ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर हो गया है और अब ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने का प्लान कर रहा है. बताया जा रहा है कि अभी ईरान तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का शुल्क यानी टोल लगाने की योजना बना रहा है. हर रोज होर्मुज से कई जहाज गुजरते हैं, जिनसे ईरान टैक्स वसूल सकता है. ऐसे में जानते हैं कि ईरान के नए प्लान के हिसाब से अब एक जहाज पर कितना टैक्स लगेगा.
पहले ये जानते हैं कि आखिर तेल जहाजों में कैसे लाया जाता है. इसके लिए अलग से ऑयल टैंकर होते हैं, जो कई टन ऑयल को एक साथ ट्रांसफर करते हैं. ऑयल टैंकर जहाज एक विशेष प्रकार का मालवाहक जहाज होता है, जिसे कच्चे तेल या रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट को थोक में परिवहन करने के लिए डिजाइन किया गया है. बताया जाता है कि हर साल करीब 2 अरब टन कच्चा तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट समुद्र के रास्ते इन जहाजों के जरिए ट्र्रांसफर किया जाता है.
इन जहाजों में हर प्रोडक्ट के हिसाब से अलग अलग टैंकर होते हैं. जैसे क्रूड ऑयल के लिए अलग टैंकर होते हैं, जिनमें अनरिफाइंड क्रूड ऑयल होते हैं, जबकि प्रोडक्ट टैंकर में रिफाइंड प्रोडक्ट ले जाए जाते हैं. इसके अलावा शटल टैंकर होते हैं, जिनमें ऑफशोर क्रूड ऑयल ले जाया जाता है.
अब बात करते हैं जहाजों की. दरअसल, वजन के हिसाब से अलग अलग तरह के जहाजों से तेल ट्रांसपोर्ट किया जाता है. कुछ छोटे जहाज होते हैं, जिनमें कम तेल आता है जबकि कुछ जहाज होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या तेल एक साथ ट्रांसपोर्ट किया जाता है. टैंकर का साइज डीडब्ल्यूटी (डेडवेट टनेज) से मापा जाता है, इसका मतलब है कि जहाज कितना वजन उठा सकता है.
- छोटे रूट और कम वजन के लिए Suezmax, Aframax, Panamax जहाज होते हैं, जिनमें 7 लाख से 10 लाख बैरल तक तेल ट्रांसफर किया जा सकता है. ये रीजनल रूट के लिए होते हैं, जैसे स्वेज नहर आदि में इन्हीं जहाजों से तेल ट्रांसपोर्ट किया जाता है.
- इसके बाद होते हैं VLCC. ये छोड़े बड़े जहाज होते हैं, जिनमें 20 लाख बैरल तक ऑयल आता है. आमतौर पर सबसे ज्यादा इन्हीं जहाजों का इस्तेमाल होता है और लंबी दूरी जाने के लिए इनका इस्तेमाल होता है. ये स्वेज नहर जैसे तेल रास्तों के लिए ठीक नहीं होते हैं, क्योंकि ये बड़े होते हैं. होर्मुज जैसे रूट से ऐसे जहाज काफी ट्रैवल करते हैं.
- फिर आते हैं ULCC. ये काफी बड़े जहाज होते हैं, जो कम इस्तेमाल में आते हैं. इनमें एक बार में 35 लाख बैरल तक तेल ट्रांसफर होता है.
कितना लगेगा टैक्स?
अगर ईरान प्रति बैरल के हिसाब से टोल वसूलता है तो जहाज में जा रहे तेल की क्वांटिटी के आधार पर डिसाइड होगा कि कितना टोल लगेगा. अभी तक टोल को लेकर पूरी गाइडलाइन नहीं आई है, लेकिन अभी प्रति बैरल एक डॉलर टैक्स लगाए जाने की बात कही जा रही है.
वैसे तो होर्मुज के रास्ते से वीएलसीसी जहाज ज्यादा ट्रैवल करते हैं. ऐसे में 20 लाख बैरल तक तेल एक बार में ट्रांसपोर्ट होता है. इस हिसाब से देखें तो एक वीएलसीसी जहाज पर 20 लाख डॉलर टैक्स देना होगा, जो बिटकॉइन के रुप में लिया जाएगा. 20 लाख डॉलर का मतलब हो गया करीब 18 करोड़ रुपये.
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