भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना करने बाबर, दो महान सैन्य कमांडर चंगेज खान और तैमूर के वंशज थे. उन्होंने 16वीं शताब्दी में भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की. इसके बाद मुगलों ने 19वीं शताब्दी तक दक्षिण एशिया के बड़े हिस्से पर शासन किया.
हिस्ट्रीएक्स्ट्रा के मुताबिक, प्रोफेसर मार्गरेट मैकमिलन कहती हैं कि वह वास्तव में एक बहुत ही दिलचस्प व्यक्ति थे और मुझे लगता है कि आज भी हैं और उनके बारे में सबसे दिलचस्प बात यह है कि वे डायरी लिखते थे. मुझे पिछली कुछ शताब्दियों से पहले का कोई ऐसा शक्तिशाली शासक, सम्राट या राजा याद नहीं आता जिसने अपनी डायरी लिखी हो.
1483 में जन्मे बाबर महज 12 साल की उम्र में फरगाना (आधुनिक उज्बेकिस्तान) की छोटी रियासत के शासक बन गए थे. उनके पिता की मृत्यु तब हुई जब उनके वजन के कारण वो जिस बालकनी में खड़े थे वह ढह गया और उनके महल के नीचे एक खाई में गिर गया.
बाबर की विरासत को उनके चाचाओं ने स्वेच्छा से स्वीकार नहीं किया. उन्होंने उनसे सत्ता छीनने का निरंतर प्रयास किया. यही वजह है कि बाबार ने अपने शुरुआती जीवन का एक बड़ा हिस्सा लड़ाई में बिताया.ये सारी बातें बाबर ने अपनी डायरी में लिखी थी. उनकी डायरी को बाबरनामा के नाम से जाना जाता है.
बाबर क्यों जाना चाहते थे चीन
उनकी इसी डायरी से बता चलता है कि उनके जीवन में एक ऐसा भी पल आया, जब वह चीन जाने की तैयारी करने लगे थे. अगर ऐसा हो जाता तो आज मुगल साम्राज्य की कहानियां इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो पाती.
अपने शासनकाल के पहले दशक में बाबर एशिया में, विशेष रूप से समरकंद शहर पर कब्जा चाहते थे. इसके लिए वह लगातार संघर्ष करते रहे. वह कई बार जंग में जीत भी हासिल की, लेकिन उस पर कब्जा नहीं कर पाए. क्योंकि, वह समरकंद और फरगना दोनों को साधना चाहते थे. आखिरकार वह फरगाना भी खो बैठे और समरकंद भी हाथ से फिसल गया. इस वजह से उनके मन में शासन और सत्ता को त्याग देने का विचार आया. उस वक्त वह चीन जाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने तैयारियां भी कर रखी थी.
कैसे भारत की ओर बढ़ गए बाबर
फिर कुछ ऐसा हुआ कि वह चीन की ओर जाने की बजाय दक्षिण की ओर रुख कर लिया और वर्तमान अफगानिस्तान की ओर बढ़ गए. 1504 में, उन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर काबुल पर कब्जा कर लिया. फिर कंधार को भी अपने कब्जे में ले लिया.
अब एक बार फिर से बाबर का एक विशाल साम्राज्य पर नियंत्रण हो गया. बाबर ने साम्राज्य के विस्तार के लिए पूरब की ओर रुख किया. इसी दौरान उनकी नजर भारत पर पड़ी और उनका टकराव दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी की सेना से हुआ. 1520 के दशक में बाबर का उत्तर भारत के इलाकों में प्रवेश हुआ और इस तरह वो भारत पहुंचे और मुगल वंश की स्थापना की.
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