बेइज्जत पर बेइज्जत... इन 5 मौकों पर अमेरिका ने दिखाई थी पाकिस्तान को असल औकात!

पाकिस्तान को कई मौकों पर अमेरिका से बेइज्जती का सामना करना पड़ा है और अमेरिका ने कई बार पाकिस्तान को नीचा दिखाया है.

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अमेरिका ने पाकिस्तान को कई बार नीचा दिखाया है. (Photo: AP) अमेरिका ने पाकिस्तान को कई बार नीचा दिखाया है. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST

दुनिया के सामने आज भले ही पाकिस्तान खुद को अमेरिका का हितैषी दिखाने की कोशिश कर रहा है या फिर उसके करीब जाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. आज से पहले कई बार ऐसे मौके आए हैं, जब पाकिस्तान को अमेरिका के सामने असहज हालात का सामना करना पड़ा है. अमेरिका ने कई बार पाकिस्तान को आईना दिखाया है और दुनिया के सामने जलील किया है. कभी आतंकवाद तो कभी आर्थिक बदहाली और कभी अपने ही दावों में फंसने की वजह से पाकिस्तान दुनिया के सामने कमजोर साबित हुआ है. ऐसे में जानते हैं कि कब-कब अमेरिका ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई है... 

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पाकिस्तान की जमीन पर किया ऑपरेशन

ये बात है 2 मई 2011 की, जब अमेरिका ने पाकिस्तान की जमीन पर ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर किया और एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया. ये ठिकाना पाकिस्तानी आर्मी के ट्रेनिंग सेंटर के बिल्कुल पास था, लेकिन इस्लामाबाद को भनक तक न लगी. खास बात ये है कि अमेरिका ने इस मिशन की जानकारी पाकिस्तान को पहले से नहीं दी. अमेरिकी नेवी सील्स हेलीकॉप्टर से घुसे, करीब 40 मिनट में ऑपरेशन खत्म किया और वापस लौट गए, जबकि पाकिस्तान की एयर डिफेंस सिस्टम और सेना को इसकी भनक तक नहीं लगी.

अलजजीरा को हाथ लगी पाकिस्तानी जांच रिपोर्ट में लिखा गया था कि पाकिस्तान ने इसे '1971 के भारत युद्ध के बाद सबसे बड़ी बेइज्जती' करार दिया था. इतना ही नहीं, इस दौरान एक हेलिकॉप्टर भी क्रैश हुआ, लेकिन फिर भी किसी को पता नहीं चला और अमेरिका ने अपना ऑपरेशन कर दिया.  

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ट्रंप ने पाकिस्तान को कहा था झूठा

पहले तो अमेरिका ने सीक्रेट ऑपरेशन कर पाकिस्तान को कमजोर साबित किया, इसके बाद पाकिस्तान की बार-बार कर्ज मांगने की आदत को लेकर अमेरिका बेइज्जती कर चुका है. साल 2018 में खुद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने साल के पहले ट्वीट में पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि उस देश ने अमेरिका को झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया है. ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने पिछले 15 सालों में मूर्खतापूर्ण तरीके से पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से अधिक की सहायता दी है, और बदले में उन्होंने हमें झूठ और धोखे के सिवा कुछ नहीं दिया. 


इसके अलावा कहा, वे अफगानिस्तान में जिन आतंकवादियों का हम पीछा कर रहे हैं, उन्हें पनाह देते हैं, और बदले में बहुत कम मदद करते हैं. अब और नहीं! हालांकि, पाकिस्तान फिर भी आईएमएफ से कर्ज मांगता रहा, जहां अमेरिका का सबसे बड़ा रोल है. 

अमेरिका ने रुकवा दिया था फंड

एक मौके पर पाकिस्तान को फिर से अमेरिका से बेइज्जती झेलनी पड़ी. दरअसल, 2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को 1.3 अरब डॉलर की सिक्योरिटी एड रुकवा दी थी. उस वक्त अमेरिका ने कहा था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली कम से कम 900 मिलियन डॉलर की सुरक्षा सहायता को तब तक निलंबित कर रहा है जब तक कि वह अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है.

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एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में बनाकर रखा

बता दें कि पाकिस्तान 2018 से 2022 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि और निवेश दोनों प्रभावित हुए. माना जाता है कि पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में भी अमेरिका के दबाव की वजह से बना रहा. 

इमरान की चिट्ठी हमेशा याद रहेगी

दरअसल, कुछ महीनों पहले ही पूर्व सीआईए अधिकारी जॉन किरियाकू ने इमरान खान की पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने उन पर पाकिस्तान से माफी मांगने का दबाव बनाने की कोशिश से जुड़े एक पत्र का जवाब दिया था. इस पत्र को लेकर उन्होंने कहा कि वो ऐसे लेटर को टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करेंगे. वैसे तो वो बात भी चर्चा में रहती है, जब अमेरिका में इमरान खान मेट्रो से सफर कर रहे थे.

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