 'मुझे कोई फोन नहीं आया है. मुझे अपने विभाग से संबंधित कुछ काम के लिए दिल्ली जाना है.' इस आलोचना के जवाब में कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने मंत्रियों के बयानों पर चुप्पी साध रखी है, शिवकुमार ने कहा, 'मंत्रियों और विधायकों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है. मैं तो बस पार्टी को यह बात बताने का काम कर रहा हूं.'
नागार्जुन