तेहरान में हुए हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई है. सरकारी मीडिया के मुताबिक, 28 फरवरी को उनके दफ्तर को निशाना बनाया गया था. इसी हमले में 86 साल के खामेनेई की जान चली गई. उनकी मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. सरकार ने देश में 40 दिन के शोक का ऐलान किया है. यह हवाई हमला खास तौर पर सरकारी ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था. अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि ईरान के राजनीतिक नेता अली लारीजानी ईरान में किसी भी सत्ता परिवर्तन में केंद्रीय भूमिका निभा सकते हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद अली लारीजानी का नाम संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आ रहा है.
तनाव के बीच अली लारीजानी का बयान चर्चा में
अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अली लारीजानी का बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर युद्ध थोपा गया तो वह जवाब देंगे. उनका यह संदेश अमेरिका और इज़रायल के लिए चेतावनी के तौर पर देखा गया. इसके साथ ही, ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत की खबरों के बाद अली लारीजानी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. राजनीतिक गलियारों में उन्हें खामेनेई के बाद सत्ता का सबसे बड़ा चेहरा और संभावित दावेदार माना जा रहा.
अली लारीजानी कौन हैं?
Ali Larijani ईरान के एक बड़े और अनुभवी नेता हैं. उन्होंने सेना, संसद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम पदों पर काम किया है. वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के शुरुआती सदस्यों में रहे हैं. वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के अहम प्रतिनिधि रह चुके हैं. वे सरकारी टीवी नेटवर्क IRIB के प्रमुख भी रह चुके हैं. फिलहाल वे ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव हैं. उनका जन्म इराक के नजफ में हुआ था, लेकिन बाद में उनका परिवार ईरान आ गया। उन्होंने तेहरान विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र (Philosophy) में पीएचडी की है.
उन्हें संभावित उत्तराधिकारी क्यों माना जा रहा है?
लारीजानी को खामेनेई का करीबी माना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें देश की सुरक्षा रणनीति और भविष्य की योजनाओं में अहम जिम्मेदारियां दी गई थीं. वे अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता में शामिल रहे हैं. उन्होंने हाल के प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में भूमिका निभाई. रूस, कतर और ओमान जैसे देशों से भी उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं. उन्होंने कहा था कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर हुआ तो जवाब देगा. हालांकि वे धार्मिक नेता (मौलवी) नहीं हैं और पारंपरिक रूप से सुप्रीम लीडर का पद एक उच्च धार्मिक पद होता है, इसलिए उनके नाम को लेकर बहस भी है.
ईरान में सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाता है?
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन "असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स" नाम की धार्मिक परिषद करती है. यह परिषद तय करती है कि कौन व्यक्ति धार्मिक और राजनीतिक रूप से इस पद के योग्य है। आमतौर पर सुप्रीम लीडर एक वरिष्ठ धार्मिक विद्वान होता है.
लारीजानी से जुड़ी कुछ अहम बातें
वे IRGC में रहे और बाद में राजनीति में आ गए. उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) का समर्थन किया था. वे 1994 से 2004 तक IRIB के प्रमुख रहे. 2021 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें गार्जियन काउंसिल ने अयोग्य ठहरा दिया था. उनके भाई भी ईरान की न्यायपालिका और कूटनीति में बड़े पदों पर रह चुके हैं. फिलहाल यह साफ नहीं है कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा. लेकिन अली लारीजानी का नाम तेजी से चर्चा में है.
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