मोदी ने रखा बीजेपी के भविष्य की पॉलिटिक्स का ब्लू प्रिंट, नितिन नबीन उसे जमीन पर कैसे उतारेंगे?

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद नितिन नबीन ने मंगलवार को संभाल लिया है. नितिन नबीन की ताजपोशी कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने उन्हें माला पहनाकर बधाई दी, लेकिन साथ ही बीजेपी के भविष्य के ब्लू प्रिंट को जमीन पर उतारने का टारगेट दे दिया है. ऐसे में देखना होगा कि नितिन नबीन कैसे उसे साकार करते हैं?

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सीढ़ियों पर दिखा बीजेपी का पीढ़ी परिवर्तन (Photo-PTI) सीढ़ियों पर दिखा बीजेपी का पीढ़ी परिवर्तन (Photo-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:43 PM IST

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन की ताजपोशी के साथ  एक नए युग की शुरुआत हो गई. पार्टी अध्यक्ष बनने के साथ नितिन सामने सबसे बड़ी चुनौती पीएम मोदी के द्वारा रखे गए बीजेपी के भविष्य की पॉलिटिक्स का ब्लू प्रिंट को जमीन पर उतारने की है. पंचायत से पॉर्लियामेंट तक बीजेपी को मजबूत कर मोदी ने जो सियासी आधार शिला रखा है, उसे सिर्फ बचाए रखने की नहीं बल्कि 'नेक्स्ट जेन' पॉलिटिक्स में तब्दील करने का जिम्मा नितिन नबीन के कंधों पर है. 

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नितिन नबीन जैसे युवा नेता को संगठन की कमान सौंपना यह बताता है कि बीजेपी अब पूरी तरह से 'नेक्स्ट जेन' लीडरशिप पर अपना फोकस कर रही है. बीजेपी अब 2029 और उसके बाद के भारत की तस्वीर देख रही है. आरएसएस भी कहता रहा है कि बीजेपी को भविष्य की लीडरशिप पर अपना फोकस करना चाहिए. 

बीजेपी ने नितिन नबीन के रूप में 45 साल के युवा चेहरे को पार्टी की बागडोर सौंपकर साफ कर दिया है कि पार्टी की नजर नए नेताओं को आगे लाने पर है. नितिन नबीन ने पार्टी संगठन की बागडोर संभालते ही युवाओं को राजनीति में आने का खुला ऑफर देकर साफ कर दिया है कि पीएम मोदी ने बीजेपी के भविष्य के लिए जो रणनीति तैयार की है, उसे लेकर वो सिर्फ गंभीर ही नहीं बल्कि जमीन पर उतारने का खाका भी उनके पास है? 

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मोदी के सपने को जमीन पर उतारेंगे नबीन
बीजेपी ने नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि  हमारा शीर्ष नेतृत्व और यहां पर बैठा हुआ पार्टी का वैसा नेतृत्व जिसने हर बूथ तक बीजेपी के विस्तार में योगदान दिया है. आपने मुझ जैसे सामान्य कार्यकर्ता को पार्टी का इस सर्वोच्च पद तक पहुंचाने का अवसर दिया है. मैं इसके लिए आप सभी को प्रणाम करता हूं. साथ ही पीएम मोदी के सपने को साकार करने के लिए नितिन नबीन ने पहले ही भाषण में संकेत दे दिए हैं. 

नितिन नबीन ने कहा, 15 अगस्त 2024 को पीएम मोदी ने युवाओं को सार्वजनिक जीवन में आने का आह्वान किया है. पीएम मोदी ने एक लाख नए युवाओं को राजनीति में लाने का ऐलान किया था. उसी बात को जमीन पर उतारने के लिए नितिन नबीन ने कहा कि मैं युवाओं से कहना चाहूंगा, राजनीति से दूरी समाधान नहीं,सक्रिय भागीदारी ही समाधान है, लेकिन राजनीति शॉर्टकट नहीं है, राजनीति 100 मीटर की रेस नहीं है. 

देश के युवाओं को राजनीति में आने का नितिन नबीन ने खुला ऑफर दिया, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया है कि सियासत शॉर्ट टर्म कोर्स नहीं बल्कि  लंबी रेस है. उन्होंने कहा कि राजनीति लॉन्ग मैराथन है, जहां पर स्पीड का नहीं स्टैमिना का टेस्ट होगा, इसलिए जरूरी है कि राजनीति की पिच पर हम अपनी जड़ों को मजबूत करके बैटिंग करें. हम ऐसे राजनीतिक दल से जुड़े हैं, जहां राजनीति सत्ता नहीं, साधना है. राजनीति भोग नहीं, त्याग है. राजनीति ऐशो-आराम नहीं, तपस्या है, राजनीति कोई पदभार नहीं, उत्तरदायित्व है.

