IAS अलपन बंदोपाध्याय के बचाव से पहले IPS राजीव कुमार के लिए धरने पर बैठी थीं ममता

कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर सीबीआई टीम के पहुंचने की जानकारी होने पर सीएम ममता बनर्जी भी राजीव कुमार के आवास पर पहुंच गई थीं. अधिकारियों के साथ बैठक के बाद वो धरने पर बैठ गई थीं.

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बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (पीटीआई) बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मई 2021,
  • अपडेटेड 10:35 PM IST
  • अफसरों के बचाव को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं ममता
  • केंद्र से टकराव के बीच अलपन को अपना मुख्य सलाहकार बनाया

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने राज्य के अफसरों के बचाव को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं. IAS अलपन बंदोपाध्याय से पहले IPS राजीव कुमार को लेकर ममता ने केंद्र से सीधी लड़ाई लड़ी थी. फरवरी 2019 में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के लिए ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थीं. 

सारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई की जांच के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार सीबीआई के जरिए राज्य सरकार और पुलिस अफसरों को परेशान कर रही है. कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर सीबीआई टीम के पहुंचने की जानकारी होने पर सीएम ममता बनर्जी भी राजीव कुमार के आवास पर पहुंच गई थीं.

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अधिकारियों के साथ बैठक के बाद वो धरने पर बैठ गई थीं. ममता ने एक साथ सीबीआई, पीएम मोदी, अमित शाह और NSA अजीत डोभाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. आखिरकार सीबीआई को लौटना पड़ा था. 

बता दें कि सारदा चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी और हिरासत में लेकर पूछताछ की मांग की थी. सीबीआई का कहना था कि राजीव कुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. आईपीएस राजीव कुमार बंगाल सरकार द्वारा इस मामले की जांच के लिये गठित विशेष जांच दल का हिस्सा थे. यह घोटाला वर्ष 2013 में तब उजागर हुआ था जब राजीव कुमार बिधाननगर के पुलिस आयुक्त थे. 

डेप्युटेशन पर भेजने का विरोध करती आई हैं ममता  

ममता बनर्जी इन दोनों उदाहरणों के अलावा भी कई बार राज्य में अधिकारियों की कमी को वजह बताते हुए अफसरों को डेप्युटेशन पर भेजने का विरोध करती आई हैं. खैर राजीव कुमार और अलपन बंदोपाध्याय दोनों ही अफसरों के केस में मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन ममता ने दोनों ही मामलों अपने अफसरों का फ्रंटफुट पर आकर बचाव किया. 

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IAS अलपन बंदोपाध्याय का क्या है मामला? 

अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र सरकार ने 28 मई को दिल्ली अटैच करने का आदेश दिया था. उसी दिन पीएम मोदी के साथ बैठक को लेकर विवाद सामने आया था. 31 मई सुबह 10 बजे उन्हें दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक स्थित DOPT यानी डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग में रिपोर्ट करना था, मगर 60 घंटे बाद जो हुआ उसने केंद्र के आदेश को ताक पर रख दिया. 

कौन हैं अलपन बंदोपाध्याय, जिनपर आमने-सामने हैं ममता और मोदी सरकार 

सुबह 10 बजे तक मुख्य सचिव अलपन ने दिल्ली रिपोर्ट नहीं किया. इसकी बजाए सुबह के 11 बजे वो कोलकाता में राज्य सचिवालय पहुंचे. यहां उन्हें ममता बनर्जी के साथ यास तूफान और कोरोना से जुड़ी बैठक में हिस्सा लेना था. इससे जाहिर हुआ कि ममता सरकार ने केंद्र के फरमान को ठुकरा दिया था. 

ममता के करीबी हैं अलपन बंदोपाध्याय 

31 मई की शाम को ममता बनर्जी ने राज्य के मुख्य सचिव को रिलीव करने से इनकार करते हुए अलपन बंदोपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार बनाने का ऐलान किया. मंगलवार से अलपन बंदोपाध्याय मुख्य सलाहकार के तौर पर काम शुरू करेंगे. वहीं, मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी हरिकृष्ण द्विवेदी को सौंपी गई है.

अलपन बंदोपाध्याय की जहां तक बात है तो प्रशासनिक तौर पर वो पश्चिम बंगाल के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं. तूफान और कोरोना से लड़ाई में राज्य उन्हीं की देखरेख में आगे बढ़ रहा है. दूसरी तरफ वो मौजूदा सरकार के भी करीब हैं. 

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