पंजाब के भवानीगढ़ से सामने आया ट्रक यूनियन विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में उभर चुका है. इस पूरे घटनाक्रम में आम आदमी पार्टी के दो गुटों के बीच टकराव खुलकर सामने आया, जिसने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया. दरअसल, मामला भवानीगढ़ ट्रक यूनियन के प्रधान पद के चुनाव से जुड़ा हुआ है.
दो गुटों में टकराव
जानकारी के अनुसार, ट्रक यूनियन की प्रधानगी को लेकर आम आदमी पार्टी के भीतर ही दो धड़े बन गए. एक धड़ा गुरमेल सिंह घराचों के समर्थन में था, जबकि दूसरा धड़ा संगरूर की विधायक नरेंद्र कौर भराज के समर्थकों का था. पहले धड़े ने मालविंदर सिंह माला के गले में हार डालकर उन्हें सर्वसम्मति से भवानीगढ़ ट्रक यूनियन का प्रधान घोषित कर दिया. इस मौके पर उनके समर्थकों ने खुशी जाहिर की और सरकार तथा पार्टी नेताओं का धन्यवाद किया.
मालविंदर सिंह माला ने भी अपनी नियुक्ति पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सर्वसम्मति से चुना गया है और वह यूनियन के हित में काम करेंगे. लेकिन दूसरी ओर, विधायक नरेंद्र कौर भराज के समर्थकों ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए. उनका आरोप था कि उन्हें पहले डिटेन कर लिया गया और प्रधानगी के चुनाव के लिए अगली तारीख का बहाना बनाकर उनकी अनुपस्थिति में फैसला लिया गया. उन्होंने इसे पूरी तरह गलत और अलोकतांत्रिक करार दिया.
स्थिति तब और बिगड़ गई जब विधायक भराज मौके पर पहुंचीं और उन्होंने अपने समर्थकों को डिटेंशन से बाहर निकलवाया. इसके बाद उनके समर्थकों ने अलग से अपने उम्मीदवार को प्रधान घोषित कर दिया. इस फैसले के विरोध में उन्होंने बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे को जाम कर दिया और सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
हाईवे जाम होने से यातायात ठप
हाईवे जाम होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे और अपने फैसले को सही ठहराते रहे. मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देखते ही देखते विवाद हिंसक रूप ले बैठा. पुलिस प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों को समझाने और हाईवे खाली करवाने की कोशिश की गई. डीएसपी राहुल कौशल ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और रास्ता खोलने की अपील की थी, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई. प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस टीम पर पथराव किया गया, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए.
इसके अलावा पुलिस की दो गाड़ियों और कुछ निजी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा. इस घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी शुरू कर दी है, हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी.
इस पूरे विवाद ने यह साफ कर दिया है कि ट्रक यूनियन की प्रधानगी का मुद्दा अब केवल एक संगठनात्मक मामला नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है. दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवार को वैध प्रधान बता रहे हैं और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. फिलहाल, इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी के दोनों गुटों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के प्रयास कर रहा है.
अब देखने वाली बात यह होगी कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या दोनों गुटों के बीच कोई समझौता हो पाता है या यह टकराव आगे और बढ़ता है.
aajtak.in