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बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने का लक्ष्य 
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से बीजेपी का देश भर में सियासी विस्तार हुआ है. बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में है और देश के 20 राज्यों में उसकी खुद की सरकार है या फिर उसके समर्थन से सरकार चल रही है. पीएम मोदी ने नितिन नबीन के सामने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों के योगदान का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे अटल-आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के कार्यकाल में शून्य से शिखर तक का पार्टी से सफर तय किया. 

राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बीजेपी पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई और अमित शाह के अगुवाई में सरकार ने केंद्र में रिपीट किया. जेपी नड्डा के  अगुवाई में पंचायत से पॉर्लियामेंट तक बीजेपी मजबूत हुई. अब पार्टी को आगे बढ़ाने का जिम्मा नितिन नबीन के कंधों पर है. ऐसे में नितिन नबीन के सामने बीजेपी के सियासी विस्तार करने की चुनौती है, खासकर दक्षिण भारत में, जहां अभी भी उसकी राह काफी मुश्किलों भरी है. 

बीजेपी का सियासी सूखा खत्म कर पाएंगे नबीन 
नितिन नबीन की ताजपोशी ऐसे समय हो रही है, जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है. इन पांच राज्यों में से बीजेपी सिर्फ असम में अपने ही दम पर सरकार चली रही है. बंगाल, तमिलनाडु और केरल में अभी तक बीजेपी सत्ता में नहीं आ सकी है. इस तरह से नितिन नबीन ने अध्यक्ष पद संभालते ही पांच राज्यों के चुनावी टारगेट सेट कर दिया है. 

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बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा, ‘अगले कुछ महीनों में तमिलनाडु, असम, बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव होने वाला है और वहां की डेमोग्राफी की चर्चा हो रही है कि किस प्रकार वहां डेमोग्राफी बदल रही है. यह हमारे लिए चुनौती है, लेकिन हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि भाजपा का कार्यकर्ता अपने संघर्ष और परिश्रम के बल पर इन पांचों राज्यों में सशक्त भाजपा का नेतृत्व प्रदान करेगा. साथ ही नितिन नबीन ने कहा कि सनातन की परंपरा को बचाए रखना है तो हमें पांच राज्यों में मजबूत होकर आना होगा. 

 बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को कैसे करेंगे मजबूत
बीजेपी एक समय ब्राह्मण, बनिया और ठाकुरों की पार्टी मानी जाती थी, लेकिन पीएम मोदी ने पार्टी की इस छवि को बदला है.  उसे दलित और ओबीसी के बीच मजबूत करने का काम किया है. इस तरह बीजेपी की नई सोशल इंजीनियरिंग खड़ी है. इस तरह अलग-अलग जातियों में बिखरे हुए हिंदू मतदाताओं को हिंदुत्व की छतरी के नीचे पीएम मोदी ने एकजुट किया है, जिसे दम पर ही बीजेपी एक बाद के एक चुनावी जंग जीत रही है. पीएम मोदी के इस फॉर्मूले को सिर्फ बचाए रखने की चुनौती नितिन नबीन के सामने नहीं बल्कि उसे बढ़ाने का जिम्मा होगा, 

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देश में जनगणना का काम शुरू हो गया है. आजादी के बाद पहली बार देश में जाति जनगणना भी कराई जा रही है. माना जा रहा है कि इसके नतीजे देश की राजनीति पर काफी असर डालेंगे. इन बदलावों से तालमेल बिठाना भी नितिन नबीन के सामने आने वाली चुनौतियों में प्रमुख होगी. जनगणना के बाद ओबीसी जातियों और सवर्ण जातियों की सही-सही जनसंख्या का पता चलेगा. माना जा रहा है कि इससे पिछड़ी जातियों की राजनीति को नए पंख मिल जाएंगे. पिछले कुछ सालों में धर्म और मंदिर की राजनीति छोड़कर जाति की राजनीति की ओर कदम बढ़ा रही बीजेपी के लिए नए राजनीतिक माहौल में सामंजस्य बिठाना भी बड़ी चुनौती होगी. 
 

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