सोशल मीडिया-आधार लिंकः सुप्रीम कोर्ट इंटरनेट के दुरुपयोग से चिंतित

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन गोपनीयता और राज्य के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें नहीं पता कि इसे कैसे करेंगे पर हमें ये पता है कि कैसे वेब का दुरुपयोग करके समाज में गलत चीजें फैलाई जा रही हैं.

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सोशल मीडिया-आधार लिंक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई. सोशल मीडिया-आधार लिंक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हो रही सुनवाई.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 11:27 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि ऑनलाइन गोपनीयता और राज्य के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है. इससे उन लोगों पर विराम लगेगा जो आतंक फैलाने और अपराध करने के लिए इंटरनेट और वेब का उपयोग करते हैं. इससे ऐसे लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस ने कहा कि हमें नहीं पता कि इसे कैसे एक्सेस किया जा सकता है लेकिन हमें ये जानकारी है कि कैसे वेब का दुरुपयोग करके समाज में गलत चीजें फैलाई जा रही हैं.

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बेंच ने यह बात तब कही जब तमिलनाडु सरकार की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले में फर्जी खबरों के प्रसार, मानहानि, अश्लील, राष्ट्र विरोधी और आतंकवाद से संबंधित सामग्री के प्रवाह को रोकने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट को उसके उपयोगकर्ताओं के आधार नंबर से जोड़ने की जरूरत है. फेसबुक तमिलनाडु सरकार के इस सुझाव का विरोध कर रहा है. उसका कहना है कि 12-अंकों की आधार संख्या को साझा करने से यूजर की गोपनीयता नीति का उल्लंघन होगा. तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार, गूगल, वॉटसएप, ट्विटर, यू-ट्यूब और अन्य को नोटिस जारी कर 13 सितंबर तक जवाब दें.  

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपनी दलील में कहा कि सोशल मीडिया को आधार से जोड़ने से यह पता चलेगा कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज, अपमानजनक लेख, अश्लील सामग्री, राष्ट्र विरोधी और आतंक समर्थित कंटेट कौन डाल रहा है. क्योंकि अभी सरकार यह पता नहीं कर पा रही है कि ऐसे कंटेंट की उत्पत्ति कहां से होती है.

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फेसबुक ने कहा  कि आधार लिंक करने से गोपनीयता भंग होगी

सोशल मीडिया को आधार से लिंक करने के विरोध में फेसबुक ने कहा कि वह आधार नंबर को किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं कर सकता है. क्योंकि, 12-अंक की आधार संख्या और बॉयोमीट्रिक विशिष्ट पहचान को साझा करने से उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता नीति का उल्लंघन होगा.

याचिकाकर्ता की दलील - आधार लिंक करने से अपराधियों का पता चलेगा

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, तमिलनाडु सरकार के वकील बालाजी श्रीनिवासन ने पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के सोशल मीडिया प्रोफाइल को उनके आधार नंबर से जोड़ने की आवश्यकता के बारे में अपील पर थी. इससे उन अपराधों का पता लगाने में मदद मिलेगी जिससे सोशल मीडिया के जरिए आपराधिक तत्व हिंसा फैलाने का काम कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट बैंक खातों, मोबाइल नंबरों को आधार से जोड़ने को असंवैधानिक बोल चुका है

सुप्रीम कोर्ट आधार को किसी के बैंक खाते और मोबाइल नंबरों से जोड़ने को अनिवार्य रूप से असंवैधानिक करार दिया था. इसलिए, बैंक और टेलिकॉम ऑपरेटर्स अब इस बात पर जोर नहीं दे सकते कि खाते और मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ा जाए. आधार से जुड़े मौजूदा खातों और मोबाइल नंबरों का क्या होता है, यह स्पष्ट नहीं है.

आखिर क्यों पहुंचा यह मामला सुप्रीम कोर्ट

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सोशल मीडिया की तरफ से केस लड़ रहे वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और कपिल सिब्बल ने कहा कि अभी इस तरह के 2 मामले मद्रास हाईकोर्ट, 1-1 मामला बॉम्बे हाईकोर्ट और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चल रहा है. इनके फैसले हो सकते हैं कि पूरे देश के लिए सही न हो, इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट में लाया गया है ताकि फैसला पूरे देश के लिए लागू हो.

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