ईरान जंग अब लेबनान पर पूरी तरफ शिफ्ट हो गई है. ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर होने के बाद अब इजरायल लेबनान पर अटैक कर रहा है. क्या आप जानते हैं कि लेबनान पर हो रहे अटैक के बीच अब भारत के वो सैनिक भी चर्चा में आ गए हैं, जो लेबनान में तैनात हैं. आप सोच रहे होंगे कि आखिर लेबनान में भारत के सैनिक क्या कर रहे हैं. तो आपको बताते हैं कि भारत के सैनिकों की तैनाती लेबनान में क्यों हैं और वो वहां रहे भारतीय सैनिकों की संख्या कितनी है.
क्यों तैनात हैं भारतीय सैनिक?
दरअसल, लेबनान में आर्मी बेस आदि की वजह से तैनात नहीं है जबकि दूसरी फोर्स के हिस्से के रुप में वहां भारतीय सैनिक हैं. दरअसल, लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) तैनात हैं, जो इजरायल-लेबनान सीमा पर शांति सुनिश्चित करने का काम करती है. अब भारतीय सैनिक भी इस फोर्स के हिस्से के रुप में लेबनान में काम कर रहे हैं. बता दें कि अभी करीब 642 भारतीय सैनिक वहां सक्रिय हैं.
ये साल 1978 में इजरायल के लेबनान आक्रमण के बाद स्थापित की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेनाओं की वापसी सुनिश्चित करना, अंतरराष्ट्रीय शांति बहाल करना और लेबनानी सरकार को प्रभावी नियंत्रण दिलाना है. उस वक्त से भारतीय सैनिक यूनिफिल मिशन में हिस्सा लेते हैं और वहां तैनात रहते हैं. इसमें अलग-अलग देशों के सैनिक तैनात हैं, जिसमें भारत भी शामिल है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां कुछ-कुछ वक्त के लिए भारतीय सैनिकों की लेबनान में तैनाती की जाती है.
वहां क्या करते हैं?
लेबनान में भारतीय सैनिकों का काम वहां किसी से जंग करना या किसी की सुरक्षा करना नहीं है. यूनिफिल में तैनात सभी सैनिक इजरायल-लेबनान 'ब्लू लाइन' सीमा पर गश्त करते हैं, संघर्ष रोकते हैं, मेडिकल कैंप लगाते हैं, पशु चिकित्सा सहायता देते हैं और स्थानीय ढांचे की मरम्मत करते हैं.
यूनिफिल के बारे में जानते हैं...
यूनिफिल की स्थापना 19 मार्च 1978 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 425 और 426 से हुई, जब इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर आक्रमण किया. लेकिन, 2006 के बाद इसे और भी मजबूत किया गया. बताया जाता है कि इसमें 47 देशों के 7,505 सैनिक हैं, जिसमें भारत का दूसरा नंबर है.
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