ईरान में कितने अंदर तक घुसा है मोसाद? एक एजेंट तो उनकी इंटेलिजेंस का हेड बन गया था

ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद एक बार फिर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर मोसाद की पकड़ ईरान में कितने अंदर तक है...

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ईरान में मोसाद के एजेंट अपना नेटवर्क बना चुके हैं. (Photo: Reuters) ईरान में मोसाद के एजेंट अपना नेटवर्क बना चुके हैं. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद फिर से इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद चर्चा में है. कई रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिसमें बताया जा रहा है कि मोसाद की पकड़ ईरान में अंदर तक है. ईरान में मोसाद कितना एक्टिव है, जिससे जुड़ी एक कहानी काफी मशहूर है. एक बार ईरान ने मोसाद को रोकने के लिए इंटेलिजेंस यूनिट बनाई, लेकिन बाद में पता चला कि उस यूनिट का हेड ही एक मोसाद एजेंट निकला. ऐसे में जानते हैं कि ईरान में मोसाद की जड़ कितनी गहरी है... 

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ईरान में कितना मजबूत है मोसाद?

मोसाद कुछ सालों से नहीं, बल्कि 1979 से ईरान में खुफिया प्रोजेक्ट्स कर रहा है. ईरानी क्रांति के बाद से मोसाद लगातार काम कर रहा है और ईरान के डिफेंस सिस्टम की निगरानी, ​​घुसपैठ,  उन्हें कमजोर करने के उद्देश्य से काम कर रहा है. ईरान के प्रमुख डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने और सैन्य कमांडरों को मारने वाले हमलों का श्रेय एक इजरायली खुफिया सर्विस को दिया जाता है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि उसने ईरान के सुरक्षा तंत्र में काफी घुसपैठ कर ली थी. 

इसके लिए मोसाद ने वहां काफी मजबूत ग्राउंड नेटवर्क बनाया है और मोसाद के एजेंट विरोधी गुटों से लेकर सरकार के अहम पदों पर अपनी जगह बना चुके हैं. इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के अंदर सैकड़ों एजेंट तैनात किये हैं. मोसाद ने हथियारों और ड्रोनों को ईरान में तस्करी करके गुप्त ठिकाने स्थापित किए, जो बाद में हमलों में इस्तेमाल हुए. 

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ईरान भी है मोसाद से परेशान

अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उन पर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने, इजरायल को मीडिया समर्थन प्रदान करने या जनमत को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है. अक्सर ईरानी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और उनकी सुरक्षा टीमों को संवेदनशील संचारों की इजरायली हैकिंग से बचने के लिए इंटरनेट से जुड़े स्मार्टफोन का उपयोग न करने का आदेश दिया जाता है.

वहीं, ईरानी सिक्योरिटी सर्विस ने जनता से पिछले कुछ सालों में कंपनियों या व्यक्तियों को किराए पर दी गई किसी भी इमारत की जानकारी देने का अनुरोध किया गया था. इसके अलावा ईरान समय-समय पर कई लोगों को गिरफ्तार करता रहता है. 

किन ऑपरेशन को दिया अंजाम

पिछले दो दशकों में, इजरायल ने ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या की है, जिनमें मोहसेन फखरीजादेह भी शामिल हैं, जिनकी हत्या एक पिक-अप ट्रक के पीछे लगी रिमोट-कंट्रोल्ड बंदूक से की गई थी. इजरायल 2010 में स्टक्सनेट कंप्यूटर वायरस फैलाने के लिए भी ज़िम्मेदार था, जिसके बारे में माना जाता है कि इसने ईरान में कम से कम 14 परमाणु संयंत्रों में 30,000 कंप्यूटरों को संक्रमित किया था. 

मोसाद के चौंकाने वाले अचीवमेंट

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- इजरायल की Ynet news की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2018 में एक रात मोसाद के एजेंट तेहरान के बाहरी इलाके में एक गुप्त गोदाम में घुस गए थे. वहां बड़े कमरे में 32 विशाल ईरानी तिजोरियां थीं. इन तिजोरियों में ही ईरान के परमाणु दस्तावेज छिपाकर रखे गए थे. यहीं पर ईरानी रक्षा मंत्रालय ने इस्लामी रिपब्लिक के सबसे बड़े रहस्यों में से एक को रखने का फैसला किया था. सुबह पांच बजकर एक मिनट पर सभी एजेंट गोदाम से निकल गए. ईरान से सारी सामग्री निकाल ली गई और कोई भी पकड़ा नहीं गया. मोसाद एजेंट्स ने जो दस्तावेज उड़ाए उनमें 114 फोल्डर शामिल थे. इनमें 55,000 से अधिक पन्ने थे. इनमें से 8,500 हस्तलिखित दस्तावेज थे. 

- एक बार ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने एक सनसनीखेज खुलासा किया था. उन्होंने बताया था कि  इस्लामिक रिपब्लिक की जिस खुफिया डिविजन को मोसाद के अभियानों को विफल करने के लिए बनाया गया था, उसका हेड की डबल एजेंट निकला था. इतना ही नहीं, ईरान के उस पूरे खुफिया विंग में करीब 20 मोसाद एजेंट सक्रिय थे. मोसाद की ताकत का अनुमान लगाया जा सकता है कि दुश्मन देश की खुफिया एजेंसी को ही उसने एक तरह से हाईजैक कर लिया था. 

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