'राज्यपाल भी बदरीनाथ-केदारनाथ नहीं जा पाएंगे?', गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन की तैयारी पर कांग्रेस का सवाल

गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के मंदिर समिति के फैसले से सियासत गरमा गई है. समिति ने इसे धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा से जोड़ा है. वहीं केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में ऐसे प्रतिबंधों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं.

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कांग्रेस ने चार धाम के तीर्थ स्थलों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने के मंदिर समिति के प्रस्ताव का विरोध किया. (File Photo: PTI) कांग्रेस ने चार धाम के तीर्थ स्थलों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने के मंदिर समिति के प्रस्ताव का विरोध किया. (File Photo: PTI)

ओंकार बहुगुणा

  • उत्तरकाशी/देहरादून,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:04 PM IST

चारधाम यात्रा के प्रमुख तीर्थ गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक को लेकर विवाद तेज हो गया है. गंगोत्री मंदिर समिति ने धाम की धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा का हवाला देते हुए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि गंगोत्री धाम एक पवित्र हिंदू तीर्थ स्थल है और इसकी धार्मिक गरिमा बनाए रखना समिति की जिम्मेदारी है. इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है कि धाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. 

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समिति के इस फैसले को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिल रहा है. उनका कहना है कि इससे धाम की पवित्रता, परंपराएं और धार्मिक मर्यादाएं सुरक्षित रहेंगी. हालांकि, इस फैसले को लेकर अब तक प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन मंदिर समिति के निर्णय के बाद यह मुद्दा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है. इधर चारधाम यात्रा के अन्य दो प्रमुख तीर्थों केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है.

इसको लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने सवाल उठाते हुए कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाए कि हिंदू होने की परिभाषा क्या है और यह तय कौन करेगा कि कौन हिंदू है और कौन नहीं. कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, 'आप जिन लोगों को वीआईपी दर्शन कराते हैं, बड़े-बड़े होटलों में ठहराते हैं और उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं, क्या उनका आना भी बंद होगा? क्या अब उत्तराखंड के राज्यपाल भी केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम नहीं जा पाएंगे?' बता दें कि उत्तराखंड के वर्तमान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) हैं.

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कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के फैसले सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं और सरकार को इस पर स्पष्ट नीति के साथ सामने आना चाहिए. वहीं बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने तीर्थ स्थल में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने साफ कहा है कि बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे धाम कोई पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं, जहां प्रवेश को नागरिक अधिकार के बजाय धार्मिक परंपरा के तौर पर देखा जाना चाहिए.

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सभी प्रमुख धार्मिक गुरुओं और संत समाज की यही मान्यता रही है कि इन पवित्र तीर्थों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, 'हम सनातन परंपराओं का सम्मान करते हुए यह फैसला ले रहे हैं. चारधाम आस्था और साधना का केंद्र हैं, न कि सामान्य पर्यटन स्थल.' इस प्रस्ताव पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में जितने भी तीर्थ स्थल हैं, उनका संचालन करने वाली संस्थाएं और संगठन जो भी मत बनाएंगे, सरकार उसी के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगी.

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