पीएम मोदी ने शनिवार को जयपुर में एक जनसभा में यह वादा किया था कि उनकी सरकार जल्दी ही पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को मंजूरी देगी. इसके दो दिन के भीतर ही सरकार ने इस पर कैबिनेट नोट जारी कर दिया है और इसी महीने इसे कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है.
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, यह परियोजना करीब 40,451 करोड़ रुपये की है. जल संसाधन मंत्रालय ने इसे मंजूर करते हुए सोमवार को ही इसके बारे में कैबिनेट नोट को अंतिम रूप दे दिया और इसे कैबिनेट सचिवालय तथा सभी संबंधित लोगों को भेज दिया.
इस परियोजना से बीजेपी नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में फायदे की उम्मीद कर सकती है. वैसे तो इस परियोजना को पूरा होने में सात साल लग जाएंगे, लेकिन राज्य सरकार शायद इसकी घोषणा से अपने खिलाफ बने एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर के कुछ कम होने की उम्मीद कर रही है.
किसानों की सुध
बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनावों और 2019 के देखते हुए अब किसानों पर फोकस कर रही है. हाल में केंद्र सरकार ने कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए हैं.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पिछले साल से इस महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दिलाने की कोशिश में लगी हैं. वह इसके लिए गत जून महीने में जल संसाधन मंत्री से मिली थीं और उन्होंने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग की थी.
जानकारों के अनुसार यह परियोजना राज्य के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है. इसे केंद्रीय जल आयोग से पिछले साल ही मंजूरी मिल गई थी, लेकिन केंद्र सरकार इसके तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कर रही थी.
दक्षिण-पूर्व राजस्थान के एक दर्जन जिलों की बुझेगी प्यास
ईआरसीपी परियोजना के तहत दक्षिणी राजस्थान की नदियों के अतिरिक्त जल को नहरों के द्वारा दक्षिण-पूर्व राजस्थान के उन इलाकों में भेजा जाएगा जहां पानी की भारी तंगी रहती है. इससे वसुंधरा राजे के गृह जिले झालवाड़ के अलावा बारा, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करोली, अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिले को फायदा होगा.
गौरतलब है कि झालवाड़, बारा, कोटा और बूंदी जैसे लहसुन उत्पादन के इलाके में सिंचाई के लिए जल की भारी तंगी रहती है. इस इलाके में कई किसान आत्महत्या कर चुके हैं. यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान के की तरह ही होगी.
दिनेश अग्रहरि