PM मोदी बोले- हम शांति से रहे और अहिंसा के आदर्शों पर चले

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी धरती जिसने दुनिया को हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म जैसे धर्म दिए. हमारी धरती पर सूफी परंपरा पनपी है. इस सब के मूल में अहिंसा ही है. 20वीं शताब्दी में महात्मा गांधी ने इन आदर्शों का पालन किया और इसने भारत की आजादी में अपना अमूल्य योगदान दिया.

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आईआईएम कोझिकोड़ में भाषण देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (ट्विटर) आईआईएम कोझिकोड़ में भाषण देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (ट्विटर)

aajtak.in

  • कोझिकोड़ ,
  • 16 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST

  • हमारी परंपरा धरती को माता मानती हैः PM मोदी
  • वैश्विक शांति अभियानों में हमारा अहम योगदान है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईआईएम कोझिकोड़ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भाषण देते हुए कहा कि सदियों से हम शांति से रहे हैं. सदियों से हमने हमेशा दुनिया का स्वागत अपनी जमीन पर किया है. हमारी सभ्यता उस समय ही समृद्ध हो गई थी जब कई ऐसा नहीं कर सके थे. हम अहिंसा के आदर्शों पर चले और दुनिया के कई देशों ने इसे अपनाया भी.

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी धरती जिसने दुनिया को हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म जैसे धर्म दिए. हमारी धरती पर सूफी परंपरा पनपी है. इस सब के मूल में अहिंसा ही है. 20वीं शताब्दी में महात्मा गांधी ने इन आदर्शों का पालन किया और इसने भारत की आजादी में अपना अमूल्य योगदान दिया. चाहे डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग जूनियर हों या नेल्सन मंडेला या कई अफ्रीकी देशों में स्वतंत्रता संग्राम, उन्होंने गांधी जी से प्रेरणा ली.

शांति अभियानों में योगदानः मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि दो वर्ल्ड वार में कई भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई. वे बहादुरी से लड़े, भले ही भारत की उन युद्धों में कोई हिस्सेदारी नहीं थी. हम कभी किसी की जमीन या संसाधन नहीं चाहते थे, लेकिन हमारे सैनिकों ने शांति के लिए लड़ाई लड़ी. दशकों से, भारत वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे बड़ा योगदानकर्ताओं में से एक है.

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर कुछ बेहद विवादित क्षेत्र शांति की हवा में सांस ले सकते हैं, तो इसमें हमारे सैनिकों की अहम भूमिका रही है. नफरत, हिंसा, संघर्ष और आतंकवाद से मुक्त होने की कोशिश करने वाली दुनिया में भारतीय जीवन शैली आशा की एक किरण प्रदान करती है.

उन्होंने कहा कि हमारी परंपराएं धरती को हमारी माता के रूप में मानती हैं. भारत में देवत्व कई जानवरों से भी जुड़ा हुआ है. कौटिल्य ने वनस्पतियों और जीवों की रक्षा के बारे में व्यापक रूप से लिखा है.

ने कहा कि सदियों हम शांति से रहे हैं. सदियों से, हमने दुनिया का स्वागत हमारी जमीन पर किया है. हमारी सभ्यता उस समय ही समृद्ध हो गई थी जब कई ऐसा नहीं कर सके थे. ऐसा शांति और सद्भाव की वजह से हो सका.

उन्होंने कहा कि मोटे तौर पर कुछ निश्चित विचार हैं जो भारतीय मूल्यों के केंद्र में आज भी बने हुए हैं.और वो हैं करुणा, सद्भाव, न्याय, सेवा और खुलापन. जबकि भारत शांति, एकता और भाईचारे के जरिए दुनिया को अपनी ओर खींचता है.

भाषण में विवेकानंद का जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण की शुरुआत में स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि हम भारतीय विचारों को वैश्वीकरण करने की बात कर रहे हैं, जब स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा इस कैंपस में एक विशेष स्थान पाती है.

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उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि वर्षों पहले, 11 सितंबर, 1893 को स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपने ऐतिहासिक भाषण के दौरान भारत के सदाशयता की झलक दी थी. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जिस समय उन्होंने 'सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका' के साथ अपना भाषण शुरू किया, उस समय वहां जोरदार ताली बज रही थी.

ने कहा कि भारतीय चिंतन जीवंत और विविधतापूर्ण है. यह निरंतर और लगातार विकसित हो रहा है. इसे किसी एक संगोष्ठी या फिर पुस्तकों में व्याख्यान में शामिल करना आसान नहीं है. मोटे तौर पर, कुछ ऐसे विचार हैं जो भारतीय मूल्य के लिए केंद्र बने हुए हैं.

पीएम की योग अपनाने की सलाह

लोगों से योग अपनाने के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदियों पहले भारत के ऋषि-मुनियों ने योग का अभ्यास किया और दुनिया को आयुर्वेद दिया. योग केवल एक निर्धारित व्यायाम नहीं है. यह उससे कहीं ज्यादा की चीज है. योग फिटनेस और वेलनेस दोनों का ही साधन है. यह एक स्वस्थ शरीर और स्वस्थ दिमाग का निर्माण करता है.

आईआईएम के लोगों को योग अपनाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि आईआईएम समुदाय लोगों के सबसे प्रतिभाशाली और बेहरतीन समूहों में से एक है. बेहतरीन काम तनावपूर्ण दिनचर्या के साथ काम करके लाया जाता है. मैं उन सभी से थोड़ा समय योग के लिए देने की आग्रह करूंगा. अगर आप ऐसा करते है तो अपने में सकारात्मक अंतर भी देखेंगे.

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