गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार को स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के बेटे नारायण साई की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने रेप केस में मिली उम्रकैद की सजा को निलंबित करने की मांग की थी. अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि साई अपने खिलाफ दायर अपील की सुनवाई जल्दी करवाने में रुचि नहीं रखते और लगातार देरी की रणनीति अपना रहे हैं.
न्यायमूर्ति इलेश जे. वोरा और आर.टी. वच्छाणी की पीठ ने कहा कि 2019 से अब तक साई ने अपील की अंतिम सुनवाई में सहयोग नहीं किया, बल्कि बार-बार अस्थायी और स्थायी जमानत के लिए कई आवेदन दाखिल किए. कोर्ट ने यह भी कहा कि 2021 में अपील की अंतिम सुनवाई तय की गई थी, लेकिन साई कभी इसके लिए तैयार नहीं हुए.
नारायण साई सूरत जेल में है बंद
गौरतलब है कि 2013 में सूरत की दो बहनों ने आसाराम और नारायण साई के खिलाफ दुष्कर्म और अवैध बंधक बनाने के आरोप लगाए थे. इसके बाद 2019 में सूरत की अदालत ने नारायण साई को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. फिलहाल वह सूरत की जेल में बंद हैं.
साई ने अपनी याचिका में कहा था कि वह 11 साल से जेल में हैं और उनकी अपील की सुनवाई में देरी हो रही है. हालांकि, हाई कोर्ट ने साफ कहा कि इस देरी के लिए खुद साई जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने सुनवाई में सहयोग नहीं किया.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके ये टिप्पणियां प्रारंभिक हैं और केवल सजा निलंबन की याचिका तक सीमित हैं. साथ ही कोर्ट ने उनकी अपील की सुनवाई 12 जून को तय की है और उम्मीद जताई है कि उस दिन साई सुनवाई में सहयोग करेंगे.
नारायण साई की पत्नी ने मांगा था तलाक
नारायण साई की निजी जिंदगी से जुड़ा एक और मामला भी सामने आया था, जब उनकी पत्नी जानकी हरपलानी ने उनसे अलग होने के लिए अदालत का रुख किया. इंदौर की रहने वाली जानकी ने वर्ष 2018 में फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल करते हुए मानसिक प्रताड़ना समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में एकमुश्त 5 करोड़ रुपये की मांग की और अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज भी पेश किए.
इस मामले की सुनवाई के दौरान 24 मार्च को नारायण साई को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया, जहां उनका बयान दर्ज किया गया. इससे पहले 2018 में ही फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया था कि साई अपनी पत्नी को हर महीने 50 हजार रुपये भरण-पोषण के तौर पर दें. हालांकि, जानकी का आरोप है कि पिछले आठ वर्षों में उन्हें एक भी किस्त नहीं मिली.
ब्रिजेश दोशी