पंजाब में भगवंत मान सरकार का एक्शन, 2 सीनियर IAS अधिकारी सस्पेंड

पंजाब सरकार ने 2 आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. दोनों को क्यों सस्पेंड किया गया है, इसके कारणों को नोटिस में नहीं बताया गया है. सस्पेंशन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों को चंडीगढ़ में रहना होगा.

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान.  (File Photo: ITG) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • चंडीगढ़,
  • 08 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:43 AM IST

पंजाब सरकार ने शनिवार को दो सीनियर IAS अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. एक एजेंसी के मुताबिक आधिकारिक आदेशों के अनुसार कमल किशोर यादव और जसप्रीत सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि उनके सस्पेंशन के कारणों का आदेशों में ज़िक्र नहीं किया गया है. सूत्रों ने बताया कि यह केंद्र सरकार के मिशन सक्षम आंगनवाड़ी के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए स्मार्टफोन खरीदने में छह साल की देरी के कारण हुआ.

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आदेश में बताया गया है कि स्मार्टफोन देने के लिए सरकार द्वारा चुने गए वेंडर ने देरी के लिए कोर्ट का रुख किया था. कहा जा रहा है कि इस मामले में दो और IAS अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया है. जिनमें विकास प्रताप भी शामिल हैं. विकास प्रताप सामाजिक सुरक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थे.

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IAS अधिकारी कमल किशोर यादव 2003 बैच के IAS अधिकारी हैं. वह उद्योग और वाणिज्य विभाग, निवेश संवर्धन व सूचना प्रौद्योगिकी संवर्धन के प्रशासनिक सचिव थे. वहीं जसप्रीत सिंह 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं. वह पंजाब सूचना और संचार प्रौद्योगिकी निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं.

दोनों अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 3 (1) के तहत सस्पेंड किया गया है. आदेशों में कहा गया है कि सस्पेंशन की अवधि के दौरान वे चंडीगढ़ में रहेंगे. इस बीच IAS अधिकारी गुरकीरत किरपाल सिंह को उद्योग, निवेश संवर्धन और सामाजिक सुरक्षा की ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं. सिंह पिछले 11 महीनों से बिना किसी पोस्टिंग के थे.

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आपको बता दें कि यह AAP सरकार के दौरान किसी IAS अधिकारी के सस्पेंड होने का पहला मामला नहीं है. इससे पहले फरवरी 2025 में राज्य सरकार ने तत्कालीन मुक्तसर के डिप्टी कमिश्नर राजेश त्रिपाठी को "भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतों" के बाद सस्पेंड कर दिया था.

इसके अलावा अगस्त 2023 में सीनियर IAS अधिकारियों डी के तिवारी और गुरप्रीत सिंह खैरा को सस्पेंड कर दिया गया था. दोनों को पंचायतों को भंग करने के संबंध में "तकनीकी रूप से गलत" फैसला लेने के लिए सस्पेंड किया गया था.

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