शादी-विवाह या किसी बच्चे के जन्मोत्सव जैसे शुभ मौके पर अक्सर किन्नर नेग मांगने पहुंच जाते हैं. लोग भी खुशी- खुशी नेग दे देते हैं. ऐसे में कई बार जब किन्नरों के ग्रुप को कोई खास गिफ्ट या उनके मुताबिक पैसे नहीं मिलते तो विवाद भी हो जाता है. हमें अपने आसपास ही यदा-कदा ऐसी घटनाएं देखने को मिल जाती है.
जब कभी भी किन्नर नेग या गिफ्ट को लेकर विवाद करने लग जाते हैं,तो यह सवाल कौंधता है कि इनका इस तरह से पैसे उगाही करना सही है? क्योंकि, कई बार किन्नर नेग वसूलने के चक्कर में अपनी मनमानी पर उतर आते हैं. मामलों में तो आर्थिक तौर पर कम संपन्न लोगों के साथ किन्नरों का समूह हिंसा और झगड़े पर भी उतारू हो जाता है.
वहीं कई बार किन्नरों के अलग- अलग समूह भी एक ही जगह पहुंच जाते हैं और उनके बीच विवाद बढ़ने से शादी और जन्मोत्सव जैसा शुभ माहौल गंभीर हो जाता है. फिर लोग मामला रफा-दफा करने के चक्कर में उनके मनमाने मांगों को पूरा कर देते हैं. कुछ
किन्नरों का नेग वसूलना कैसे अवैध है?
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या किन्नरों का नेग मांगना उनका हक है या फिर यह काम गैरकानूनी होता है? इसे हाल ही में आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले से समझा जा सकता है. जब कोर्ट ने एक किन्नर की याचिका पर नेगवसूलने के काम को अवैध उगाही करार दिया.
याचिका दायर करने वाली किन्नर गोंडा जिले के एक इलाके में नेग लेने का काम कई सालों से करती थी. कुछ दिनों से उसके इलाके में किन्नर समुदाय के दूसरे ग्रुप के सदस्य दखल देने लगे थे. दरअसल, किन्नर समुदायों के बीच नेग इकट्ठा करने को लेकर किसी भी शहर में अलग-अलग इलाका बंटा होता है. यह नियम समुदाय के बीच झड़प न हो इस ख्याल से बनाए जाते हैं.
ऐसे में जब गोंडा में किन्नरों के ग्रुप एक दूसरे के इलाके में दखल देने लगे तो याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई कि उन्हें बिना हिंसा अपने इलाके में नेग वसूलने में सुरक्षा प्रदान की दी जाए और अन्य समूहों का इलाका तय कर दिया जाए. ऐसे में कोर्ट ने बताया कि कानून इस तरह के किसी भी काम को प्रोटेक्ट नहीं कर सकती है. क्योंकि, किन्नरों का घर-घर जाकर नेग वसूलने का कोई भी कानूनी आधार नहीं है.
वहीं याचिका देने वाली किन्नर का कहना था कि हम मानते हैं कि शादी या बच्चों के जन्म जैसे शुभ कार्यों के दौरान गिफ्ट या पैसे लेने का चलन सालों पुराना है और इस तरह से यह उनका पारंपरिक अधिकार बन गया है. इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में इन चीजों पर चर्चा हुई और बताया गया कि ऐसा नहीं है. नेग के नाम पर गिफ्ट या पैसा लेने का कोई कानून आधार नहीं है.
कोर्ट ने निर्देश दिया कि किसी भी नागरिक को सिर्फ उतना ही टैक्स या सेस या फीस देने का निर्देश दिया जा सकता है, जो कानून के हिसाब से तरीके से लिया जा सके. किन्नरों के पैसे मांगने का कोई कानूनी आधार नहीं है, जो किन्नरों को कानून के मुताबिक बताए गए प्रोसेस के अलावा किसी से पैसा, टैक्स या फीस वसूलने का हक देता हो.
नेग वसूलने को लेकर क्या कहता है कानून
कोर्ट में जिस किन्नर समुदाय ने ऐसी याचिका दी थी कि उन्हें कहा गया कि शादी और जन्मोत्सव जैसे मौके पर पैसे या गिफ्ट मांगने का आधिकार नहीं है. क्योंकि, कानून इस काम को मान्यता नहीं देता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के मुताबिक, उसका इस्तेमाल करते हुए कोर्ट ने कहा कि किन्नरों की इस याचिका को तबतक वैध नहीं ठहराया जा सकता, जबतक कि उन्हें किसी भी कानून का सपोर्ट न हो.
इसका साफ मतलब है कि किन्नर या कोई भी व्यक्ति किसी से उस प्रोसेस के जरिए पैसा ले सकता है जिसका जिक्र कानून में है. इसके अलावा किसी भी तरह से, किसी भी आधार पर पैसा या गिफ्ट वसूलना कानूनन अपराध है. अगर किन्नरों को शादियों में गिफ्ट दी जाती है या वो ऐसे गिफ्ट या पैसे लेने आते हैं तो कानूनी रूप से ये वैध नहीं है. इसे जबरन पैसा वसूलने की श्रेणी में रखा जाएगा. इसे अवैध उगाही कहा जाएगा.
अपने फैसले में कोर्ट ने ट्रांसजेंडर पर्सन एक्ट 2019 का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि ट्रांसजेंडर पर्सन प्रोटेक्शन राइट एक्ट के प्रावधानों में भी ऐसे किसी अधिकार की बात नहीं कही गई है.
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