कुछ ही देर में आएंगे बंगाल-असम समेत 5 राज्यों के Exit Poll, जानें ये कैसे कराए जाते हैं

हर चुनाव के दौरान पोलिंग डे के दिन देर शाम टीवी और अन्य माध्यमों से एग्जिट पोल के रुझान प्रसारित किए जाते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि एग्जिट पोल होता क्या है, यह कैसे कराए जाते हैं और इसको लेकर निर्वाचन आयोग के किया दिशा-निर्देश हैं.

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पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल थोड़ी देर में आएंगे (Representative Image/File/ITG) पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल थोड़ी देर में आएंगे (Representative Image/File/ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:44 PM IST

असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुके हैं. वहीं पश्चिम बंगाल में आज शाम तक वोटिंग खत्म हो जाएगी. इसके बाद काउंटिंग से पहले एग्जिट पोल शुरू होगा. लोकसभा इलेक्शन हो या राज्यों के चुनाव, मतदान खत्म होने के बाद हर बार टीवी चैनल्स और अखबारों के माध्यम से अलग-अलग एग्जिट पोल दिखाए जाते हैं. ये एग्जिट पोल चुनाव परिणाम आने से पहले नतीजों का एक अनुमान होता है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि एग्जिट पोल कैसे कराए जाते हैं और इसको लेकर निर्वाचन आयोग के नियम क्या हैं. 

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एग्जिट पोल का शाब्दिक अर्थ ही है - मतदान से बाहर यानी पोलिंग बूथ के बाहर का हाल. जब वोटर्स  पोलिंग बूथ से बाहर आते हैं तो उनसे बातचीत की जाती है. उनकी उम्मीद क्या है, उनका मत किस पार्टी के सपोर्ट में गया और पोलिंग से जुड़े ऐसे ही की सवाल पूछे जाते हैं. पोल डे के दिन वोटर्स से बातचीत कर रुझान जानने की कोशिश जाती है कि परिणाम किस पार्टी के पक्ष में जा सकता है. 

कैसे कराए जाते हैं एग्जिट पोल
एग्जिट पोल कराने वाली अलग-अलग एजेंसियां अपने कर्मचारियों को वोट देकर निकलने वाले लोगों से उनकी राय जानने के लिए सैकड़ों पोलिंग स्टेशन के बाहर तैनात करके रखते हैं. ये लोग वोट देकर बाहर आने वाले सैकड़ों मतदाताओं से यह जानने की कोशिश करते हैं कि उन्होंने किस पार्टी या उम्मीदवार को वोट दिया. इसके साथ ही वोटिंग पैटर्न क्या रहा, किस तरफ लोगों का रुझान ज्यादा रहा. इन बातों को भी दर्ज किया जाता है.    

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राज्यभर या देशभर के हजारों लाखों वोटरों से बातचीत कर मतदान के आंकड़ें निकाले जाते हैं. इन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है. फिर अलग-अलग एजेंसियां अपने आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर एग्जिट पोल का अनुमान तय करती है कि आने वाले चुनाव परिणाम का रुझान किस तरफ होगा. एग्जिट पोल के अनुमान तय करना एक मुश्किल और मेहनत वाली प्रक्रिया होती है.   हालांकि, ऐसे सर्वे और उनके आंकड़ों से निकले रुझान कई बार आने वाले चुनाव परिणाम के उलट भी होते हैं, तो कई बार एग्जिट पोल के रुझान काफी सटीक निकलते हैं. 

एग्जिट पोल को लेकर भी निर्वाचन आयोग ने गाइडलाइन बना रखी है. रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट 1951 की धारा 126A के तहत दिए गए समय के बाद ही एग्जिट पोल के रुझान का प्रसारण हो सकता है. इसके तहत 29 अप्रैल को सुबह 7 बजे से लेकर शाम 6.30 तक एग्जिट पोल करवाना बैन है. इस समय के बाद ही एग्जिट पोल के रुझान सामने आ सकते हैं. 

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