पाकिस्तान की ट्रेनों में होता है एक 'पार्लर' डिब्बा, इसमें क्या होता है?

पाकिस्तान की कुछ प्रीमियम ट्रेनों में एक खास पार्लर डिब्बा लगाया जाता है, जो सामान्य कोच से बिल्कुल अलग होता है. इस डिब्बे में आरामदायक सीटें, ज्यादा स्पेस, एयर कंडीशनिंग और प्राइवेट माहौल जैसी सुविधाएं मिलती हैं.

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यह सामान्य डिब्बों की तरह भीड़भाड़ वाला नहीं होता. ( Photo: ITG) यह सामान्य डिब्बों की तरह भीड़भाड़ वाला नहीं होता. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:06 AM IST

भारत और पाकिस्तान का इतिहास भले ही एक-दूसरे से जुड़ा रहा हो, लेकिन समय के साथ दोनों देशों की रेलवे व्यवस्था ने अपनी अलग पहचान बना ली है. भारत में रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में गिना जाता है, जहां हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं. यहां ट्रेनों में जनरल, स्लीपर, एसी, चेयर कार और लग्जरी कोच जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं. वहीं, पाकिस्तान की रेलवे व्यवस्था आकार में भारत से छोटी जरूर है, लेकिन वहां भी कुछ ऐसी खास चीजें मौजूद हैं जो लोगों का ध्यान खींचती हैं. इन्हीं में से एक है पाकिस्तान की ट्रेनों में लगाया जाने वाला 'पार्लर कार' या 'पार्लर डिब्बा'.

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भारत में आमतौर पर लोग ट्रेन में सफर के दौरान सीट, बर्थ और खाने-पीने की सुविधा पर ध्यान देते हैं, लेकिन पाकिस्तान की कुछ ट्रेनों में ऐसा खास डिब्बा भी होता है जो सामान्य कोच से बिल्कुल अलग अनुभव देता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अक्सर लोग पूछते हैं कि आखिर पाकिस्तान की ट्रेनों का यह पार्लर डिब्बा क्या होता है और इसमें ऐसी कौन-सी सुविधाएं होती हैं.

क्या होता है पार्लर डिब्बा
दरअसल, पार्लर कार एक खास तरह का रेलवे कोच होता है जिसे यात्रियों को आरामदायक और प्राइवेट माहौल देने के लिए डिजाइन किया जाता है. यह सामान्य डिब्बों की तरह भीड़भाड़ वाला नहीं होता. इसमें सीटों की संख्या कम रखी जाती है ताकि यात्रियों को ज्यादा स्पेस और आराम मिल सके.

पार्लर कार की खासियत क्या होती है?
पाकिस्तान रेलवे की कुछ प्रीमियम ट्रेनों में यह सुविधा खास यात्रियों और फैमिली ट्रैवल के लिए दी जाती है. इस पार्लर डिब्बे की सबसे बड़ी खासियत इसका इंटीरियर होता है. आम कोच की तरह इसमें लंबी कतार में सीटें नहीं होती, बल्कि कई बार सोफे जैसी आरामदायक सीटें लगाई जाती हैं. कुछ पार्लर कारों में टेबल, घूमने वाली कुर्सियां और छोटे मीटिंग एरिया जैसी सुविधाएं भी देखने को मिलती हैं. यही कारण है कि इसे ट्रेन का 'वीआईपी कोच' भी कहा जाता है.

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पाकिस्तान की कुछ ट्रेनों में पार्लर डिब्बे को बिजनेस क्लास की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इसमें सफर करने वाले यात्रियों को ज्यादा शांति, साफ-सफाई और बेहतर सर्विस मिलती है. कई बार इसमें टीवी, चार्जिंग पॉइंट, एयर कंडीशनिंग और खाने-पीने की विशेष सुविधा भी दी जाती है. लंबी दूरी की यात्रा करने वाले परिवार और बिजनेस यात्रियों के लिए यह कोच काफी आरामदायक माना जाता है.

बिजनेस क्लास जैसा मिलता है अनुभव
अगर भारतीय रेलवे से तुलना करें तो भारत में भी ऐसी सुविधाएं कुछ खास ट्रेनों में देखने को मिलती हैं. उदाहरण के लिए राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत और महाराजा एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में यात्रियों को प्रीमियम सुविधाएं दी जाती हैं. हालांकि भारतीय रेलवे में 'पार्लर कार' शब्द बहुत ज्यादा प्रचलित नहीं है, लेकिन पुराने समय में कुछ ट्रेनों में पार्लर कोच जैसी व्यवस्था हुआ करती थी. आज के समय में भारत में एग्जीक्यूटिव चेयर कार और लग्जरी ट्रेनें उसी तरह का अनुभव देने की कोशिश करती हैं.

वंदे भारत और महाराजा एक्सप्रेस ने बदली तस्वीर
भारत की वंदे भारत ट्रेन में मिलने वाली आरामदायक सीटें, आधुनिक इंटीरियर और प्रीमियम सुविधाएं काफी हद तक पार्लर कोच जैसी फील देती हैं. वहीं महाराजा एक्सप्रेस जैसी लग्जरी ट्रेनें तो होटल जैसी सुविधाओं के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं. हालांकि आम भारतीय ट्रेनों में अभी भी बड़ी संख्या में यात्री स्लीपर और जनरल कोच में सफर करते हैं.

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भारतीय रेलवे में भी मिलती हैं प्रीमियम सुविधाएं
पाकिस्तान रेलवे की पार्लर कारों की चर्चा इसलिए भी होती है क्योंकि वहां रेलवे नेटवर्क सीमित होने के बावजूद कुछ ट्रेनों में यात्रियों को खास अनुभव देने की कोशिश की गई है. कई वीडियो और तस्वीरों में देखा गया है कि इन डिब्बों का डिजाइन सामान्य ट्रेनों से ज्यादा आकर्षक होता है. सीटों के बीच पर्याप्त जगह होती है और यात्रियों को सफर के दौरान प्राइवेट माहौल मिलता है.

हालांकि पाकिस्तान रेलवे को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है. वहां ट्रेनों की संख्या भारत की तुलना में काफी कम है और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना बड़ा नहीं माना जाता. दूसरी तरफ भारतीय रेलवे लगातार आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना, वंदे भारत ट्रेन और हाईस्पीड रेल जैसे प्रोजेक्ट रेलवे को नई पहचान दे रहे हैं.

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