उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पिटकुल MD के पद से हटाए गए यूसी ध्यानी

उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है. जिसमें हाईकोर्ट ने पिटकुल यानी पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पद पर पीसी ध्यानी की नियुक्ति रद्द कर दी है. हाईकोर्ट ने इस पद पर ध्यानी की नियुक्ति को अवैध बताया है.

Advertisement
उत्तराखंड हाईकोर्ट. (File Photo: ITG) उत्तराखंड हाईकोर्ट. (File Photo: ITG)

लीला सिंह बिष्ट

  • नैनीताल,
  • 28 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST

उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल की दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने पिटकुल यानी पॉवर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पद पर पीसी ध्यानी की नियुक्ति रद्द कर दी है. न्यायालय ने कहा कि ध्यानी को नियुक्त करते वक्त, ऊर्जा के तीन निगमों- पिटकुल, यूपीसीएल और यूजेवीएनएल में प्रबंध निदेशक व निदेशक नियुक्ति करने की जो 2021 की नियमावली है, उसकी अवहेलना की गयी है. 

Advertisement

उक्त नियमावली में प्रावधान है कि मैनेजिंग डायरेक्टर केवल तकनीकी व्यक्ति ही हो सकता है. यानी उसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग की होनी चाहिए. ध्यानी इस अर्हता को पूरी नहीं करते थे. हालांकि ध्यानी के बचाव में सरकार के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि कुछ मामलों में प्रैक्टिकल अनुभव को औपचारिक तकनीकी योग्यता के बराबर माना जा सकता है. लेकिन इस सरकारी कुतर्क को अदालत ने मानने से इनकार कर दिया.

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड: कोटद्वार वाले 'मोहम्मद दीपक' का Gym जॉइन करेंगे राहुल गांधी, बवाल के बाद कितने बचे क्लाइंट?

अदालत के निर्देश के बाद सरकार ने लिया था ये फैसला

अदालत से निर्देश मिलने के बाद सरकार ने अपनी कार्यपालिका शक्तियों का उपयोग करते हुए 25 फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक में एक फैसला लिया था. जिसमें कहा गया था कि ऊर्जा के तीनों निगमों में गैर तकनीकी व्यक्ति भी प्रबंध निदेशक बन सकेंगे. 

Advertisement

मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने शुक्रवार 27 फरवरी को राज्य सरकार को फटकार लगाई. क्योंकि उसने एक सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर रैंक के अधिकारी को हटाने के आदेश की अनदेखी की, जो लगभग तीन साल से इस पद पर थे. साथ ही वे इस पद के काबिल भी नहीं थे. कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी पावर आर मीनाक्षी सुंदरम को अगली सुनवाई में पेश होने और यह बताने का आदेश दिया है कि उन पर कोर्ट की अवमानना ​​का मुकदमा क्यों न चलाया जाए.

हाईकोर्ट ने इसलिए जारी किया अवमानना नोटिस

हाई कोर्ट ने मीनाक्षी सुंदरम के खिलाफ अवमानना ​​का केस शुरू करने का आदेश इसलिए दिया क्योंकि राज्य का पावर डिपार्टमेंट 18 फरवरी को दिए गए अपने फैसले का पालन करने में नाकाम रहा. इस आदेश में पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) के मैनेजिंग डायरेक्टर को पिछले तीन साल से ज़्यादा समय से एक याचिका पर सुनवाई के बाद निकालने का आदेश दिया गया था. 

अपने फैसले में कोर्ट ने कहा था कि पीटीसीयूएल के MD पीसी ध्यानी नियुक्त होने के काबिल नहीं थे. क्योंकि उनके पास नियमों के मुताबिक ज़रूरी इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं थी. गौरतलब है कि नैनीताल हाईकोर्ट के 18 फरवरी के ऑर्डर के बाद मीनाक्षी सुंदरम ने कहा था कि सरकार ऑर्डर की स्टडी कर रही है और राज्य के लॉ डिपार्टमेंट की सलाह पर सही एक्शन लिया जाएगा. लेकिन, पुष्कर सिंह धामी सरकार हाई कोर्ट के ऑर्डर का पालन करने में फेल रही.

Advertisement

इसके उलट धामी कैबिनेट ने एमडी पीटीसीयूएल की नियुक्ति के नियम में बदलाव किया. बुधवार को कैबिनेट के एक फैसले में पीटीसीयूएल के MD की नियुक्ति के लिए ज़रूरी इंजीनियरिंग क्वालिफिकेशन हटा दी गई और नॉन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को भी इस पद के लिए क्वालिफाई करने की इजाज़त दे दी गई. राज्य कैबिनेट के इस फैसले के आधार पर धामी सरकार HC के 18 फरवरी के फैसले के खिलाफ रिवीजन पिटीशन फाइल करने पर विचार कर रही थी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement