मेडिकल स्टूडेंट्स पर बयान से विवादों में रहीं, डॉक्टर हैं 4 बार की सांसद... जानिए कौन हैं काकोली घोष

तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार को ममता बनर्जी ने लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से हटा दिया. केंद्र सरकार ने काकोली घोष को लगे हाथ वाई कैटेगरी की सुरक्षा दे दी. काकोली घोष दस्तीदार कौन हैं?

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काकोली घोष ने 2009 में लड़ा था पहला चुनाव (Photo: ITG) काकोली घोष ने 2009 में लड़ा था पहला चुनाव (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

पश्चिम बंगाल में सत्ता से सियासी पार्टियों तक बदलाव की बयार है. शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार ताबड़तोड़ फैसले लिए जा रही है. वहीं, 15 साल बाद सत्ता से हटी ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस भी बदलाव के दौर से गुजर रही है. ताजा बदलाव लोकसभा में चीफ व्हिप के पद पर हुआ है. ममता बनर्जी ने काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हिप के पद से हटाकर यह जिम्मेदारी कल्याण बनर्जी को सौंप दी है.

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काकोली घोष को जहां उनकी अपनी पार्टी टीएमसी ने चीफ व्हिप से हटा दिया, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने सुरक्षा बढ़ा दी. केंद्र सरकार ने काकोली घोष दस्तीदार को वाई कैटेगरी की सुरक्षा दे दी है. थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने टीएमसी सांसद काकोली घोष को सीआईएसएफ की यह सुरक्षा देने का ऐलान किया है. काकोली घोष कौन हैं?

66 साल की काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की बारासात लोकसभा सीट से चार बार की सांसद हैं. टीएमसी ने काकोली घोष को बारासात सीट से साल 2009 में पहली बार टिकट दिया था और वह विजयी आगाज करने में सफल रही थीं. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं. काकोली टीएमसी की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं.

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज से की है पढ़ाई

काकोली घोष दस्तीदार पेश से डॉक्टर हैं. उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज से की है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद काकोली घोष दस्तीदार ने लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज से भी पढ़ाई की है. चर्चित आरजी कर रेप केस के बाद वह अपने बयान को लेकर विवादों में रहीं.   काकोली घोष ने तब कहा था कि जब मैं मेडिकल स्टूडेंट थी, तब छात्राएं शिक्षकों की गोद में बैठकर पासिंग मार्क्स प्राप्त करती थीं, यह चलन था.

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उन्होंने तब यह भी दावा किया था कि इसका विरोध करने वाली छात्राओं को कम नंबर दिए जाते थे. काकोली घोष दस्तीदार के इस बयान पर खूब हंगामा मचा. डॉक्टरों ने उनके इस बयान पर नाराजगी जताई थी. चिकित्सकों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से उनका रजिस्ट्रेशन निलंबित करने की मांग तक कर डाली थी. विवाद बढ़ने के बाद काकोली घोष ने अपने इस बयान के लिए माफी मांग ली थी.

बारासात के डिगबेरिया में बीता बचपन

राजनीति में कदम रखने से पहले चिकित्सक के रूप में भी सक्रिय योगदान दिया. सक्रिय राजनीति में आने के बाद भी काकोली घोष दस्तीदार के संसदीय जीवन पर इसकी छाप नजर आती है. वह स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित मुद्दों को लेकर संसद में मुखर रही हैं और महिलाओं के अधिकार से जुड़े मुद्दे भी संसद में उठाती आई हैं.

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टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के बारासात की ही रहने वाली हैं. उनका बचन बारासात के डिगबेरिया में बीता है. काकोली घोष दस्तीदार के पति डॉक्टर सुदर्शन घोष दस्तीदार भी प्रतिष्ठित चिकित्सक हैं और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रहे हैं. डॉक्टर सुदर्शन घोष बांझपन के उपचार के लिए प्रसिद्ध हैं और आईवीएफ के विशेषज्ञ हैं.

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